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7 फरवरी, 2021|6:49|IST

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AIIMS MBBS admission 2019: AIIMS में खाली रह गईं एमबीबीएस की सीटें

aiims  delhi

अखिल भारत आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) देश का सबसे बेहतर और उत्कृष्ट चिकित्सा संस्थान है और डॉक्टर बनने का लक्ष्य लेकर चलने वाले हर छात्र का सपना इस संस्थान के चिकित्सा महाविद्यालयों (मेडिकल कॉलेजों) में दाखिला पाने का होता है। आपको यह जानकर अचरज होगा कि इस संस्थान के छात्रों की चाहत के बावजूद एमबीबीएस की नौ सीटें खाली रह गई हैं। इसके लिए किसे दोषी माना जाए, यह बड़ा सवाल बना हुआ है। 

देशभर में एम्स के मेडिकल कॉलेज नई दिल्ली, भोपाल, भुवनेश्वर, जोधपुर, रायपुर, ऋषिकेश, पटना, नागपुर, मंगलागिरि, भठिंडा, देवगढ़, गोरखपुर, कल्याणी, रायबरेली, तेलंगाना सहित कुल 15 स्थानों पर है। इन कॉलेजों में दाखिले के लिए 25 और 26 मई को देशव्यापी प्रवेश परीक्षा आयोजित की गई। एम्स की 1205 सीटों में दाखिले के लिए आयोजित परीक्षा के नतीजे 12 जून को आए। उसके बाद काउंसलिंग और मॉपअप राउंड का दौर चला। 

एम्स के संस्थानों में सामान्य वर्ग के लिए 584, सामान्य (पीडब्ल्यूडी) 28, अन्य पिछड़ा वर्ग 311, अन्य पिछड़ा वर्ग (पीडब्ल्यूडी) 14, अनुसूचित जाति 172, अनुसूचित जाति (पीडब्ल्यूडी) आठ, अनुसूचित जनजाति 83, अनुसूचित जनजाति (पीडब्ल्यूडी) पांच स्थान आरक्षित है।
  
सूचना के अधिकार के कार्यकतार् मध्यप्रदेश के नीमच जिले के निवासी चंद्रशेखर गौड़ का बेटा भी एम्स की प्रवेश परीक्षा में सम्मिलित हुआ था और उन्हें आशंका थी कि काउंसलिंग और मॉपअप राउंड के बाद भी सीटें खाली हो सकती हैं। इसी के चलते उन्होंने 12 सितंबर को एम्स से सीटें भरे जाने के संदर्भ में जानकारी मांगी। 

एम्स की ओर से गौड़ को जो जानकारी दी गई है, उसमें बताया गया है कि एम्स काउंसलिंग प्रक्रिया 26 अगस्त, 2019 को पूरी हो गई हैं एवं काउंसलिंग के समय तक कोई भी सीट रिक्त नहीं थी। उसके बाद देशभर के एम्स मेडिकल कालेजों में नौ सीटें खाली रह गईं, जिसमें बठिंडा में एक, देवगढ़ में दो, नागपुर में एक, पटना में दो, रायबरेली में दो एवं रायपुर में एक सीट शामिल है।

इसके साथ ही एम्स ने सवोर्च्च न्यायालय के एक आदेश का हवाला देते हुए बताया कि सवोर्च्च न्यायालय के एक नियम के अनुसार, दाखिले की अंतिम तिथि 31 अगस्त, 2०19 है, इसलिए ये सीटें अभी भी खाली पड़ी हैं।

सीटें खाली होने की वजह को लेकर जानकारों का मानना है कि एक छात्र जिसके एम्स की प्रवेश परीक्षा में अच्छे नंबर आते हैं और वह काउंसलिंग में जाकर प्रवेश लेने की हामी भर देता है और बाद में दाखिले की प्रक्रिया का हिस्सा बनने के बाद दाखिला नहीं लेता, ऐसी स्थिति में अंत तक यह सीट भरी रहती है और अंतिम समय में छात्र के दाखिला न लेने पर यह खाली हो जाती है। 

गौड़ का कहना है, “एम्स की एक-एक सीट पर दाखिले के लिए बड़ी कठिन प्रतिस्पधार् होती है। छात्र साल-साल भर कड़ी मेहनत करते हैं। उनका सपना रहता है कि एम्स जैसे संस्थान में दाखिला मिले। खाली पड़ी सीटों को भरने के लिए एम्स को सुप्रीम कोर्ट में यह अपील करनी चाहिए कि ये सभी सीटें पूरे साढ़े पांच वर्ष खाली ही रहेंगी, जिससे छात्र एवं संस्थान दोनों को नुकसान होगा। इसलिए विशेष परिस्थिति में इन सीटों को भरने की अनुमति दी जाए।”

गौड़ ने कुछ संस्थानों द्वारा खाली सीटों को भरने के लिए अलग से प्रक्रिया चलाए जाने का हवाला देते हुए कहा कि देश के शिक्षण संस्थानों में जब सरकारों द्वारा दूसरे अन्य पाठ्यक्रमों में सितंबर माह में भी खाली सीटों को भरने के लिए विशेष प्रयास एवं मॉपअप राउंड वगैरह आयोजित किए गए हैं, तब एम्स की सीटें खाली छोड़ देना बेहद परेशान करने वाला एवं चिंताजनक है। यह एक पात्र छात्र के साथ अन्याय है।

जानकारों का कहना है कि जो नौ सीटें खाली हैं, वे पूरे पाठ्यक्रम के दौरान खाली रहेंगी, इस तरह इस बैच से तैयार होने वाले चिकित्सकों की संख्या के मुकाबले नौ कम चिकित्सक तैयार होंगे। यह देश के लिए बड़ी क्षति होगी। 

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  • Web Title:AIIMS MBBS admission 2019: MBBS seats remained vacant in AIIMS