
SC to UPSC: दिव्यांग उम्मीदवार UPSC परीक्षा से पहले बदल सकेंगे स्क्राइब, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
UPSC Scribe: सुप्रीम कोर्ट ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह अपनी परीक्षाओं में दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए स्क्राइब बदलने की अनुमति दे और साथ ही स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर की सुविधा भी सुनिश्चित करे।
UPSC Scribe : देश की सबसे कठिन परीक्षा, यूपीएससी की तैयारी कर रहे दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए एक बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह अपनी परीक्षाओं में दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए स्क्राइब बदलने की अनुमति दे और साथ ही स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर की सुविधा भी सुनिश्चित करे।
यह ऐतिहासिक फैसला, जो दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन 'मिशन एक्सेसिबिलिटी' की याचिका पर आया है, यह सुनिश्चित करता है कि योग्यता और अवसर की दौड़ में कोई भी उम्मीदवार पीछे न छूटे।
परीक्षा से एक हफ्ता पहले तक बदल सकते हैं स्क्राइब
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने अपने फैसले में UPSC को दो मुख्य निर्देश दिए हैं।
स्क्राइब बदलने की अनुमति: आयोग को यह सुनिश्चित करना होगा कि परीक्षा की सभी नोटिफिकेशन में एक स्पष्ट प्रावधान जोड़ा जाए। इस प्रावधान के तहत, स्क्राइब के लिए पात्र उम्मीदवार परीक्षा की तारीख से कम से कम सात दिन पहले तक स्क्राइब बदलने का अनुरोध कर सकते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह के अनुरोध पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए और आवेदन मिलने के तीन वर्क डे के अंदर फैसला सुनाया जाना चाहिए।
स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर: कोर्ट ने UPSC को अगले दो महीने के अंदर एक व्यापक अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का भी निर्देश दिया है। इस हलफनामे में दृष्टिबाधित उम्मीदवारों के लिए स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर को लागू करने की योजना, समय-सीमा और तरीका बताना होगा।
'अधिकार दान नहीं, संवैधानिक वादे की अभिव्यक्ति है'
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले के दौरान एक बहुत महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों को प्राप्त अधिकार कोई दान या उपकार नहीं है, बल्कि ये समानता, गरिमा और गैर-भेदभाव के संवैधानिक वादे की अभिव्यक्ति हैं। कोर्ट ने कहा कि समावेशी शासन का सही माप केवल अच्छी नीतियां बनाने में नहीं है, बल्कि उन्हें ईमानदारी और प्रभावी ढंग से लागू करने में है।
यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार) के साथ-साथ दिव्यांग व्यक्ति अधिकार अधिनियम, 2016 (Rights of Persons with Disabilities Act, 2016) के प्रावधानों को सही मायनों में लागू करने के लिए दिया गया है।
कोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित विभागों को भी निर्देश दिया है कि वे UPSC को इन सुविधाओं को तेजी से लागू करने के लिए हर जरूरी प्रशासनिक और तकनीकी सहायता प्रदान करें। इस फैसले से यह उम्मीद जगी है कि अब UPSC की परीक्षाओं में सभी उम्मीदवारों को समान अवसर और पहुंच सुनिश्चित होगी।





