मां ने हासिल की मास्टर डिग्री, दुबई में बैठी बेटी की आंखों से छलके आंसू; वायरल हो रही कहानी

लाइव हिन्दुस्तान
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दुबई में बैठी एक बेटी अपनी मां की ग्रेजुएशन सेरेमनी को टीवी पर देखकर भावुक होकर रो पड़ी। सोशल मीडिया पर यह पल वायरल हो रहा है।

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दुनिया में मां की ममता और उसके बलिदान की कोई कीमत नहीं लगाई जा सकती। एक मां अपने बच्चों के लिए क्या कुछ नहीं करती, अपने सारे सपने भूलकर वो बस अपने बच्चों के भविष्य को संवारने में लग जाती है। लेकिन क्या हो जब कोई मां अपनी उम्र के उस पड़ाव पर अपने अधूरे सपनों को पूरा करे, और उसकी बेटी हजारों किलोमीटर दूर बैठकर उस कामयाबी को टीवी स्क्रीन पर निहार रही हो? कुछ ऐसा ही हुआ दुबई में रहने वाली एक श्रीलंकाई कंटेंट क्रिएटर के साथ। अपनी मां को अपनी आंखों के सामने, भले ही वो स्क्रीन पर ही क्यों न हो, एक बड़ा मुकाम हासिल करते देख बेटी की आंखों से आंसू छलक पड़े। यह एक ऐसा जज्बाती पल था, जिसने इंटरनेट पर हर किसी को भावुक कर दिया।

मां को डिग्री मिलता देख हुईं भावुक

नुमाया कारू श्रीलंका की रहने वाली हैं और इन दिनों दुबई में अपना करियर बना रही हैं, उन्होंने हाल ही में इंस्टाग्राम पर एक ऐसा वीडियो शेयर किया जो सीधा दिल में उतर जाता है। वीडियो में नुमाया अपने कमरे में बैठी हैं और सामने टीवी स्क्रीन पर उनकी मां की दीक्षांत समारोह यानी कॉन्वोकेशन का सीधा प्रसारण चल रहा है। जैसे ही स्क्रीन पर उनकी मां का नाम पुकारा जाता है और वो अपनी मास्टर डिग्री लेने के लिए स्टेज की तरफ बढ़ती हैं, नुमाया खुद को रोक नहीं पातीं। मीलों की दूरी के बावजूद, वो अपनी मां की इस कामयाबी पर फक्र महसूस करती हैं और उनकी आंखों से खुशी के आंसू बहने लगते हैं। वो बार-बार अपने आंसू पोंछती नजर आती हैं। यह महज एक डिग्री मिलने का जश्न नहीं था, बल्कि उन तमाम मुश्किलों पर मिली जीत का पल था, जिनका इस मां ने बरसों तक डटकर सामना किया था।

लिखा दिल को छू लेने वाला नोट

नुमाया ने इस वीडियो के साथ एक लंबा और दिल छू लेने वाला नोट भी लिखा है। उन्होंने दुनिया को बताया कि इस डिग्री के पीछे उनकी मां की कितनी रातें और कितने समझौते छिपे हैं। पिता के गुजर जाने के बाद, परिवार पर जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। लेकिन उनकी मां ने हार नहीं मानी। पिछले नौ सालों से उन्होंने अपने बच्चों के लिए मां और बाप, दोनों का फर्ज बखूबी निभाया। वो काम भी करती रहीं और परिवार को भी बिखरने से बचाए रखा। दुःख सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं थे; इसी दौरान उनकी मां ने एक ही साल के भीतर अपने दोनों माता-पिता को भी खो दिया। इतने गहरे सदमे के बीच कोई भी इंसान टूट सकता था, लेकिन वो चट्टान की तरह डटी रहीं।

सिर्फ घर ही नहीं, बल्कि अपने पेशे में भी इस महिला ने मिसाल कायम की। नुमाया बताती हैं कि सरकार ने जब सालों से बंद पड़े एक ग्रामीण स्कूल को दोबारा खोलने का फैसला किया, तो उनकी मां ने उस स्कूल की पहली प्रिंसिपल बनने की चुनौती स्वीकार की। उन्होंने उस वीरान पड़े स्कूल को फिर से खड़ा किया, वहां के बच्चों के लिए नए मौके बनाए और पूरे समाज के लिए एक बेहतरीन काम किया। इन तमाम जिम्मेदारियों के बीच, उन्होंने खुद की पढ़ाई को भी जारी रखा और अपनी मास्टर डिग्री हासिल की। नुमाया कहती हैं कि उन्होंने हमेशा अपनी मां को दूसरों के लिए जीते देखा है, दूसरों की खुशियों को अपनी चाहतों से ऊपर रखते देखा है। इसलिए यह मास्टर डिग्री वाला पल सिर्फ और सिर्फ उनकी मां का था।

अक्सर जो लोग अपने घरों से दूर परदेस में रहते हैं, वो इस दर्द को अच्छी तरह समझते हैं। नुमाया ने अपनी पोस्ट में उस अपराधबोध यानी गिल्ट का भी जिक्र किया जो हर प्रवासी कभी न कभी महसूस करता है। उन्होंने लिखा, "मैं यहां दुबई में जो जिंदगी बना रही हूं, वो वही जिंदगी है जो मेरी मां ने हमेशा मेरे लिए चाही थी। लेकिन आज जैसे खास दिन पर, उनके साथ न होने का एहसास बहुत भारी लग रहा है।" यह लाइन हर उस इंसान के दिल को छू गई, जो अपने मां-बाप से दूर किसी और शहर या देश में अपनी रोजी-रोटी कमा रहा है। मीलों दूर बैठकर अपनी मां को जश्न मनाते देखना, एक तरफ फक्र से सीना चौड़ा कर देता है, तो दूसरी तरफ पास न होने का गहरा मलाल भी दे जाता है।

सोशल मीडिया पर खूब मिल रहा प्यार

जैसे ही यह वीडियो इंस्टाग्राम पर पोस्ट हुआ लोगों का प्यार इस पर बरसने लगा। हर कोई इस मां के जज्बे और बेटी के इस खूबसूरत ट्रिब्यूट की जमकर तारीफ कर रहा है। लोगों का कहना है कि यह कहानी इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि सपनों की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती। उम्र चाहे कोई भी हो, अगर इंसान ठान ले, तो वो कुछ भी हासिल कर सकता है। एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, "सच कहूं तो यह अब तक की सबसे प्रेरणादायक चीज है जो मैंने इंटरनेट पर देखी है।" वहीं एक और यूजर ने लिखा, "यह बहुत ही खूबसूरत है, औरतें वाकई में कमाल होती हैं!!" बहुत से लोगों ने नुमाया को शुक्रिया भी कहा कि उन्होंने एक ऐसा निजी और सच्चा पल दुनिया के साथ बांटा, जो हमें याद दिलाता है कि हमारी कामयाबी के पीछे हमारे मां-बाप के कितने अनकहे बलिदान छिपे होते हैं।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

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हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

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हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

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काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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