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पब्लिक पॉलिसी में करियर: नई सोच वाले युवाओं की है मांग

आज सामाजिक विकास की नीतियों को तय करने में पब्लिक पॉलिसी में विशेषज्ञता रखने वाले युवाओं की सेवाएं सरकार भी ले रही है। इस क्षेत्रके युवाओं के लिएकई अन्य विकल्प भी हैं।पब्लिक पॉलिसी के क्षेत्र में युवाओं के लिएकरियर की संभावनाओं से परिचय करा रहे हैं करियर कंसल्टेंट अशोक सिंह.

सरकार की हाल-फिलहाल में डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया जैसी सार्वजनिक नीतियां लोगों के बीच काफी चर्चित रही हैं। छात्र इनमें रुचि दिखा रहे हैं और देश में बेहतर बदलाव लाने की चाह से इसमें करियर की संभावनाएं देख रहे हैं। आज बढ़ती गरीबी, हिंसा, स्वास्थ्य की खराब स्थितियों जैसी जटिल समस्याओं का समाधान निकालना राजनेताओं, अर्थशा्त्रिरयों और ब्यूरोक्रेट्स तक ही सीमित नहीं रहा है। .

आज सार्वजनिक नीतियों यानी पब्लिक पॉलिसी विशेषज्ञ निजी, सरकारी, अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ मिल कर कई तरह से नीति-निर्माण में अपना योगदान दे रहे हैं। भारत सरकार सिविल सेवा से इतर भी युवाओं का चयन कर रही है, ताकि वे आज की चुनौतियों से लड़ने में मदद कर सकें। पब्लिक पॉलिसी में शामिल संस्थानों की मदद सरकारी स्तर पर भी ली जा रही है। आज नई सोच और प्रतिभाशाली युवाओं की जरूरत है। एक अनुमान है कि आगे आने वाले समय में शहरी और ग्रामीण योजनाओं में केन्द्र और राज्य सरकारों को ज्यादा से ज्यादा पब्लिक पॉलिसी वैज्ञानिकों की जरूरत पड़ेगी। आज कॉरपोरेट समूहों से लेकर स्टार्टअप्स तक में पब्लिक पॉलिसी विशेषज्ञों को मौके मिल रहे हैं। ये विशेषज्ञ राजनीति, प्रबंधन, कानून के अलावा विज्ञान के क्षेत्रों में किसी न किसी रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।.

कैसे रख सकते हैं कदम
पब्लिक पॉलिसी में विशेषज्ञ बनने के लिए कानून, सामाजिक विज्ञान, राजनैतिक विज्ञान, मनोविज्ञान, इतिहास सहित और भी कई विषयों के अध्ययन की जरूरत पड़ती है। विषय की जटिलता को समझते हुए पब्लिक पॉलिसी पर कई तरह के कोर्स देश के कई संस्थानों में चल रहे हैं। इसमें अध्ययन करने वाले युवा देश में मौजूद चुनौतियों से परिचित होते हैं। इससे युवा पुरानी आर्थिक नीतियों, पर्यावरण, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मामलों को समझते हुए नई योजनाओं के निर्माण में कुशल बनता जाता है।.

कोर्स का उठाएं लाभ 
हमारी शिक्षा व्यवस्था का पब्लिक पॉलिसी की पढ़ाई पर बहुत देर बाद ध्यान गया है। हालांकि आज पब्लिक पॉलिसी पर सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और डिग्री स्तर के कोर्स कई संस्थानों में कराए जा रहे हैं। अधिकतर संस्थान इसमें दो वर्षीय मास्टर्स इन पब्लिक पॉलिसी कोर्स कराते हैं। मास्टर इन पब्लिक पॉलिसी एंड पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन भी एक कोर्स है। किसी भी विषय से ग्रेजुएट छात्र इन कोर्स में प्रवेश ले सकते हैं। .

कुछ संस्थानों में मेरिट तो कुछ में प्रवेश परीक्षा के आधार पर दाखिला दिया जाता है। इसमें पीएचडी करने की सुविधा भी संस्थानों में मौजूद है। आज इसमें डिग्री व डिप्लोमा कोर्स करने के बाद छात्र कई सरकारी व निजी संस्थानों को अपनी सेवाएं देने के योग्य हो जाता है। इसमें कुछ संस्थान छात्र को कॉलेज से ही प्लेसमेंट की सुविधाएं दे रहे हैं। .

