दिन-रात एक करना पड़े तो करिए; इम्प्रूवमेंट रिजल्ट को लेकर CBSE पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, नोटिस जारी
सऊदी अरब में सीबीएसई 12वीं इम्प्रूवमेंट परीक्षा का रिजल्ट जारी न होने पर छात्र सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अदालत ने सीबीएसई को नोटिस जारी कर जल्द समाधान निकालने को कहा।

सऊदी अरब में रहने वाले एक भारतीय छात्र का सीबीएसई 12वीं इम्प्रूवमेंट परीक्षा का परिणाम जारी नहीं होने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। छात्र का कहना है कि रिजल्ट न आने की वजह से उसके कॉलेज दाखिले और आगे की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ रहा है। थक-हारकर छात्र को इंसाफ के लिए देश की अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस गंभीर मामले पर सुनवाई करते हुए सीबीएसई के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने बोर्ड और उसके क्षेत्रीय अधिकारी को नोटिस जारी करते हुए बेहद तल्ख लहजे में कहा कि यह एक बच्चे के करियर का सवाल है, वह हर जगह एडमिशन लेने से चूक जाएगा। मामला चाहे जो भी हो, आप रात-दिन एक कीजिए और इस पर तुरंत जवाब दीजिए।
यह पूरी कहानी प्रांशु जिगरकुमार पटेल नाम के एक छात्र की है। प्रांशु ने सऊदी अरब के अल जुबैल शहर से एक प्राइवेट कैंडिडेट के तौर पर सीबीएसई की कक्षा 12वीं की इम्प्रूवमेंट परीक्षा 2026 दी थी। उसने फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथमेटिक्स, इंग्लिश और कंप्यूटर साइंस जैसे मुख्य विषयों में अपने नंबर सुधारने के लिए यह एग्जाम दिया था। प्रांशु का कहना है कि उसने अपनी तरफ से परीक्षा की पूरी तैयारी की और पेपर भी अच्छे दिए लेकिन जब नतीजे आने की बारी आई तो सीबीएसई ने उसका रिजल्ट ही घोषित नहीं किया।
रिजल्ट न आने की वजह से प्रांशु के सामने आगे की पढ़ाई का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। देश-विदेश के कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में एडमिशन की प्रक्रिया तेजी से चल रही है और बिना मार्कशीट या रिजल्ट के उसे कहीं भी दाखिला नहीं मिल पा रहा है। याचिका में साफ तौर पर कहा गया है कि सीबीएसई के इस ढुलमुल रवैये ने छात्र के उच्च शिक्षा के अवसरों को पूरी तरह खतरे में डाल दिया है और उससे आगे बढ़ने के मौके छीन लिए हैं।
मिडिल ईस्ट के तनाव ने बिगाड़ा खेल
दरअसल, यह पूरा मामला सिर्फ एक छात्र की लापरवाही का नहीं है, बल्कि इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय हालात जिम्मेदार हैं। साल 2026 में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य और कूटनीतिक तनाव के कारण मिडिल ईस्ट के हालात काफी बिगड़ गए थे। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सीबीएसई ने सात खाड़ी देशों जैसे कि बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में होने वाली कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया था। परीक्षाएं रद्द होने के बाद सीबीएसई ने उन छात्रों के लिए एक विशेष असेसमेंट स्कीम तैयार की थी, ताकि प्रभावित बच्चों का साल खराब न हो। प्रांशु की याचिका के मुताबिक, इस असेसमेंट स्कीम के दायरे में आने के बावजूद बोर्ड ने उसका रिजल्ट लटका कर रख दिया।
प्रांशु ने अदालत को बताया कि उसने अपना रिजल्ट पाने के लिए सीबीएसई के चक्कर काटने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उसने 17 मई, 21 मई और फिर 30 मई को सीबीएसई को लगातार ईमेल भेजे और लिखित रूप में अपनी शिकायतें दर्ज कराईं। उसने बोर्ड से बार-बार गुहार लगाई कि उसका रिजल्ट जल्द से जल्द जारी किया जाए ताकि वह समय रहते कॉलेज में एडमिशन ले सके। लेकिन सीबीएसई की तरफ से इन तमाम कोशिशों पर कोई जवाब नहीं दिया गया। इसी खामोशी से परेशान होकर आखिरकार प्रांशु को सुप्रीम कोर्ट की शरण लेनी पड़ी।
अदालत ने दिखाई सख्ती
सोमवार को जब जस्टिस मनमोहन और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच के सामने यह मामला आया तो कोर्ट ने स्थिति की गंभीरता को तुरंत समझा। जजों ने कहा कि शिक्षा और करियर के मामलों में समय सबसे कीमती होता है। अगर एडमिशन की आखिरी तारीखें निकल गईं, तो बच्चे का पूरा साल बर्बाद हो जाएगा, जिसकी भरपाई कोई नहीं कर सकता। बेंच ने सीबीएसई के वकील को साफ निर्देश दिया कि वे इस पूरे मामले पर तुरंत बोर्ड से निर्देश हासिल करें और अगली कार्रवाई सुनिश्चित करें।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव


