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राष्ट्रीय शिक्षा दिवस: कभी शिक्षा का प्रमुख केंद्र था प्रकाशकों का हब बना दरिया गंज

राजधानी में विगत कई वर्षों से प्रकाशन का हब बने दरिया गंज की पहचान आजादी के कई सालों बाद तक शिक्षा केंद्र के रूप में थी। आज यहां सौ साल पुराने स्कूलों की संख्या राजधानी के किसी भी क्षेत्र से अधिक है। 

राष्ट्रीय शिक्षा दिवस: कभी शिक्षा का प्रमुख केंद्र था प्रकाशकों का हब बना दरिया गंज
Arti Tripathiअभिनव उपाध्याय,नई दिल्लीFri, 10 Nov 2023 10:14 PM
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सामाजिक कार्यकर्ता मसरूर हसन सिद्दिकी राजधानी दरिया गंज में बच्चों का घर मुस्लिम अनाथालय के संरक्षक हैं। वह बताते हैं कि 1911 में जब दिल्ली राजधानी बनी तब उन्होंने दरिया गंज को एक शिक्षा के केंद्र के रूप में बनाना शुरू किया। यहां पर 1918 में उन्होंने शिक्षण संस्थानों के लिए जमीन देनी शुरू की। एंग्लो संस्कृति स्कूल, सरदार कौर खालसा, मुस्लिम अनाथ बच्चों के लिए अनाथालय की भूमि और शैक्षणिक संस्थान के भूमि, जैन बाल आश्रम, महावीर जैन सीनियर सेकेंडरी स्कूल, रामजस स्कूल, हैप्पी स्कूल, फ्रांसिस गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल सहित कुछ कमर्शियल स्कूलों के लिए भी जगह दी। ये सभी स्कूल आजादी से पहले के बने हैं। इसमें कई 100 साल पुराने संस्थान भी हैं। महारानी विक्टोरिया की स्वर्ण जयंती के अवसर पर एंग्लो संस्कृत विक्टोरिया जुबली स्कूल नाम दिया गया। भाजपा नेता हर्षवर्धन यहीं के पढ़े हैं। कई निजी स्कूल भी थे जो अब यहां से स्थानांतरित हो गए हैं। 

राजधानी दिल्ली बनने के बाद अंग्रेजों ने यहां शैक्षणिक संस्थान बनाना चाहते थे। शाहजहानाबाद के इलाके और इस इलाकों में जनसंख्या भी अधिक थी इसलिए यहां और पुरानी दिल्ली में पुराने स्कूलों की संख्या अधिक है। हालांकि, भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद के परिवार से ताल्लुक रखने वाले शिक्षाविद फिरोज बख्त अहमद का कहना है कि वास्तव में, मुगलों के आगमन से पूर्व ही, पुरानी दिल्ली शिक्षा का केंद्र बन चुकी थी क्योंकि कटरा नील के प्राचीनतम शिव मंदिर और चांदनी चौक के कटरा लहसवां में आर्य समाज मंदिर के निकट पाठशालाएं हुआ करती थीं, जहां बच्चों को संस्कारी शिक्षा प्रदान की जाती थी।  यहां जैन स्थानक भी है, जो बहुत बड़ा पुस्तकालय और अध्ययन केंद्र भी है।

फिर जब सुलतानों और मुगलों का आगमन हुआ तो, नामचीन मदरसे बनने लगे, जैसे, मदरसा गाजीउद्दीन ख़ान (अजमेरी गेट), मदरसा आलिया (मस्जिद फतेहपुरी), मदरसा हुसैन बख्श (जामा मस्जिद)। मदरसा गाजीउद्दीन ख़ान, आगे जा कर फिर एंग्लो अरेबिक कॉलेज, दिल्ली कॉलेज और एंग्लो अरेबिक स्कूल भी बना। अंग्रेज फिरंगियों के आने के बाद यहां अन्य कई ऐतिहासिक स्कूल और कॉलेजों की स्थापना भी हुई, जैसे, इंद्रप्रस्थ गर्ल्स स्कूल (जमा मस्जिद), सेंट स्टीफेंस कॉलेज (मॉरिस नगर), इंद्रप्रस्थ कॉलेज (अलीपुर रोड), एंग्लो संस्कृत स्कूल (दरिया गंज), मॉडर्न स्कूल (बाराखंबा रोड) आदि।  

पुरानी दिल्ली व उत्तरी दिल्ली में ये शिक्षण संस्थान बनने का कारण यह था कि मुगलों के समय दिल्ली के बारे में फारसी में कहा जाता कि दिल्ली लाल किला ता महरोली, अर्थात्, दिल्ली लाल किले से महरौली तक ही ही है। इसके अतरिक्त, कुछ बड़े पुस्तकालय, जैसे, हरदयाल हार्डिंग लाइब्रेरी, दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी, शाह वलीउल्लाह लाइब्रेरी आदि।

क्यों मनाया जाता है कि राष्ट्रीय शिक्षा दिवस
राष्ट्रीय शिक्षा दिवस हर साल 11 नवंबर को मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य शिक्षा के महत्व के बारे में दुनिया भर में जागरूकता फैलाना है। इस दिन को मनाने की घोषणा 11 सितंबर, 2008 को केंद्र सरकार ने की थी। इस दिन को मनाने का मकसद भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की उपलब्धियों को याद रखना था जो आज़ाद स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री थे और उन्होंने भारत की शिक्षा प्रणाली की नींव रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।

दिल्ली को कर्मस्थली मानते थे मौलाना आजाद 
मौलाना आजाद के पौत्र फिरोज बख्त अहमद कहते हैं कि भारत के प्रथम शिक्षामंत्री, भारत रत्न मौलाना आजाद  भी कोलकाता से लगभग 1920में उस समय दिल्ली आ गए थे, जब महात्मा गांधी और पंडित नेहरू ने उन्हें और श्याम सुंदर घोष को भारत के स्वाधीनता संग्राम को सशक्त बनाने के लिए दिल्ली आमंत्रित किया। तब मौलाना आज़ाद के पास रहने को जगह और देने को किराया नहीं था, मगर शिक्षा से अथाह मोह था और शिक्षा के महत्व को समझते थे। दिल्ली को कर्म स्थली मानते थे। उस समय उन्हें हमदर्द के हकीम अब्दुल हमीद ने दरिया गंज में अपनी हवेली में एक कमरा रहने को दे दिया। मौलाना आज़ाद के निजी पुस्तकालय में हजारों पुस्तकें थीं, जिन्हें उन्होंने आईसीसीआर को सौंप दिया। मौलाना आजाद के बारे में कैबिनेट मिशन के सर पेथिक अलेक्जेंडर ने 1947 में उनके बारे में एक बार कहा था कि जहां गांधीजी का दिमाग साईकिल  की रफ़्तार से दौड़ता है, मौलाना आज़ाद का दिमाग़, हवाई जहाज के रफ़्तार से उड़ता है।

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