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9 अप्रैल, 2020|3:53|IST

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Bihar Board 10th Result 2019 : मैट्रिक का रिजल्ट पहली बार 80 फीसदी के पार

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मैट्रिक रिजल्ट की घोषणा होते ही छात्रों और अभिभावकों के चेहरे खिल गए हैं। बंपर रिजल्ट ने अब तक के सभी रिकार्ड ध्वस्त कर दिये हैं। इससे पहले कभी इतने ज्यादा बच्चे पास नहीं हुए। जहां बच्चे और अभिभावक खुश हैं वहीं इस बार स्कूल-प्रशासन में भी खुशी की लहर है। 

पास प्रतिशत बढ़ने से सभी स्कूलों का रिजल्ट काफी अच्छा हुआ है। मैट्रिक 2019 के रिजल्ट ने एक नया रिकार्ड बनाया है। बोर्ड के रिकार्ड की मानें तो अभी तक 80 फीसदी रिजल्ट किसी भी साल नहीं गया है। 2000 से 2018 तक की बात करें तो मैट्रिक में 75 फीसदी तक उत्तीर्णता का प्रतिशत रहा है। बोर्ड की मानें तो 2000 से 2012 तक रिजल्ट 67 से 70 फीसदी तक ही रिजल्ट रहा। वर्ष 2014 और 2015 की बात करें तो रिजल्ट 75 फीसदी तक गया था। 2014 में जहां 75.05 फीसदी तो वहीं 2015 में 75.17 फीसदी छात्र पास हुए। 

2009 से 2018 तक गिरता और बढ़ता रहा रिजल्ट : वर्ष 2009 से 2018 की बात करें तो रिजल्ट मे कई बार गिरावट आयी तो वहीं कई बार रिजल्ट बढ़ा भी।  2018 की तुलना में 2019 में 11.89 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।  2015 से 2016 में मैट्रिक रिजल्ट में गिरावट आयी।  2014 में जहां 75.17 फीसदी छात्र सफल हुए वहीं 2016 में 47.15 फीसदी ही छात्र उत्तीर्ण हो पाए थे। इसके बाद 2017 के रिजल्ट में 2.97 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। तब रिजल्ट 50.12 फीसदी रहा था। इसके बाद वर्ष 2018 में 68.89 फीसदी रिजल्ट रहा था। 

36 दिन बाद जारी हुआ रिजल्ट 
मैट्रिक परीक्षा 18 फरवरी को समाप्त हुई थी। वहीं आठ मार्च से मैट्रिक मूल्यांकन शुरू हुआ। परीक्षा समाप्त होने के 36 दिन बाद और मूल्यांकन शुरू होने के मात्र 29 दिनों के बाद रिजल्ट जारी किया गया। 2018 में 27 जून, 2017 में एक जून, 2016 में 7 जून को मैट्रिक का रिजल्ट जारी किया गया था। वहीं जिले के नामी स्कूलों का प्रदर्शन इस बार भी फीका रहा। छोटे स्कूलों के विद्यार्थियों ने ही जिले की मेरिट में स्थान बनाया। पटना के विद्यार्थी इस बार स्टेट मेरिट में स्थान नहीं बना पाए। पिछले साल जिले के दो होनहारों ने स्टेट मेरिट में जगह बनाई थी। 

प्रमाणपत्रों में डाले गए हैं क्यूआर कोड
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से उत्तीर्ण विद्यार्थियों के अंक पत्र व प्रमाणपत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा फीचर की व्यवस्था की गई है। समिति द्वारा मैट्रिक के पत्र व प्रमाण पत्र में कई प्रकार के सिक्युरिटी फीचर्स डाले गए हैं। इसमें क्यूआर कोड डाले गए हैं। इससे इन प्रमाण पत्रों का अब दुनिया के किसी कोने से ऑनलाइन वेरिफिकेशन भी हो सकेगा। इस बार छात्रों की परीक्षा कक्ष में प्रवेश के समय दो स्तरों पर जांच हुई। प्रति 25 विद्यार्थी पर एक वीक्षक प्रतिनियुक्ति की गई थी साथ ही उन्हें घोषणा करनी थी कि उनके द्वारा 25 विद्यार्थियों की जांच कर ली गई है।

98 हजार कम थे इस बार परीक्षार्थी 
मैट्रिक 2018 की तुलना में 2019 में 98 हजार 188 परीक्षार्थी कम शामिल हुए। 2018 में जहां 17 लाख 58 हजार 797 परीक्षार्थी शामिल हुए थे, वहीं 2019 में 16 लाख 60 हजार 609 परीक्षार्थी शामिल हुए थे।  

ऐसा रहा दस साल का रिजल्ट 
साल       -          प्रतिशत
2009      -           68.3 फीसदी 
2010     -           70.9 फीसदी 
2011     -            72.32 फीसदी 
2012     -            72.56 फीसदी
2013     -            73.48 फीसदी 
2014     -            76.05 फीसदी 
2015     -            75.17 फीसदी 
2016     -            47.15 फीसदी 
2017     -            50.12 फीसदी 
2018    -             68.89 फीसदी 
2019    -             80.73 फीसदी 

बिहार बोर्ड के जितने भी वर्षों का रिकार्ड देखा गया है उनमें सबसे ज्यादा छात्र इसी वर्ष उत्तीर्ण हुए है। 1995 से लेकर अभी तक 75 फीसदी तक ही छात्र उत्तीर्ण हुए हैं। इस बार का रिजल्ट सबसे बेहतर है। प्रथम श्रेणी में पास होने वाले विद्यार्थियों की संख्या भी बढ़ी है। 
- आनंद किशोर, अध्यक्ष, बिहार बोर्ड 

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