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CBSE : छात्रों के थ्योरी और प्रैक्टिकल मार्क्स में मिला बड़ा अंतर, सीबीएसई ने स्कूलों को दिया यह आदेश

सीबीएसई ने 500 विद्यालयों के विद्यार्थियों के कुछ विषयों में थ्योरी और प्रैक्टिकल परीक्षा के अंकों में काफी बड़ा अंतर पाया है। बोर्ड ने स्कूलों को इंटरनल असेसमेंट प्रक्रिया चेक करने के लिए कहा है।

CBSE : छात्रों के थ्योरी और प्रैक्टिकल मार्क्स में मिला बड़ा अंतर, सीबीएसई ने स्कूलों को दिया यह आदेश
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Pankaj Vijayएजेंसी,नई दिल्लीThu, 06 Jun 2024 08:14 AM
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 500 विद्यालयों के करीब 50 प्रतिशत विद्यार्थियों के कुछ विषयों में थ्योरी और प्रैक्टिकल परीक्षा के अंकों में काफी बड़ा अंतर पाया है। बोर्ड अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बोर्ड ने विद्यालयों को उनकी आंतरिक मूल्यांकन प्रक्रिया ( इंटरनल असेसमेंट का तरीका) की समीक्षा करने का परामर्श दिया है। अधिकारियों ने बताया कि विद्यालयों को सलाह दी गई है कि वे प्रैक्टिकल परीक्षा का मूल्यांकन करते समय निष्पक्षता और सटीकता को प्राथमिकता दें और सुनिश्चित करें कि प्रक्रिया उचित और विद्यार्थियों की शैक्षणिक यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान करने वाली हो। 

सीबीएसई के सचिव हिमांशु गुप्ता ने कहा, ''केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को एडवांस्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से सीबीएसई से संबद्ध 500 विद्यालयों में कुछ विषयों के 50 प्रतिशत या इससे अधिक विद्यार्थियों को थ्योरी और प्रैक्टिकल परीक्षा में मिले अंकों में बड़ी विसंगित मिली है। प्रैक्टिकल व थ्योरी मार्क्स में बड़ा अंतर पाया गया।''  
     
उन्होंने कहा, ''यह विसंगति विद्यालयों में प्रायोगिक परीक्षाओं के दौरान सावधानीपूर्वक मूल्यांकन की आवश्यकता को उजागर करती है। परिणामस्वरूप, बोर्ड ने ऐसे विद्यालयों को अपनी आंतरिक मूल्यांकन प्रक्रियाओं की समीक्षा करने के लिए एक परामर्श जारी किया है।''

सीबीएसई ने कहा कि इसका उद्देश्य अधिक मजबूत, पारदर्शी और विश्वसनीय तंत्र पर अमल करना है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मूल्यांकन प्रक्रिया यथार्थवादी हो और छात्रों की शैक्षणिक यात्रा में पर्याप्त योगदान जोड़े।

गुप्ता ने कहा, ''यह परामर्श प्रायोगिक परीक्षाओं के मूल्यांकन में निष्पक्षता और सटीकता को प्राथमिकता देने के लिए एक स्मरण-पत्र के रूप में कार्य करता है, जिससे सीबीएसई से संबद्ध संस्थानों में प्रदान की जाने वाली शिक्षा की गुणवत्ता में वृद्धि होगी।''

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