आसमान से बरस रही आग, कई राज्यों में बदले स्कूलों के समय; आपके राज्य का क्या हाल
देश के कई हिस्सों में भयंकर गर्मी और लू के चलते स्कूलों के समय में बड़ा बदलाव किया गया है। बच्चों को चिलचिलाती धूप और हीटवेव से बचाने के लिए कई राज्यों ने अहम कदम उठाए हैं।

अप्रैल का महीना अभी पूरी तरह से बीता भी नहीं है लेकिन देश के ज्यादातर हिस्सों में सूरज ने अपने तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। आसमान से मानो आग बरस रही है और झुलसा देने वाली गर्म हवाओं ने लोगों का घर से निकलना मुहाल कर दिया है। इस जानलेवा गर्मी में सबसे ज्यादा परेशानी उन मासूम बच्चों को हो रही है, जिन्हें चिलचिलाती धूप में पीठ पर भारी बस्ता लादकर स्कूल जाना पड़ता है। इस भीषण गर्मी और हीटवेव के कहर को देखते हुए अब कई राज्यों की सरकारें और स्कूल प्रशासन हरकत में आ गए हैं। बच्चों की सेहत और सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए कई जगहों पर स्कूलों के समय में बड़े बदलाव किए गए हैं, तो कुछ राज्यों में एहतियात के तौर पर नई गाइडलाइंस और सख्त हिदायतें जारी कर दी गई हैं।
कई राज्यों में 40 के पार पहुंचा पारा
मौसम विभाग के मुताबिक, देश के कई सूबों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार जा चुका है। गर्मी का ये सितम सिर्फ बड़ों के पसीने नहीं छुड़ा रहा, बल्कि स्कूली बच्चों के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। इस खतरनाक मौसम को देखते हुए, स्कूलों ने आनन-फानन में कई कदम उठाए हैं। कहीं सुबह जल्दी क्लास लगाने की बात हो रही है, तो कहीं पढ़ाई के घंटे कम कर दिए गए हैं। इसका मकसद बच्चों को दोपहर की उस खतरनाक धूप से बचाना, जो उन्हें गंभीर रूप से बीमार कर सकती है।
झारखंड में मॉर्निंग शिफ्ट में ज्यादातर प्राइवेट स्कूल
बात अगर झारखंड की करें, तो वहां की तपिश ने भी लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। स्थानीय मीडिया की खबरों की मानें, तो वहां के ज्यादातर प्राइवेट स्कूलों ने अपने यहां मॉर्निंग शिफ्ट यानी सुबह की पाली शुरू कर दी है। अब वहां कक्षाएं दिन के उन शुरुआती घंटों में लग रही हैं जब मौसम थोड़ा ठंडा रहता है। इससे बच्चों को लू लगने का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। वहीं, ओडिशा में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं। वहां की सरकार ने आधिकारिक तौर पर कई जिलों में स्कूलों की टाइमिंग में बदलाव का ऐलान कर दिया है। ओडिशा में अब स्कूल सुबह जल्दी खुल रहे हैं और दोपहर की झुलसाने वाली धूप शुरू होने से पहले ही बच्चों की छुट्टी कर दी जा रही है।
तेलंगाना में प्रचंड गर्मी
दक्षिण भारत का रुख करें तो तेलंगाना में भी गर्मी ने अपना प्रचंड रूप दिखाना शुरू कर दिया है। वहां के प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा के लिए कुछ और खास एहतियाती कदम उठाए हैं। स्कूलों में अब 'वाटर ब्रेक' यानी पानी पीने के लिए अनिवार्य समय तय कर दिया गया है। इसके अलावा, स्कूल कैंपस के अंदर ऐसी जगहों का इंतज़ाम करने को कहा गया है जहां छाया हो और तापमान थोड़ा कम रहे। सबसे गर्म समय के दौरान बच्चों को बाहर खेलने या कोई भी बाहरी एक्टिविटी करने से साफ मना किया गया है। कुछ ऐसा ही हाल मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों का भी है। वहां के स्कूल भी या तो अपनी टाइमिंग बदल रहे हैं या फिर मौसम के मिजाज पर करीब से नजर बनाए हुए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत कोई ठोस कदम उठाया जा सके।
कई राज्य सरकारों ने जारी की एडवाइजरी
पूरे देश में राज्य सरकारों और स्कूल मैनेजमेंट ने एक सुर में एडवाइजरी जारी की है। इसमें बच्चों की सुरक्षा पर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा है। सभी शिक्षण संस्थानों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वो अपने यहां पीने के साफ और ठंडे पानी का पूरा इंतजाम रखें। क्लासरूम में हवा की आवाजाही यानी वेंटिलेशन सही होनी चाहिए। अगर किसी बच्चे की तबीयत गर्मी से बिगड़ती है, तो उससे निपटने के लिए फर्स्ट-एड और जरूरी मेडिकल सुविधाएं तुरंत उपलब्ध होनी चाहिए। इसके साथ ही, दोपहर की चिलचिलाती धूप में होने वाली असेंबली और खेलकूद के पीरियड को कई जगहों पर पूरी तरह से रद्द कर दिया गया है।
इतनी तेज गर्मी की वजह से बच्चों में डिहाइड्रेशन, हीट एग्जॉशन यानी थकान और चक्कर आना और लू लगने जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा काफी बढ़ गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ और डॉक्टर लगातार माता-पिता और स्कूलों को सलाह दे रहे हैं कि वे बच्चों को ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ पिलाएं। बच्चों का शरीर बड़ों के मुकाबले तापमान में होने वाले बदलाव को जल्दी नहीं सह पाता। इसलिए उन्हें नींबू पानी, छाछ, ओआरएस (ORS) का घोल या नारियल पानी जैसी चीजें नियमित रूप से देते रहना चाहिए। बच्चों को सूती और हल्के रंग के कपड़े पहनाने की सलाह दी जा रही है और उन्हें बेवजह धूप में निकलने से रोकने के लिए कहा जा रहा है।
कई राज्यों में जारी रहेगा हीटवेव
मौसम विभाग का जो ताजा अनुमान है, वो कोई खास राहत भरी खबर नहीं दे रहा है। आने वाले दिनों में हीटवेव का ये प्रकोप और बढ़ने की आशंका है। अगर मौसम का मिजाज ऐसा ही रहा, तो मुमकिन है कि कई राज्य सरकारें स्कूलों को लेकर कुछ और सख्त फैसले लें। हालात बिगड़ने पर स्कूलों में समय से पहले गर्मियों की छुट्टियां घोषित की जा सकती हैं या फिर अगर कहीं स्कूल बंद हैं तो उन छुट्टियों को और आगे बढ़ाया जा सकता है। कुदरत के इस गर्म मिजाज के आगे फिलहाल इंसान बेबस जरूर नजर आ रहा है, लेकिन सूझबूझ और सही समय पर उठाए गए इन कदमों से नौनिहालों को इस जानलेवा गर्मी से काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
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हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
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हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
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काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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