SSC SSC Sliding Mechanism: एसएससी परीक्षा 2026 में बड़ा बदलाव, अब स्लाइडिंग मैकेनिज्म से छात्रों को मिलेगी मनपसंद नौकरी
Reform in SSC Recruitment: एसएससी ने वर्ष 2026 की परीक्षाओं के लिए ‘स्लाइडिंग मैकेनिज्म’ की शुरुआत की है, जिसमें उम्मीदवारों को ‘फिक्स’ और ‘फ्लोट’ जैसे नए विकल्प मिलेंगे।

Reform in SSC Recruitment: कर्मचारी चयन आयोग (SSC) ने अपनी आगामी परीक्षाओं और चयन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी व छात्र-अनुकूल बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। एसएससी ने वर्ष 2026 की परीक्षाओं के लिए ‘स्लाइडिंग मैकेनिज्म’ की शुरुआत की है, जिसमें उम्मीदवारों को ‘फिक्स’ और ‘फ्लोट’ जैसे नए विकल्प मिलेंगे। यह व्यवस्था मुख्य रूप से उन छात्रों के लिए फायदेमंद होगी जो अपनी पसंद का पद या विभाग पाने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं।
आयोग के इस ऐतिहासिक फैसले का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया में होने वाली देरी को कम करना और पदों के खाली रह जाने की समस्या का समाधान करना है।
क्या है स्लाइडिंग मैकेनिज्म?
आमतौर पर एसएससी की परीक्षाओं में एक बार विभाग आवंटित होने के बाद उसमें बदलाव की गुंजाइश नहीं होती थी। लेकिन नए स्लाइडिंग मैकेनिज्म के तहत, यदि किसी उच्च रैंक वाले उम्मीदवार ने अपनी पहली पसंद का पद नहीं पाया है, तो वह दूसरी लिस्ट में अपनी पसंद को अपडेट कर सकता है। यह ठीक वैसी ही प्रक्रिया है जैसी इंजीनियरिंग (IIT/NIT) में दाखिले के समय जोसा (JoSAA) काउंसलिंग के दौरान अपनाई जाती है।
'फिक्स' और 'फ्लोट' विकल्प को समझें
चयन प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों को दो विकल्प दिए जाएंगे:
फिक्स: यदि किसी उम्मीदवार को उसकी पसंद का पद और विभाग मिल गया है और वह उससे पूरी तरह संतुष्ट है, तो वह 'फिक्स' विकल्प चुन सकता है। इसके बाद उसकी सीट लॉक हो जाएगी और उसे आगे के राउंड में नहीं ले जाया जाएगा।
फ्लोट : यदि किसी उम्मीदवार को सीट तो मिल गई है, लेकिन वह अपनी उच्च प्राथमिकता वाली पसंद के लिए अपग्रेड होना चाहता है, तो वह 'फ्लोट' विकल्प चुनेगा। इसका मतलब है कि वह वर्तमान सीट को सुरक्षित रखते हुए अगले राउंड की प्रतीक्षा करेगा। यदि ऊपर की पसंद वाली सीट खाली होती है, तो उसे वह आवंटित कर दी जाएगी।
छात्रों को कैसे होगा फायदा?
एसएससी परीक्षाओं में अक्सर देखा गया है कि अभ्यर्थी एक साथ कई परीक्षाओं (जैसे CGL, CHSL, MTS) में सफल हो जाते हैं।
सीटों की बर्बादी रुकेगी: इस व्यवस्था से वे छात्र जो छोटी रैंक के कारण बाहर हो जाते थे, उन्हें खाली होने वाली सीटों पर मौका मिल सकेगा।
पारदर्शिता: 'वेटिंग लिस्ट' जैसी समस्या का समाधान होगा और योग्य उम्मीदवारों को उनकी मेरिट के आधार पर सबसे बेहतर विभाग मिल सकेगा।
समय की बचत: बार-बार होने वाली काउंसलिंग और डॉक्यूमेंट के वेरिफिकेशन की प्रक्रिया में तेजी आएगी।
कब से लागू होगा नया नियम?
आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह नया स्लाइडिंग सिस्टम SSC CGL 2026 और CHSL 2026 की भर्ती प्रक्रियाओं से पूरी तरह प्रभावी होगा। आयोग जल्द ही अपनी आधिकारिक वेबसाइट ssc.gov.in पर इसके लिए एक गाइडलाइन और यूजर मैनुअल जारी करेगा ताकि छात्रों को फॉर्म भरते समय कोई भ्रम न रहे।