जहां तक सिलेबस की बात है तो कोर्स के दौरान लॉ, गवर्नेंस, पब्लिक पॉलिसी मेकिंग, स्टैटिस्टिकल डेटा एनालिसिस, इकोनॉमिक्स ऑफ पब्लिक पॉलिसी, एकेडेमिक राइटिंग, क्वालिटेटिव रिसर्च आदि का अध्ययन दूसरे विषयों के साथ कराया जाता है। इनके अलावा कोर्स के दौरान मैनेजमेंट स्किल्स, डेमोक्रेटिक वैल्यूज के महत्व आदि पर भी पर्याप्त ध्यान दिया जाता है। इसमें मेधावी युवाओं को फेलोशिप भी दी जाती है। .

क्या हो क्षमताएं.
- कई विषयों की उपयोगिता होने के कारण हर संबंधित विषय पर मजबूत पकड़ होनी चाहिए। समस्याओं और चुनौतियों को समझने व उनके समाधान को तलाश करने का धैर्य होना चाहिए।.

-  देश में व्याप्त सामाजिक और आर्थिक विषमताओं पर पैनी नजर और उनके कारणों तक पहुंचने का जज्बा होना चाहिए। विश्लेषणात्मक (एनालिटिकल) सोच होनी चाहिए। लीक से हटकर कुछ नया कर गुजरने का साहस चाहिए। इसमें अकादमिक रुझान आगे बढ़ने में सहायक होगा।.

नौकरी के मौके
इस विषय में प्रशिक्षण के बाद मुख्य रूप से केंद्र और राज्य सरकारों की नीति निर्माण से जुड़ी संस्थाओं, स्थानीय निकायों, बड़े उद्योगों, बैंकिंग सेक्टर, रेलवे, डिफेन्स व निजी क्षेत्र से संबंधित संगठनों आदि में नौकरी के अवसर मिल सकते हैं। इनके दायित्व के अनुरूप नौकरी का दायरा होता है। इसलिए कार्यानुभव के साथ इनकी सैलरी और भत्ते भी काफी आकर्षक होते हैं। इसमें विशेषज्ञ युवाओं को मौके पॉलिसी एनालिस्ट, पब्लिक अफेयर्स मैनेजर, रिसर्च एसोसिएट, स्टैटिस्टिशियन आदि रूपों में मिलते हैं। सरकारी संस्थान समय-समय पर इसमें विशेषज्ञों के लिए रिक्तियां निकालते हैं।.

- इसमें शिक्षा के बाद युवाओं के लिए कई विकल्प खुलते हैं, जैसे वह शोध व विकास कार्य या अध्यापन से जुड़ सकता है, स्वतंत्र शोध संस्थानों व नीतिकारों के पैनल का हिस्सा बन सकता है। .

-  आज कई देश-विदेश के संस्थान शोध व विकास गतिविधियों से जुडे़ हैं, इसलिए पब्लिक पॉलिसी में शोध की ओर बढ़ना करियर के कई बडे़ मौके लेकर आता है। कई स्वतंत्र शोध संस्थान शोध-कार्य में कुशल युवाओं को मौका दे रहे हैं।.

- आज कई सरकारी व गैर-सरकारी संस्थान पब्लिक पॉलिसी में कोर्स करा रहे हैं। इन्हें पढ़ाने के लिए कुशल शिक्षकों की जरूरत होती है। इसमें पीएचडी के बाद अध्यापन कार्य की ओर आसानी से बढ़ सकते हैं। .

-  पब्लिक पॉलिसी में कुशल युवाओं के लिए प्रबंधन में सफल होने की अच्छी संभावनाएं हैं। ये मैनेजर पॉलिसी बनाने में मदद करने के साथ संस्थान के कई पक्षों पर नीतियां बनाने में भी मदद करते हैं।.

इस क्षेत्र की चुनौतियां .
- इससे जुडे़ पेशेवरों का दायित्व सरकार और प्रशासन की दशा और दिशा का निर्धारण करने से जुड़ा है, इसलिए इन्हें हमेशा परिस्थितियों, आर्थिक सूचकों व अन्य परिवर्तनों पर पैनी नजर रखनी पड़ती है।.

- राजनेताओं, उच्च प्रशासनिक अधिकारियों व अनुभवी नीति निर्माताओं के साथ मिलकर काम करने के लिए धैर्य, प्रभावी संवाद, तर्कसंगत तरीके से अपने विचार प्रस्तुत करने की योग्यता की मांग होती है। पेशेवरों को रिपोर्ट तैयार करते समय उसके एक-एक शब्द के प्रभाव के बारे में परिचित होना पड़ता है। 

संस्थान     
- मुंबई विश्वविद्यालय.
-  इग्नू, दिल्ली .
- महात्मा ज्योति राव फुले यूनिवर्सिटी,जयपुर .
- नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु .
-  सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ जम्मू.
- जामिया मिल्लिया इस्लामिया, दिल्ली

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  • Web Title:career in public policy