कभी CSAT में 0.2 नंबर से फेल, कभी नहीं निकला प्री; 5वें प्रयास में सृष्टि ने UPSC में कैसे हासिल की सफलता

Himanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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srishti goyal upsc success story : ग्वालियर की सृष्टि गोयल ने कई बार असफलता और सीसैट में 0.2 नंबर से मिली हार के बाद UPSC 2025 में AIR 160 हासिल की। आइए जानते हैं  उनकी संघर्ष, तैयारी और सफलता की पूरी कहानी।

कभी CSAT में 0.2 नंबर से फेल, कभी नहीं निकला प्री; 5वें प्रयास में सृष्टि ने UPSC में कैसे हासिल की सफलता

srishti goyal upsc success story : मध्य प्रदेश के ग्वालियर की रहने वाली सृष्टि गोयल की कहानी उन लाखों युवाओं जैसी शुरू होती है जिनके परिवारों में सुरक्षित करियर को सबसे बड़ा सपना माना जाता है। लेकिन उनकी मंजिल अलग थी। संयुक्त परिवार से आने वाली सृष्टि ने एक ऐसा रास्ता चुना, जहां सालों की मेहनत, लगातार असफलताएं और खुद पर उठते सवाल हर दिन उनका इंतजार करते थे। उनके पिता बिजनेसमैन हैं और सिविल सर्विस में बेटी को देखने का सपना उन्होंने काफी पहले से संजो रखा था। धीरे-धीरे यही सपना सृष्टि का भी बन गया। खास बात यह रही कि उन्होंने शुरुआत में दिल्ली जाकर तैयारी नहीं की। उन्होंने ग्वालियर में रहकर ही UPSC की तैयारी शुरू की, जो आम तौर पर कम ही देखने को मिलता है। 4 बार यूपीएससी में नाकामी झेलने के बाद सृष्टि ने कैसे सफलता हासिल की... आइए जानते हैं।

इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बीच बदली जिंदगी की दिशा

सृष्टि ने ग्वालियर के से कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। शुरुआत में उनका रास्ता टेक्नोलॉजी सेक्टर की तरफ जाता दिख रहा था, लेकिन कॉलेज के दिनों में कुछ अनुभवों ने उनकी सोच पूरी तरह बदल दी। वह एनजीओ में काम किया और करीब तीन साल तक उन्होंने समाज के अलग-अलग वर्गों के बीच काम किया। यहीं उन्होंने लोगों की समस्याओं को करीब से समझा। किताबों और इंटरनेट से अलग, यह असली जिंदगी का अनुभव था। इन्हीं अनुभवों ने उन्हें महसूस कराया कि अगर बदलाव लाना है तो प्रशासनिक सेवा सबसे बड़ा माध्यम बन सकती है।

पांच कोशिशें, बार-बार टूटता सपना और फिर वापसी

सृष्टि की UPSC यात्रा सीधी नहीं रही। हर साल उनके सामने एक नई चुनौती खड़ी हो जाती थी। साल 2021 में वह प्रीलिम्स में मामूली अंतर से चूक गईं। वहीं 2022 में इंटरव्यू तक पहुंचीं लेकिन फाइनल लिस्ट में नाम नहीं आया। 2023 में CSAT में सिर्फ 0.2 नंबर से सपना टूट गया। वहीं 2024 में फिर इंटरव्यू तक पहुंचीं लेकिन चयन नहीं हुआ। और आखिरकार 2025 में उन्होंने AIR 160 हासिल कर ली। सिर्फ UPSC ही नहीं, दूसरे एग्जाम्स में भी किस्मत उनके बेहद करीब आकर रुक जाती थी। RBI परीक्षा में 0.2 नंबर से चूकना, MPPSC में सिर्फ एक नंबर से पीछे रह जाना, लगातार उनके आत्मविश्वास की परीक्षा लेता रहा। इंडिय मास्टमाइंड में छपी खबर के मुताबिक, सृष्टि मानती हैं कि उनकी सफलता से कहीं ज्यादा बड़ी उनकी असफलताओं की कहानी है। हर नाकामी के बाद खुद को दोबारा खड़ा करना ही सबसे मुश्किल काम था।

जब मानसिक दबाव ने तोड़ना शुरू कर दिया

लगातार रिजल्ट खराब आने का असर सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं रहा। एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने प्रीलिम्स क्लियर कर लिया था, लेकिन मेन्स से पहले वह इतनी बीमार पड़ गईं कि परीक्षा ही नहीं दे सकीं। बार-बार असफल होने के बाद उनके मन में खुद को लेकर सवाल उठने लगे। उन्हें लगने लगा कि शायद वह इस परीक्षा के लिए बनी ही नहीं हैं। इसी दौर में परिवार, दोस्तों और मेंटर्स ने उनका साथ दिया। सृष्टि कहती हैं कि UPSC जैसी लंबी तैयारी में मजबूत रिश्ते बहुत जरूरी होते हैं। वही लोग मुश्किल समय में आपको टूटने से बचाते हैं।

दिल्ली जाकर बदली पूरी तैयारी

सृष्टि को धीरे-धीरे समझ आया कि सिर्फ पढ़ना काफी नहीं है। असली फर्क इस बात से पड़ता है कि आप सवाल को कितना सही समझते हैं और समय के दबाव में कैसे जवाब देते हैं। यही वजह थी कि मेन्स परीक्षा से ठीक एक महीने पहले उन्होंने बड़ा फैसला लिया और दिल्ली चली गईं। वहां उन्होंने लगातार टेस्ट देना शुरू किया। रोज एक-दो टेस्ट देकर उन्होंने खुद को असली परीक्षा जैसा माहौल देना शुरू किया। इस अभ्यास ने उनकी राइटिंग स्पीड, टाइम मैनेजमेंट और जवाब देने की क्षमता को काफी मजबूत कर दिया। मेंटर्स ने भी उनकी कमजोरियां पहचानने में मदद की।

इंटरव्यू में जवाब नहीं संतुलन काम आया

सृष्टि पहले भी इंटरव्यू तक पहुंच चुकी थीं, लेकिन इस बार उन्होंने सबसे ज्यादा काम अपने व्यक्तित्व और शांत रहने की क्षमता पर किया। इंटरव्यू में उनसे पूछा गया कि अगर कोई एलियन पृथ्वी को देखे तो उसे इंसानों की कौन-सी तीन गलतियां सबसे ज्यादा खतरनाक लगेंगी। एक अन्य सवाल में उन्हें दंगे जैसी स्थिति में IPS अधिकारी के तौर पर फैसला लेने को कहा गया। उन्होंने किसी एक चरम जवाब को चुनने के बजाय संतुलित सोच दिखाई। उनका फोकस परफेक्ट जवाब देने से ज्यादा शांत और स्पष्ट रहने पर था। यही बात इंटरव्यू बोर्ड को प्रभावित कर गई।

अब शिक्षा क्षेत्र में काम करना चाहती हैं

AIR 160 हासिल करने के बाद भी सृष्टि का फोकस सिर्फ किसी बड़ी पोस्ट पर नहीं है। वह कहती हैं कि चाहे IAS मिले, IPS या IFS, उनका मकसद समाज में रोज कुछ अच्छा बदलाव लाना है। अगर मौका मिला तो वह शिक्षा क्षेत्र में काम करना चाहेंगी, क्योंकि वही क्षेत्र उनकी अपनी जिंदगी को भी नई दिशा दे चुका है।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
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