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B.Sc और BS में क्या है फर्क, दोनों हैं बैचलर ऑफ साइंस डिग्री तो कौन सी है फायदेमंद

BSc vs BS : बीएस और बीएससी दोनों ही कोर्स बैचलर ऑफ साइंस हैं। तो फिर इन दोनों के बीच आखिर फर्क क्या है। स्टूडेंट्स इन कोर्स के अंतर को लेकर कंफ्यूज रहते हैं। यहां जानें दोनों के बीच का अंतर।

B.Sc और BS में क्या है फर्क, दोनों हैं बैचलर ऑफ साइंस डिग्री तो कौन सी है फायदेमंद
Pankaj Vijayलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीThu, 17 Nov 2022 05:06 AM

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BSc vs BS : साइंस स्ट्रीम से 12वीं पास करने के बाद छात्रों के पास कई विकल्प होते हैं। कोर साइंस में दिलचस्पी रखने वालों के लिए सबसे लोकप्रिय ऑप्शन बीएससी और बीएस डिग्री कोर्स हैं। लेकिन स्टूडेंट्स इन कोर्स के अंतर को लेकर कंफ्यूज रहते हैं। बीएस और बीएससी दोनों ही कोर्स बैचलर ऑफ साइंस हैं। तो फिर इन दोनों के बीच आखिर फर्क क्या है? असल में इन दोनों के बीच सबसे बड़ा अंतर इनकी अवधि का है। आमतौर पर जहां बीएससी डिग्री कोर्स जहां तीन साल का है वहीं बीएस डिग्री कोर्स चार साल का होता है। हालांकि नई शिक्षा नीति के अमल में आने के बाद रिसर्च के साथ बीए, बीएससी, बीकाम का चार वर्ष का कोर्स करने वाले विद्यार्थी भी बिना मास्टर डिग्री लिए सीधे पीएचडी कर सकेंगे। एक अंतर यह है कि बीएस में रिसर्च पर अधिक ध्यान दिया जाता है। आमतौर पर बीएस को बीएस-एमएस के ड्यूल डिग्री कोर्स के तौर पर संस्थानों में ऑफर किया जाता है। बीएससी में थ्योरी बेस्ड स्टडी ज्यादा रहती है।

बीएस बैचलर ऑफ साइस में एक स्पेशलाइज्ड डिग्री होती है। ग्रेजुएशन के बाद बहुत सी जगहों पर बीएस डिग्रीधारकों को बीटेक वालों के बराबर मान लिया जाता है। बीएस के बाद एक वर्षीय एमएस या दो वर्षीय एमएस या फिर पीएचडी भी कर सकते हैं। जबकि बीएससी करने के बाद एमएससी और एमटेक करने का ऑप्शन रहता है।  कुछ करियर एक्सपर्ट्स का मानना है कि बीएससी के बाद एमटेक करना मुश्किल होता है।

- बीएस करने के बाद बहुत से विश्वविद्यालयों में पीएचडी के लिए आवेदन कर सकते हैं। बीएस के बाद गेट एग्जाम के जरिए एमएस में दाखिला ले सकते हैं।

- 4 वर्षीय बीएस करने के बाद हायर एजुकेशन के लिए विदेशी यूनिवर्सिटी में आसानी से एडमिशन मिलेगा। वहां बीएससी के मुकाबले चार वर्षीय स्पेशलाइज्ड प्रोग्राम इन साइंस (बीएस रिसर्च)  की ज्यादा स्वीकार्यता है। एमएससी और बीएस को कई बार एक जैसी वरीयता दे दी जाती है।

BTech और BE में क्या है फर्क, जानें इंजीनियरिंग के लिए कौन सी डिग्री है ज्यादा फायदेमंद

- बीएससी में कोई रिसर्च वर्क करने की जरूरत नहीं होती है। जबकि चार वर्षीय बीएस में एक वर्ष का रिसर्च वर्क करना अनिवार्य है।

- बीएस में शुरुआती सालों में फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायो, मैथ्स, ह्यूमेनिटीज, बेसिक इंजीनियरिंग, मैटिरियल साइंस समेत साइंस के सभी विषय सीखेंगे। इसके बाद आपको तय करना होगा कि किसमें आप रिसर्च व स्पेशलाइजेशन  करेंगे। जबकि बीएससी में आपको एडमिशन के दौरान ही तय करना होता है कि बीएससी किसमें करना है। 12वीं में जो विषय आप पढ़कर गए हैं उनमें से ही किसी में आपको बीएससी करना होगा। बीएस में ऐसा नहीं होता।

बीएससी कोर्स जहां आपको देश की ज्यादातर यूनिवर्सिटीज में मिल जाएगा जबकि बीएस आपको हर जगह नहीं मिलेगा। आईआईटी खड़पुर में बीएस इन एप्लाइड जियोलॉजी, केमिस्ट्री, इकोनॉमिक्स, एक्सप्लोरेशन जियोफिजिक्स, मैथ्स एंड कंप्यूटिंग एंड फिजिक्स उपलब्ध है। आईआईटी मद्रास में चार वर्षीय बीएस डिग्री इन प्रोग्रामिंग एंड डेटा साइंस कराया जाता है।

आईआईटी जोधपुर में चार वर्षीय बीएस प्रोग्राम इन केमिस्ट्री व फिजिक्स है जो कि टेक्नोलॉजी पर केंद्रित है। इस कोर्स का करिकुलम इंजीनियरिंग के काफी करीब है।

आईआईएसईआर भोपाल (BS- MS - IISER Bhopal ) में बीएस एमएस का ड्यूल डिग्री कोर्स है। आईआईएससी बेंगलुरु में भी बीएस रिसर्च कोर्स ऑफर किया जाता है जिसमें केवीपीवाई से एडमिशन मिलता है।