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Career In Economics: अर्थशास्त्र में उच्च शिक्षा से खुलेंगी बेहतर अवसरों की राहें

अर्थशास्त्र विषय किसी भी मामले में विज्ञान के विषयों से कमतर नहीं है। इस विषय की अहमियत इसी बात से समझी जा सकती है कि इसमें अलग से ‘नोबेल पुरस्कार' दिया जाता है। इसके छात्रों को ग्रेजुएशन के बाद ही नौकरी के मौके मिलने लगते हैं। छात्र की योग्यता में जैसे-जैसे इजाफा होता है, वैसे-वैसे बेहतर अवसर मिलते जाते हैं। अर्थशास्त्र के जानकारों की मांग पहले के मुकाबले काफी बढ़ गयी है। आज डिजिटल होती दुनिया में अर्थशास्त्रके जानकारों को अच्छे ओहदे और पैकेज मिल रहे हैं। ऑनलाइन खरीदारी या काम की जरूरत से लेकर ऑनलाइन डाटा इंटरप्रिटेशन में इस विषय के छात्रों की मांग बढ़ी है। 

अर्थशास्त्र के अंतर्गत वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन, वितरण, विनिमय और उपभोग का अध्ययन किया जाता है। इसके अध्ययन में पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था कैसे चलती है, लोगों की खर्च क्षमता और बाजार का क्या संबंध है और जीडीपी, मुद्रास्फीति और बेरोजगारी जैसे मामलों में अर्थशा्त्रिरयों की क्या भूमिका होती है, जैसे विषयों के बारे में विस्तार से बताया *जाता है।.

जरूरी योग्यता
देश के अधिकतर विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अर्थशास्त्र से संबंधित ग्रेजुएशन व पोस्ट ग्रेजुएशन स्तर के कोर्स उपलब्ध हैं। ग्रेजुएशन स्तर पर बीए या बीए (ऑनर्स)इकोनॉमिक्स, बीएससी इकोनॉमिक्स, बीए इन बिजनेस इकोनॉमिक्स और बीए इन एप्लाइड इकोनॉमिक्स कुछ प्रचलित कोर्स हैं। .

इस विषय में पोस्ट ग्रेजुएशन करने के लिए किसी भी स्ट्रीम से ग्रेजुएट होना जरूरी है। छात्र पीजी स्तर पर फाइनेंशियल इकोनॉमिक्स में एमए, इकोनॉमिक्स में एमए, इकनोमेट्रिक्स में एमए, बिजनेस इकोनॉमिक्स में एमए, एप्लाइड इकोनॉमिक्स में एमए, इकोनॉमिक्स में एमएससी, एमबीए (बिजनेस इकोनॉमिक्स ) जैसे कोर्स में प्रवेश ले सकते हैं। इसके बाद इकोनॉमिक्स में एम.फिल व पीएचडी की राह पकड़ सकते हैं। छात्र आगे अपनी रुचि को समझते हुए माइक्रो इकोनॉमिक्स, मैक्रो इकोनॉमिक्स, फाइनेंशियल इकोनॉमिक्स जैसी इसकी किसी उपशाखा में विशेषज्ञता अर्जित कर सकते हैं।

क्या हो विशेषताएं: अर्थशास्त्र के छात्रों में मौजूद डाटा का विश्लेषण कर पाने की क्षमता का बेहतर होना जरूरी है। उनमें मैथ्स और स्टैटिस्टिक्स की बुनियादी समझ होनी चाहिए। छात्र को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के आर्थिक मुद्दों में दिलचस्पी हो। उसकी सोच और उसका व्यवहार समस्याओं के निदान यानी प्रॉब्लम-सॉल्विंग पर ज्यादा होना चाहिए, क्योंकि नौकरी के दौरान उसे नई-नई समस्याओं से दो-चार होना पड़ेगा। छात्र को आंकड़ों को जानने-समझने में रुचि हो। .

रोजगार के अवसर
निजी क्षेत्र की तमाम औद्योगिक इकाइयों, कॉमर्स, एक्चूरियल साइंस आदि में इस क्षेत्र के पेशेवरों की मांग बनी रहती है। हर साल सरकारी क्षेत्र में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, नीति आयोग, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी, नेशनल सैम्पल सर्वे तथा विभिन्न राज्य सरकारों के संबंधित विभागों में बड़ी संख्या में अर्थशा्त्रिरयों की नियुक्तियां की जाती हैं। फिक्की, एसोचैम जैसे व्यापारिक संगठन आर्थिक विश्लेषक के रूप में पेशेवरों को नौकरी देने के लिए तैयार रहते हैं।.

'अर्थशास्त्र में ग्रेजुएट युवाओं को बैंकों और वित्तीय संस्थानों में पॉलिसी मेकर की भूमिका में मौके मिलते हैं।.

