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हिंदी न्यूज़ करियरCCSU Ph.D exam : 31.9 ने छोड़ा एंट्रेंस, एमआईटी में सर्वर ने रुलाया

CCSU Ph.D exam : 31.9 ने छोड़ा एंट्रेंस, एमआईटी में सर्वर ने रुलाया

करीब छह साल बाद चौ.चरण सिंह विवि में पहली बार हुई ऑनलाइन पीएचडी प्रवेश परीक्षा में 31.92 फीसदी विद्यार्थी पेपर देने नहीं पहुंचे। नियत दो पालियों में पंजीकृत 2350 विद्यार्थियों में से केवल 16 सौ ने ही

CCSU Ph.D exam : 31.9 ने छोड़ा एंट्रेंस, एमआईटी में सर्वर ने रुलाया
Anuradha Pandeyप्रमुख संवाददाता,मेरठSun, 04 Dec 2022 06:45 AM

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करीब छह साल बाद चौ.चरण सिंह विवि में पहली बार हुई ऑनलाइन पीएचडी प्रवेश परीक्षा में 31.92 फीसदी विद्यार्थी पेपर देने नहीं पहुंचे। नियत दो पालियों में पंजीकृत 2350 विद्यार्थियों में से केवल 16 सौ ने ही पेपर दिया। मेरठ एवं गाजियाबाद के चार केंद्रों पर हुई इस परीक्षा में 68.08 फीसदी छात्र शामिल हुए और 31.92 फीसदी ने पेपर छोड़ दिए। उधर, परीक्षा को नकल विहीन कराने के लिए सुरक्षा कड़ी रही। बताते चलें पीएचडी प्रवेश परीक्षा आज भी चार केंद्रों पर दो पालियों में होगी।

सर्वर ने रुलाया, गलत खुला पेपर, बीच में उड़ा एमआईटी केंद्र पर सर्वर ने छात्रों को परेशान कर दिया। छात्रों के अनुसार एजुकेशन के पेपर में अर्थशास्त्रत्त् का पेपर खुला। परीक्षा एक घंटे देरी से शुरू हुई। इसी तरह पत्रकारिता के पेपर में आधे सवालों का हल कर चुके छात्रों की स्क्रीन आउट हो गई। छात्रों द्वारा हल किया गया पूरा पेपर उड़ गया। परेशान छात्रों ने केंद्र पर आपत्ति जताई। हालांकि विवि ने छात्रों को दोबारा से पूरा समय दिया। रजिस्ट्रार धीरेंद्र कुमार के अनुसार चार में से तीन केंद्रों पर कोई दिक्कत नहीं आई। सभी पर तय समय पर पेपर हुआ। एमआईटी केंद्र पर कॉलेज सर्वर में तकनीकी दिक्कत आई। इसी वजह से पेपर एक घंटे की देरी से शुरू हो पाया। पत्रकारिता के पेपर में भी दिक्कत आई, लेकिन दोनों ही पेपर में छात्रों को अतिरिक्त समय दिया गया। किसी भी छात्र का पेपर तकनीकी दिक्कत से नहीं छूटने दिया गया। रजिस्ट्रार के अनुसार केंद्रों पर कोई यूएफएम रिपोर्ट नहीं हुआ।

जिनोमिक चिप महत्वपूर्ण, होगा तेजी से विकसित मेरठ। सीसीएसयू कैंपस के बॉटनी विभाग में ‘मॉलिकूलर टूल्स एंड टेक्निक्स इन लाइफ साइंसेस’ विषय पर जारी एफडीपी में प्रो. एसवीएस राणा, डॉ. संदीप शर्मा, डॉ. सुधीर श्रीवास्तव ने व्याख्यान दिया। डॉ. संदीप शर्मा ने कहा कि फ्रांस, यूरोप एवं अन्य देशों की तर्ज पर हम मॉलीकुलर टूल्स विकसित कर सकते हैं। कहा कि पैदावार में अनुवांशिक लाभ, वर्तमान परिदृश्य में अन्य जटिल लक्षणों को पारंपरिक प्रजनन के आधार पर बनाए रखना मुश्किल होगा।