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हिंदी न्यूज़ करियरCCSU: अटल मेडिकल विश्वविद्यालय से नहीं जोड़ेंगे मेरठ मेडिकल कॉलेज

CCSU: अटल मेडिकल विश्वविद्यालय से नहीं जोड़ेंगे मेरठ मेडिकल कॉलेज

प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों में शुमार एलएलआरएम (लाला लाजपत राय मेमोरियल) मेडिकल कॉलेज को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय अपने से अलग नहीं करेगा। विश्वविद्यालय ने मेडिकल कॉलेज को प्रदेश की पहली मेडिकल...

CCSU: अटल मेडिकल विश्वविद्यालय से नहीं जोड़ेंगे मेरठ मेडिकल कॉलेज
Alakha Singhवरिष्ठ संवाददाता,मेरठSat, 22 Jan 2022 11:02 PM

प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों में शुमार एलएलआरएम (लाला लाजपत राय मेमोरियल) मेडिकल कॉलेज को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय अपने से अलग नहीं करेगा। विश्वविद्यालय ने मेडिकल कॉलेज को प्रदेश की पहली मेडिकल यूनिवर्सिटी को ट्रांसफर नहीं करने का फैसला लिया है। विश्वविद्यालय इस मेडिकल कॉलेज को अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी लखनऊ के बजाय सीसीएसयू से ही संबद्ध रखने के लिए शासन को पत्र लिखेगा। कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला की अध्यक्षता में हुई कार्यपरिषद की बैठक में विश्वविद्यालय ने उक्त फैसला लिया। विश्वविद्यालय ने कहा कि मेडिकल कॉलेज की स्थापना मेरठ विश्वविद्यालय के लगभग साथ हुई थी और यह विश्वविद्यालय का एकमात्र संघटक कॉलेज भी है। एनईपी में बहुविषयक विषयों की पढ़ाई पर जोर है। यदि विश्वविद्यालय एकमात्र संघटक मेडिकल कॉलेज को भी लखनऊ ट्रांसफर कर देगा तो एनईपी का उद्देश्य पूरा नहीं होगा।

लखनऊ से संबद्ध होने हैं मेडिकल कोर्स
शासन ने प्रदेश की पहली मेडिकल यूनिवर्सिटी लखनऊ में अटल बिहारी वाजपेयी के नाम से स्थापित की है। इस विश्वविद्यालय ने संबद्धता प्रक्रिया शुरू कर दी है। समस्त मेडिकल, डेंटल, नर्सिंग, पैरा-मेडिकल कोर्स अब अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय से संबद्ध हो रहे हैं। मेडिकल यूनिवर्सिटी पहले ही प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालय को कॉलेज ट्रांसफर के निर्देश दे चुकी है। मेरठ मेडिकल कॉलेज भी इसी प्रक्रिया से जुड़ा है।

13 सितंबर 1963 को पड़ी थी नींव
वेस्ट यूपी और पहाड़ी क्षेत्र (अब उत्तराखंड) की स्वास्थ्य जरूरतों को देखते हुए 13 सितंबर 1963 को यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्ता ने मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास किया था। बाद में कॉलेज का नाम लाला लाजपत रॉय के नाम पर रखा गया। तत्कालीन विधायक डॉ.कैलाश प्रकाश ने कॉलेज की स्थापना में सक्रिय भूमिका निभाई। अगस्त 1966 में पहले बैच में यूजी में 58 छात्रों के प्रवेश हुए। इस कॉलेज में एमएलबी मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंस दिल्ली के 50-50 छात्र भी प्रशिक्षित किए गए। 28 जनवरी 1969 को कॉलेज बिल्डिंग का लोकार्पण डॉ.बी गोपाला रेड्डी ने किया। 31 अक्तूबर 1967 को तत्कालीन मुख्यमंत्री चौ.चरण सिंह ने टीचिंग हॉस्पिटल का शिलान्यास किया। चौ.चरण सिंह विश्वविद्यालय की स्थापना एक जुलाई 1965 में हुई। यह विश्वविद्यालय कुछ दिन काम वर्तमान मेडिकल से भी संचालित हुआ था।

प्रोफेसर वी पुरी के नाम पर होगा सीआईएफ
विश्वविद्यालय में प्रस्तावित सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेशन फैसिलिटी (सीआईएफ) चर्चित वनस्पतिविद् प्रो.वी पुरी के नाम पर होगी। बैठक में दस छात्रों को शोध उपाधि देने पर भी मुहर लगी। आईटीएस इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड एप्लाइड साइंसेज ग्रेटर नोएडा में बीएससी-एमएससी बॉयोटेक्नोलॉजी कोर्स की संबद्धता समाप्त करने की संस्तुति कर दी है। कॉलेज ने इसका अनुरोध किया था।

विश्वविद्यालय के बाहर से हटेगा अतिक्रमण
विश्वविद्यालय बाहर की ओर अतिक्रमण हटाने के लिए शासन एवं जिला प्रशासन को पत्र लिखेगा। विश्वविद्यालय के अनुसार यहां रह रहे लोगों को अन्यत्र स्थानांतरित करने का अनुरोध किया जा रहा है।

ये रहे मौजूद
प्रोवीसी प्रो.वाई विमला, कुलसचिव धीरेंद्र वर्मा, वित्त अधिकारी सुशील कुमार गुप्ता, परीक्षा नियंत्रक डॉ.अश्विनी शर्मा, न्यायाधीश जम्मू पंकज मित्तल, डॉ.दर्शन लाल अरोडा, डॉ.अरुण कुमार सिंह, डॉ. हरिभाऊ गोपीनाथ खांडेकर, डॉ.अंजलि मित्तल, डॉ.आरसी गुप्ता, प्रो.आरके सोनी, प्रो.हरे कृष्णा, प्रो.विजय मलिक, डॉ.रमाकांत, डॉ.सचिन कुमार, डॉ.दीपशिखा, डॉ.स्मृति दानी, डॉ.जीनत जैदी, प्रो.प्रशांत कुमार एवं मितेंद्र कुमार गुप्ता मौजूद रहे।

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