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पिता नेत्रहीन और लकवाग्रस्त, बेटे ने किया BTech टॉप, मिला 42 लाख का सैलरी पैकेज

MMMUT में बीटेक आईटी के टॉपर एकांश सक्सेना के संघर्षों की कहानी रुला देने वाली है। पिता देख नहीं सकते, लकवाग्रस्त हैं। मां प्राइवेट स्कूल में टीचर हैं। उन्हें प्लेसमेंट में 42 लाख का पैकेज मिला है।

पिता नेत्रहीन और लकवाग्रस्त, बेटे ने किया BTech टॉप, मिला 42 लाख का सैलरी पैकेज
Pankaj Vijayहिन्दुस्तान टीम,गोरखपुरWed, 20 Sep 2023 08:21 PM
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एमएमएमयूटी में बीटेक आईटी के टॉपर एकांश सक्सेना के संघर्षों की कहानी रुला देने वाली है। सत्र 2022-23 के प्लेसमेंट में दूसरा सबसे अधिक पैकेज (42 लाख रुपये) पाने वाले एकांश के लिए यह सब इतना आसान नहीं था। अपनी सबसे कमजोर नब्ज (पिता की अंधता) को मिटाने के संकल्प के साथ उन्होंने खुद को झोंक दिया और नतीजा सामने है। पीलीभीत जिले के पूरनपुर निवासी एकांश सक्सेना वर्ष 2016-17 में हाईस्कूल में थे तभी उनके पिता को ग्लूकोमा हो गया। इससे उनकी आंखों की रोशनी चली गई। प्रतिकूल परिस्थितियों में भी एकांश ने हाईस्कूल में 10 सीजीपीए प्राप्त किया था। उनकी मां निजी स्कूल में शिक्षिका थीं। वर्ष 2019 में एमएमएमयूटी में दाखिला मिला तब पास में फीस जमा करने तक के पैसे नहीं थे। उनके मामा ने फीस जमा की। 

स्कॉलरशिप मिलने से थोड़ी राहत मिली। बीटेक द्वितीय वर्ष में ही वे पढ़ाई के साथ ‘कोडिंग निंजाज’ में 20 हजार रुपये महीने की ऑनलाइन नौकरी करने लगे। जिंदगी पटरी पर आ ही रही थी कि पिछले साल उनके पिता को दाहिने ओर पैरालिसिस अटैक आ गया। बेटे के भविष्य व पति की देखभाल के लिए मां ने नौकरी छोड़ दी। इस दौरान एकांश को एक्सपीडिया में 60 हजार रुपये महीने पर इंटर्नशिप मिल गई थी। एक्सपीडिया ने ही उनकी दक्षता व कार्य के प्रति समर्पण को देखते हुए 42 लाख रुपये का पैकेज ऑफर किया।

एमटेक टॉपर प्रिया कर रहीं आईईएस की तैयारी
एमटेक की ओवरऑल टॉपर सिविल इंजीनियरिंग की छात्रा प्रिया वर्मा को विभाग टॉपर, एमटेक टॉपर समेत कुल तीन पदक मिले हैं। प्रिया भारतीय अभियंत्रण सेवा में जाना चाहती हैं। इसके लिए वे लखनऊ स्थित अपने घर पर तैयारी कर रही हैं। उनके पिता राजकिशोर वर्मा नगर निगम झांसी में अकाउंटेंट हैं, जबकि माता किरनलता वर्मा गृहणी हैं। प्रिया ने बताया कि मम्मी-पापा के सपोर्ट के कारण ही यह सब संभव हुआ है। वे हमेशा प्रेरित करते हैं।

आईईएस बनना चाहते हैं बीटेक टॉपर संदीप
बीटेक ओवरऑल टॉपर के रूप में कुलाधिपति व कुलपति पदक समेत छह स्वर्ण पदक पाने वाले सिविल इंजीनियरिंग के छात्र संदीप आईईएस अधिकारी बनना चाहते हैं। इसके लिए वे दिल्ली में तैयारी कर रहे हैं। देवरिया संदीप महज छह वर्ष के थे तभी वर्ष 2007 में उनके सिर से पिता का साया उठ गया। उसके बाद मां ही सहारा बनीं। आर्मी पब्लिक स्कूल में शिक्षिका बनीं। घर से लेकर बाहर तक की जिम्मेदारियां संभालते हुए भी उन्होंने संदीप को हमेशा प्रेरित किया।

वैष्णवी सिंह ने इसलिए चुनी सिविल इंजीनियरिंग
बीटेक छात्राओं में ओवरऑल टॉपर वैष्णवी सिंह ने दुनिया के सात अजूबों से प्रेरित हो सिविल इंजीनियरिंग ब्रांच का चयन किया। एलएंडटी, नोएडा में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के रूप में कार्य कर रहीं वैष्णवी ने बताया कि दुनिया के सभी 7 अजूबे सिविल इंजीनियर्स ने ही बनाए हैं। इसी तथ्य ने प्रेरणा दी। शहर के दिव्यनगर निवासी वैष्णवी के पिता राजेश सिंह और माता गीता सिंह शहर में ही रहते हैं। भाई चन्दन खाद्य एवं आपूर्ति विभाग में हैं।

जो भी हूं मां की बदौलत
मां के साथ दीक्षांत में आए एकांश ने बताया कि आज जो भी हूं, मां की बदौलत हूं। मां ने हमेशा प्रेरित ही नहीं किया बल्कि घर की सभी जिम्मेदारियां भी संभालती रहीं।
 

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