CBSE 3-Language Policy: सीबीएसई के तीन भाषा नियम पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; केंद्र और NCERT से मांगा जवाब
CBSE 3-Language Rule: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा कक्षा 9वीं के छात्रों के लिए लागू किए गए नए 'थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला' (तीन भाषा नियम) को लेकर विवाद अब देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंच गया है।

CBSE 3-Language Rule: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा कक्षा 9वीं के छात्रों के लिए लागू किए गए नए 'थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला' (तीन भाषा नियम) को लेकर विवाद अब देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार 27 मई 2026 को इस नीति को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करने के लिए सहमति दे दी है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पांचोली की पीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार, सीबीएसई (CBSE) और एनसीईआरटी (NCERT) को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
क्या है सीबीएसई का नया नियम और विवाद की वजह?
सीबीएसई द्वारा हाल ही में जारी किए गए एक सर्कुलर के मुताबिक, 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9वीं के सभी छात्रों के लिए तीन भाषाओं (R1, R2 और R3) को पढ़ना अनिवार्य कर दिया गया है। इस नियम की सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि इन तीन भाषाओं में से कम से कम दो भाषाएं मूल भारतीय होनी चाहिए। इस अचानक लिए गए फैसले का सबसे ज्यादा असर उन छात्रों पर पड़ रहा है जो विदेशी भाषाएं (जैसे फ्रेंच, जर्मन, स्पेनिश या जापानी) पढ़ रहे थे। अब नए नियम के मुताबिक, वे विदेशी भाषा तभी चुन सकते हैं जब बाकी की दो भाषाएं भारतीय हों, अन्यथा उन्हें विदेशी भाषा को एक अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में पढ़ना होगा।
अदालत में याचिकाकर्ताओं की दलील: "खड़ा हो जाएगा अराजकता का माहौल"
छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों की ओर से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि शैक्षणिक सत्र अप्रैल में ही शुरू हो चुका है। ऐसे में बीच सत्र में नियमों को बदलना छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ाएगा और इससे स्कूलों में पूरी तरह से "अराजकता का माहौल" पैदा हो जाएगा।
दरअसल, इससे पहले बोर्ड ने कहा था कि इस त्रि-भाषा नीति को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, जिसकी शुरुआत केवल कक्षा 6 से होनी थी। लेकिन अचानक से इसे इसी साल जुलाई से कक्षा 9वीं के लिए भी अनिवार्य कर दिया गया, जिससे अभिभावकों और स्कूल प्रशासनों में भारी नाराजगी है।
सीबीएसई ने क्यों लिया यह फैसला?
सीबीएसई ने अपने इस बीच-बचाव वाले फैसले के पीछे तर्क दिया है कि यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन (NCF-SE) 2023 के तहत उठाया गया है। बोर्ड का कहना है कि एनसीईआरटी (NCERT) द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए जारी किए गए कक्षा 9वीं के नए सिलेबस में तीन भाषाओं के अध्ययन का प्रावधान शामिल है। इसलिए, सीबीएसई को अपने कोर्स को एनसीईआरटी के नए सिलेबस के साथ करने के लिए यह परिवर्तन अपनाना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट अब दो हफ्ते बाद इस मामले पर अगली सुनवाई करेगा, जिस पर देश भर के लाखों छात्रों और स्कूलों की नजरें टिकी हुई हैं।
लेखक के बारे में
Prachiशॉर्ट बायो: प्राची लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। पिछले 2 वर्षों से वे करियर, शिक्षा और सरकारी नौकरियों से जुड़े विषयों पर लिख रही हैं। मुश्किल खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी विशेषता है। वे 2024 से लाइव हिन्दुस्तान की करियर टीम का हिस्सा हैं।
अनुभव और करियर का सफर
प्राची ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 'नन्ही खबर' से की थी, जहां उन्होंने जमीनी स्तर पर खबरों के महत्व को समझा। इसके बाद, उन्होंने 'सी.वाई. फ्यूचर लिमिटेड' और 'कुटुंब' जैसे प्लेटफॉर्म्स पर बतौर कंटेंट राइटर काम करते हुए अपनी लेखनी और रिसर्च स्किल्स को निखारा। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने के बाद, वे करियर डेस्क पर सक्रिय हैं और छात्रों के लिए करियर विकल्पों, बोर्ड परीक्षाओं, जॉब और प्रतियोगी परीक्षाओं की बारीकियों को कवर कर रही हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
प्राची ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से इंग्लिश जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा किया है। उनकी शैक्षणिक नींव दिल्ली यूनिवर्सिटी से है, जहां से उन्होंने इतिहास में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। इतिहास की अच्छी जानकारी होने के कारण, वे आज की खबरों को बेहतर तरीके से समझ और समझा पाती हैं। यही वजह है कि उनके लेखों में जानकारी पूरी तरह सटीक और अधिक भरोसेमंद होती है।
विजन
प्राची का मानना है कि करियर चुनना केवल एक नौकरी पाना नहीं, बल्कि सही दिशा में अपना भविष्य सुरक्षित करना है। उनका उद्देश्य है कि हर छात्र और अभ्यर्थी तक बिना किसी भ्रम के, सटीक और सही समय पर जानकारी पहुंचे। वे पारदर्शिता और विश्वसनीयता को डिजिटल पत्रकारिता की सबसे बड़ी ताकत मानती हैं।
रुचियां
इतिहास की समझ और पत्रकारिता के जुनून के साथ, प्राची को खाली समय में उपन्यास पढ़ना और विश्व सिनेमा देखना पसंद है, जो उनके लेखन में एक नया दृष्टिकोण जोड़ता है।
विशेषज्ञता
बोर्ड परीक्षा अपडेट्स और रिजल्ट एनालिसिस
करियर काउंसलिंग और नए जमाने के कोर्सेज
सरकारी और प्राइवेट सेक्टर में जॉब अपडेट
एडमिशन प्रक्रिया और कॉम्पिटिटिव एग्जाम गाइडेंस
छात्रों के लिए सॉफ्ट स्किल्स और मोटिवेशनल स्टोरीज
छात्रों के लिए JEE, NEET, UPSC जैसी परीक्षा की तैयारी के लिए टिप्स


