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देश के 56 कैंट बोर्ड 11 फरवरी को हो जाएंगे भंग

देश की 56 छावनियों में चुने गए बोर्ड का कार्यकाल आगामी 11 फरवरी को समाप्त हो जाएगा। इस बाबत रक्षा संपदा निदेशालय से छावनी परिषदों को सोमवार को आदेश जारी कर दिया गया। देश के छावनी बार्डों में छह...

देश के 56 कैंट बोर्ड 11 फरवरी को हो जाएंगे भंग
Alakha Singhकार्यालय संवाददाता,देहरादूनMon, 01 Feb 2021 08:42 PM
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देश की 56 छावनियों में चुने गए बोर्ड का कार्यकाल आगामी 11 फरवरी को समाप्त हो जाएगा। इस बाबत रक्षा संपदा निदेशालय से छावनी परिषदों को सोमवार को आदेश जारी कर दिया गया।

देश के छावनी बार्डों में छह साल पहले चुनाव के बाद बोर्ड का गठन हुआ था। पांच वर्ष पूरे होने पर इनमें छह महीने का एक्सटेंशन किया गया। छह महीने पूरे हुए तो दूसरा एक्सटेंशन दिया गया। यह 10 फरवरी को पूरा होना जा रहा है। छावनी अधिनियम के तहत बोर्ड को दो बार ही बढ़ाया जा सकता है। ऐसे में अब 10 फववरी को देश के 56 कैंट बोर्ड में चुने गए बोर्ड भंग हो जाएंगे। यानि, छावनी बोर्ड के सभासद और उपाध्यक्षों की शक्तियां अब खत्म हो जाएंगी। बोर्ड भंग होने के दायरे में देहरादून जिले के चारों यानी देहरादून, क्लेमनटाउन, लंढौर और चकराता कैंट बोर्ड के साथ ही राज्य के सभी कैंट बोर्ड आ रहे हैं। 

क्लेमनटाउन छावनी परिषद के सीईओ अभिषेक राठौर ने रक्षा संपदा निदेशालय से आदेश जारी होने की पुष्टि की है। बताया कि मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस स्टेट्स, रक्षा संपदा भवन, दिल्ली कैंट से एडिशनल डिजी कैट्स दमन सिंह ने आदेश जारी किया है।

एक वर्ष या चुनाव होने तक भंग
कैंट बोर्ड निदेशायल से जारी आदेश के तहत बोर्ड आगामी चुनाव होने या एक वर्ष तक भंग रहेंगे। इस दौरान प्रशानिक बोर्ड का गठन किया जाएगा। इसमें छावनी अध्यक्ष, सीईओ और एक सदस्य शामिल होता है।

जल्द हो बोर्ड गठन
छावनी परिषद गढ़ी के पूर्व उपाध्यक्ष विष्णु प्रसाद गुप्ता ने कहा है कि बोर्ड भंग होने के बाद आम जनता को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। बोर्ड भंग होने के बाद अधिकारी कोई भी कार्य नहीं कर पाएंगे। सभासद जनता और अधिकारियों के बीच की कड़ी होते हैं। अतः जनता व अधिकारियों की सहूलियत के लिए तुरंत वैकल्पिक बोर्ड का गठन किया जाए, जिससे जनता को परेशानियों का सामना न करना पड़े। 
 

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