'इंडियन इकोनॉमिक सर्विस के माध्यम से विभिन्न मंत्रालयों में इकोनॉमिक एडवाइजर के तौर पर मौके मिलते हैं। इसमें उपयुक्त प्रत्याशियों के चयन के लिए यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (यूपीएससी) प्रतियोगी परीक्षा आयोजित करती है। इस परीक्षा में अर्थशास्त्र/स्टैटिस्टिक्स विषय में कम से कम मास्टर्स डिग्रीधारक युवा ही शामिल हो सकते हैं। .

'अर्थशास्त्र के विशेषज्ञों को विदेशी संस्थानों जैसे इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड, वर्ल्ड बैंक, एशियन डेवलपमेंट बैंक के अलावा बहुराष्ट्रीय कंपनियों में शानदार मौके मिलते हैं। इनकी नियुक्तियां अर्थशास्त्री, एनालिस्ट, कंसल्टेंट आदि रूपों में होती हैं।.

'आरबीआई के विभिन्न पदों पर 21-28 आयु वर्ग के अर्थशा्त्रिरयों के लिए समय-समय पर भर्तियां निकलती रहती हैं। नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक्स रिसर्च, नई दिल्ली, इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च में भी उज्ज्वल भविष्य है।.

'अर्थशास्त्र में एमए करने के बाद पीएचडी की डिग्री लेकर किसी भी कॉलेज और विश्वविद्यालय में लेक्चरर बना जा सकता है या विश्वविद्यालय स्तर की नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा टेस्ट के बाद असिस्टेंट प्रोफेसर बना जा सकता है। अर्थशास्त्र में बीएड करने के बाद सरकारी या निजी स्कूल में टीचर के तौर पर भी अवसर मिलेंगे।.

'अगर छात्र ने अर्थशास्त्र की पढ़ाई की है और उसने लॉ भी कर रखा है, तो वह लॉ फर्म में भी नौकरी पा सकता है। इसके अलावा इन दिनों बिजनेस पत्रकारिता का भी काफी महत्व है। .

सैलरी है आकर्षक : आमतौर पर सरकारी सेवा में कार्यरत अर्थशास्त्री को प्रतिमाह 20-25 हजार रुपए मिलते हैं। एक-दो साल के अनुभव के बाद यह वेतन 30-35 हजार रुपए प्रतिमाह तक पहुंच जाती है, जबकि निजी क्षेत्र में यह कंपनी पर निर्भर करता है। यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के शिक्षक को 40-45 हजार रुपए प्रतिमाह मिलते हंै। अनुभव के बाद सालाना वेतन लाखों रुपयों में हो सकता है। (विशेषज्ञ: प्रोफेसर रेनू त्यागी, श्याम लाल कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय).

किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को मंदी से उबारने में अर्थशा्त्रिरयों का अहम योगदान होता है। उनकी बनाई नीतियों पर देश का विकास निर्भर करता है। यही कारणहै कि अर्थशास्त्र रोजगार की नजर से एक बेहद लोकप्रिय क्षेत्र है। इसमें कुशल युवाओं की मांग सरकारी और निजी कंपनियों में बढ़ी है। बता रही हैं दीपिका शर्मा.

 
1. प्रमुख संस्थान 'दिल्ली विश्वविद्यालय, साउथ कैंपस 'दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स 'जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली 'बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय 'मेरठ विश्वविद्यालय 'कुमाऊं विश्वविद्यालय (उत्तराखंड) 'बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (लखनऊ) 'विनोबा भावे विश्वविद्यालय (झारखंड)
 
2. इस क्षेत्र की चुनौतियां ग्रेजुएशन के बाद ही इस क्षेत्र में रोजगार के विकल्प बनते हैं। लेकिन ज्यादा तरक्की के लिए उच्च अध्ययन की जरूरत होती है। मैथ्स और स्टैटिस्टिक्स की बुनियादी समझ बेहद जरूरी है। अर्थशास्त्र की पढ़ाई को गंभीरता से लें। अर्थशास्त्र के बीए (ऑनर्स) सिलेबस को काफी कठिन माना जाता है।
 
3. इस क्षेत्र की चुनौतियां ग्रेजुएशन के बाद ही इस क्षेत्र में रोजगार के विकल्प बनते हैं। लेकिन ज्यादा तरक्की के लिए उच्च अध्ययन की जरूरत होती है। मैथ्स और स्टैटिस्टिक्स की बुनियादी समझ बेहद जरूरी है। अर्थशास्त्र की पढ़ाई को गंभीरता से लें। अर्थशास्त्र के बीए (ऑनर्स) सिलेबस को काफी कठिन माना जाता है।
 
प्रमुख संस्थान
'दिल्ली विश्वविद्यालय, साउथ कैंपस 
'दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स 
'जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली 
'बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय 
'मेरठ विश्वविद्यालय 
'कुमाऊं विश्वविद्यालय (उत्तराखंड) 
'बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (लखनऊ) 
'विनोबा भावे विश्वविद्यालय (झारखंड)

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