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सीबीएसई और यूपी बोर्ड के कोर्स में छाए संगमनगरी के साहित्यकार

संजोग मिश्र,प्रयागराजPublished By: Pankaj Vijay
Tue, 08 Sep 2020 10:53 AM
सीबीएसई और यूपी बोर्ड के कोर्स में छाए संगमनगरी के साहित्यकार

शिक्षा की नगरी प्रयागराज के साहित्यकार सीबीएसई और यूपी बोर्ड की किताबों में छाए हुए हैं। कक्षा 9 से 12 तक की किताबों में ऐसे 31 रचनाकारों की रचनाएं शामिल हैं जो प्रयागराज में जन्मे, यहां पढ़े, यहीं रहकर साहित्य साधना की या फिर प्रयागराज से जुड़ाव रहा। इन साहित्यकारों ने अपनी कविताओं, कहानियों, संस्मरणों, नाटक व रेखाचित्रों आदि से हिंदी साहित्य को भरपूर समृद्धि प्रदान की। स्कूली किताबों में सर्वाधिक रचनाएं छायावाद के चार स्तंभों में से एक, हिंदी साहित्य की ‘सरस्वती’ तथा ‘आधुनिक युग की मीरा’ की उपाधि से विभूषित कवियित्री महादेवी वर्मा की पढ़ाई जाती हैं। 

क्रास्थवेट और इविवि से शिक्षा ग्रहण करने वाली महादेवी वर्मा का रेखाचित्र गिल्लू व कविता हिमालय से, वर्षा सुंदरी के प्रति व गीत यूपी बोर्ड जबकि मेरे बचपन के दिन, गिल्लू, मधुर मधुर मेरे दीपक जले, भक्तिन, जाग तुझको दूर जाना, सब आंखों के आंसू उजले को सीबीएसई ने अपने कोर्स में शामिल किया है। प्रयागराज   से प्रकाशित हंस पत्रिका का संपादन मुंशी प्रेमचंद की मंत्र और बलिदान यूपी बोर्ड में जबकि दो बैलों की कथा, बड़े भाई साहब, ईदगाह व नमक का दारोगा सीबीएसई में पढ़ाई जा रही है। कवि सुमित्रानंदन पंत की कविता चींटी, चंद्रलोक से प्रथम बार, नौका विहार, परिवर्तन, बापू के प्रति, मुक्तियज्ञ यूपी बोर्ड में और ग्रामश्री, पर्वत प्रवास, वे आंखें, संध्या के बाद सीबीएसई की पुस्तकों में शामिल है। 

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की उत्साह, अट नहीं रही, दान, बादल राग, गीत गाने दो मुझे व सरोज स्मृति कविता पाठ्यक्रम में है। फिराक गोरखपुरी की रुबाइयां व गजल और दुष्यंत कुमार के साये में धूप संग्रह की कविता भी कोर्स का हिस्सा है। धर्मयुग के संपादक डॉ. धर्मवीर भारती का निबंध ठेले पर हिमालय, मेरा छोटा सा निजी पुस्तकालय, काले मेघा पानी दे, सांझ के बादल जबकि डॉ. हरिवंश राय बच्चन की रचना अग्निपथ, पथ की पहचान, आत्मपरिचय, एक गीत शामिल हैं। आचार्य राम चन्द्र शुक्ल का निबंध  मित्रता, डॉ. भगवत शरण उपाध्याय का निबंध ह्यअजंताह्ण और वीररस की प्रसिद्ध कवियित्री सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता झांसी की रानी पढ़ाई जा रही है।

पं. जवाहर लाल नेहरू और डॉ. संपूर्णानंद को भी पढ़ा रहे
राजनीति में योगदान देने वाले प्रथम पीएम पंडित जवाहर लाल नेहरू की भारतमाता और पूर्व सीएम डॉ. संपूर्णानंद का निबन्ध शिक्षा का उद्देश्य कोर्स का हिस्सा है। केदार नाथ अग्रवाल, डॉ. राम कुमार वर्मा, रामवृक्ष बेनीपुरी, भगवती चरण वर्मा, अमरकांत, लक्ष्मीकांत मिश्र, जगदीश चंद्र माथुर, शमशेर बहादुर सिंह, अज्ञेय, कमलेश्वर, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, मंगलेश डबराल, वीरेन डंगवाल, गणेश शंकर विद्यार्थी, रजिया सज्जाद जहीर, नरेंद्र शर्मा, ममता कालिया की रचनाएं पढ़ा रहे हैं।

डॉ. चंद्रमौलि त्रिपाठी (प्रवक्ता केन्द्रीय विद्यालय ओल्ड कैंट ) ने कहा, साहित्य सृजन की चर्चा हो और प्रयागराज का नाम न आए, ऐसा हो नहीं सकता। हिन्दी साहित्य में प्रयागराज के रचनाकारों का विशिष्ट स्थान है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी की संगमनगरी के साहित्यकारों को पढ़े बगैर हिन्दी का अध्ययन ही पूरा नहीं हो सकता। मैं सौभाग्यशाली हूं जो यहां रहने व पढ़ने-पढ़ाने का अवसर मिला।
 

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