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CUET : डीयू में 5000 सीटें खाली, आज से दाखिले का मौका, 15 अक्टूबर तक करना होगा आवेदन

दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातक में दाखिले से वंचित छात्रों के लिए नामांकन का एक और मौका है। डीयू ने अधिसूचना जारी कर कहा है कि रिक्त सीटों पर दाखिले के लिए अभ्यर्थी बुधवार से आवेदन कर सकते हैं।

CUET : डीयू में 5000 सीटें खाली, आज से दाखिले का मौका, 15 अक्टूबर तक करना होगा आवेदन
Pankaj Vijayप्रमुख संवाददाता,नई दिल्लीWed, 11 Oct 2023 11:35 AM
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दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में स्नातक में दाखिले से वंचित छात्रों के लिए नामांकन का एक और मौका है। डीयू ने अधिसूचना जारी कर कहा है कि रिक्त सीटों पर दाखिले के लिए अभ्यर्थी बुधवार से आवेदन कर सकते हैं। दाखिला पोर्टल पर कॉलेजों में रिक्त सीटों की जानकारी होगी। अभ्यर्थी 15 अक्टूबर तक आवेदन और 20 अक्टूबर तक शुल्क जमा कर सकते हैं। उनको admission.uod.ac.in/?UG-Admissions पर विस्तृत जानकारी मिलेगी। ज्ञात हो डीयू में स्नातक के विभिन्न कोर्स में पांच हजार से अधिक सीटें खाली हैं। अधिकांश सीटें भाषा और बीए प्रोग्राम में खाली हैं। कई कॉलेजों में प्रोग्राम के कॉम्बिनेशन विषयों में सीटें बची हैं। नॉर्थ कैंपस की अपेक्षा साउथ कैंपस के कॉलेजों में ज्यादा सीटें खाली हैं। 

 कॉलेज उत्सवों में छात्राओं की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम हों : उच्च न्यायालय
 दिल्ली उच्च न्यायालय ने कॉलेज में आयोजित उत्सवों की सुरक्षा में सेंधमारी की घटनाओं का स्वत: संज्ञान लिया है। उच्च न्यायालय ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि कॉलेज उत्सवों में छात्राओं की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम होने चाहिए। उच्च न्यायालय का यह निर्देश आईआईटी दिल्ली में हुई घटना के बाद आया है। इसमें डीयू की कई छात्राओं ने आरोप लगाया है कि संस्थान में आयोजित एक फैशन शो के दौरान आईआईटी दिल्ली के वॉशरूम में कपड़े बदलते समय गुप्त रूप से उनका वीडियो बनाया गया था। 

मुख्य न्यायाधीश सतीश शर्मा की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने आदेश में कहा कि यह जरूरी है कि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए जाएं, ताकि छात्र-छात्राओं को सुरक्षा में सेंधमारी की ऐसी घटनाओं का सामना न करना पड़ा। उच्च न्यायालय के समक्ष इससे पहले फरवरी 2020 में दिल्ली विश्वविद्यालय के गार्गी कॉलेज में आयोजित एक सांस्कृतिक उत्सव के दौरान छात्राओं के कथित यौन उत्पीड़न का मामला भी सामने आया था। उसने कहा कि दुर्भाग्य से इस अदालत के सामने ऐसे आयोजनों के दौरान छात्राओं के उत्पीड़न के कई और मामले आ रहे हैं। उच्च न्यायालय ने कहा कि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति आयोजकों के उदासीन रवैये को दर्शाती है, जिनका कार्य कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले छात्र-छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। 

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