
शनि की साढ़ेसाती में क्या होता है?
संक्षेप: शनि की साढ़ेसाती का नाम सुनते ही लोगों के मन में डर बैठ जाता है। क्योंकि लोगों के बीच ऐसी मान्यताएं है कि साढ़े साती के दौरान का समय किसी व्यक्ति के लिए बहुत ही खतरनाक होता है और इस समय शनि दंडित करते हैं। चलिए जानते हैं कि शनि की साढ़ेसाती में क्या होता है?
ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। शनि ऐसे ग्रह हैं जो कि हर व्यक्ति को शुभ और अशुभ दोनों ही फल देते हैं। इसलिए ये कर्म के देवता कहलाते हैं। इनकी साढ़ेसाती का नाम सुनते ही लोगों के मन में डर बैठ जाता है। क्योंकि लोगों के बीच ऐसी मान्यताएं है कि साढ़े साती के दौरान का समय किसी व्यक्ति के लिए बहुत ही खतरनाक होता है और इस समय शनि दंडित करते हैं। ऐसे में आज हम जानेंगे कि शनि की साढ़ेसाती में क्या होता है?

ज्योतिषियों की मानें, जब कुंडली में शनि बारहवें, पहले, दूसरे भाव में हो या फिर जन्म के समय में अगर शनि चंद्रमा के ऊपर से होते हुए निकल जाएं, तो उसे शनि की साढ़ेसाती कहा जाता है. शनि की साढ़ेसाती को आमतौर पर शुभ नहीं माना जाता है. शनि साढ़ेसाती को ढाई-ढाई साल के तीन चरणों में बांटा गया है.
पहला चरण- पहले चरण में जातकों को आर्थिक समस्याओं का ज्यादा सामना करना पड़ता है।
दूसरा चरण- यह चरण कष्टकारी माना जाता है। इस चरण में शनि 12वें घर से पहले या मूल चंद्र घर में जाता है। इस दौरान जातक कई तरह के रोग से घिर जाते हैं।
तीसरा चरण- साढ़ेसाती का तीसरा चरण तब होता है, जब शनि मूल चंद्र भाव से दूसरे भाव में प्रवेश करता है। इसमें सुख-सुविधाओं में कमी लाता है। इस दौरान कमाई से ज्यादा खर्चे बढ़ जाते हैं।
शनि की साढ़ेसाती के दौरान जीवन में बड़े बदलाव आते हैं। कभी-कभी यह बदलाव सकारात्मक से ज्यादा नकारात्मक होते हैं। जैसे, करियर में उतार-चढ़ाव, सेहत से जुड़ी परेशानियां और पैसों की तंगी।
लेकिन इससे घबराने की बात नहीं है, क्योंकि साढ़े साती में हमेशा ही अशुभ फल मिले ऐसा जरूरी नहीं है। साढ़े साती में शुभता या अशुभता इस बात पर निर्भर करती है कि कुंडली में शनि की स्थिति कैसी है और साथ ही साथ व्यक्ति के कर्म कैसे हैं।
साढ़े साती से बचने के उपाय
शनिवार के दिन भगवान शिव, माता पार्वती और हनुमान जी की पूजा करने से भी शनि साढ़ेसाती से बचा जा सकता है।
इसके साथ ही गरीबों की मदद करने से भी शनि साढ़ेसाती से बचा जा सकता है। शनि देव को लोहा, तिल, सरसों का तेल और छायापात्र दान अत्यन्त प्रिय हैं। माना जाता है कि इन चीजों का दान करने से उग्र शनि देव शांत होते हैं।
शनि की साढ़े साती से बचने के लिए शनि का मंत्र"ॐ शं शनैश्चराय नमः" बहुत लाभकारी माना जाता है। प्रतिदिन इस मंत्र का जाप करने से शनि की साढ़े साती के नकारात्मक प्रभावों को कम करने में मदद मिलती है।
शनि देव को काला तिल बहुत प्रिय है। माना जाता है कि शनिवार के दिन काले तिल का दान करने से शनि की महादशा और साढ़ेसाती में राहत मिलती है।
शनिवार के दिन शमी या पीपल के पेड़ की पूजा करें और इसके नीचे दिया जलाएं। यह दोनों पेड़ शनिदेव को अति प्रिय हैं. इनकी पूजा करने से शनि देव जल्द प्रसन्न होते हैं।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।





