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CTET 2018: गणित और अंग्रेजी के सवालों ने परीक्षार्थियों के छुड़ाए पसीने

अंग्रेजी के लम्बे पैसेज और सिलेबस बाहर से आए गणित के सवालों ने रविवार को सीटीईटी अभ्यर्थियों के पसीने छुड़ा दिया। खासकर अंग्रेजी का पेपर काफी बड़ा था। इसकी वजह से अभ्यर्थियों का समय एक ही पेपर को हल करने में लग गया। वहीं, कुछ परीक्षार्थियों का कहना था कि दो सवाल गलत तरीके से पूछे गए। इनमें पर्यावरण के पेपर में इतिहास का सवाल पूछ लिया गया जबकि इतिहास के सवालों में साइंस का सवाल पूछा गया। 

सीबीएसई की ओर से केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) का आयोजन रविवार को शहर के 161 परीक्षा केन्द्रों पर किया गया। इसमें अधिकतर सीबीएसई स्कूल, केन्द्रीय विद्यालयों को परीक्षा केन्द्र बनाया गया था। सीटीईटी की परीक्षा में करीब सवा लाख अभ्यर्थियों को शामिल होना था। परीक्षा का आयोजन दो पालियों में किया गया था। इसमें  पेपर-2 सुबह की पाली में 9.30 बजे से 12 बजे तक और पेपर-1 दूसरी पाली में 2 से शाम 4.30 बजे तक हुआ। जानकारों की मानें तो परीक्षा से करीब दस प्रतिशत छात्र अनुपस्थित रहें। 

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अंग्रेजी के पैसेज आए लेंथी
छात्रा नेहा ने बताया कि अंग्रेजी के पैसेज काफी लम्बे आए थे। इनको करने में काफी समय चला गया। इसके अलावा गणित के कुछ सवाल भी सिलेबस के बाहर से पूछे गए थे। छात्र विवेक ने बताया कि पर्यावरण और साइकोलॉजी को पेपर काफी अच्छा आया था। विद्या ने बताया कि हिन्दी के सवाल बहुत ही आसान थे जबकि अंग्रेजी ने तो सभी परीक्षार्थियों के पसीने छुड़ा दिए। 

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पर्यावरण में पूछा इतिहास का प्रश्न
एसएल कश्यप ने बताया कि पर्यावरण के पेपर में एक सवाल पूछा गया था कि गोलकांडा किला किसने बनाया। ये प्रश्न इतिहास का था जबकि पूछा पर्यावरण में गया। वहीं, इतिहास में कुछ सवाल सिलेबस के बाहर से आए थे। वहीं, पेपर की भाषा को लेकर भी अभ्यर्थियों में काफी असमंजस था। असल में बोर्ड ने जब पेपर का विकल्प पूछा गया था तो उसमें कुछ अभ्यर्थियों ने हिन्दी तो कुछ ने अंग्रेजी का विकल्प चुन लिया था लेकिन जब पेपर मिला तो उसमें दोनों विकल्प थे। इसे लेकर अभ्यर्थी काफी परेशान रहे। 

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संस्कृत को पूछा ही नहीं गया
कैथाड्रल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में बाराबंकी से परीक्षा देने आई छात्रा नेहा वर्मा ने बताया कि उन्होंने अंग्रेजी और संस्कृत में से संस्कृत विकल्प को चुना था लेकिन जब परीक्षा देने पहुंची तो संस्कृत का विकल्प पेपर में मौजूद ही नहीं था। इसे लेकर भी कई छात्रों ने अपनी शिकायत दर्ज कराई। 

बातचीत 
गणित के सवाल बहुत ही मुश्किल आए थे जबकि हिन्दी का पेपर काफी अच्छा हुआ है। जूनियर वर्ग का पेपर थोड़ा मुश्किल था। 
अजीत 
अंग्रेजी के सवाल काफी लम्बे थे। इनको करने में काफी समय लगा। हालांकि साइकोलॉजी का पेपर उम्मीद से अच्छा आया था। 
कृष्ण चंद
जूनियर और सीनियर वर्ग दोनों के ही पेपर काफी अच्छे आए थे। हालांकि अंग्रेजी के लम्बे पेपर की वजह से छात्रों को मुश्किल हुई। 
सुनील यादव
पर्यावरण के सवाल काफी आसान थे। इसकी जगह अंग्रेजी और हिन्दी के पेपर ने मुश्किल में डाल दिया लेकिन पेपर काफी अच्छा था
आयशा खातून
ओवरआल पेपर अच्छा आया था लेकिन कुछ सवाल गणित में सिलेबस के बाहर से पूछे गए थे। जो परेशानी का सबब बने रहे।
सीएल कश्यप
दोनों ही वर्ग में अंग्रेजी का पेपर ही काफी लम्बा होने से परेशानी हुई। बाकी विषयों में आसान सवाल पूछे गए थे। खासकर इतिहास के पेपर में। 
इमरान 

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