रोज सिरदर्द, हर दिन पेनकिलर… स्टेट बैंक में असिस्टेंट मैनेजर की नौकरी छोड़ करतीं हैं ये काम
एसबीआई असिस्टेंट मैनेजर स्निग्धा बोस ने मानसिक थकान की वजह से नौकरी छोड़ी और मेरठ में अपना योगा स्टूडियो खोलकर नई शुरुआत की।

सरकारी नौकरी को भारत में आज भी सबसे भरोसेमंद और स्थिर करियर माना जाता है। मोटी सैलरी, जॉब सिक्योरिटी और समाज में इज्जत ये सब कुछ एक साथ मिलना किसी सपने से कम नहीं लगता। लेकिन मेरठ की रहने वाली स्निग्धा बोस ने इसी सपने को पीछे छोड़कर अपनी सेहत को चुना और अब उनकी कहानी सोशल मीडिया पर छाई हुई है। स्निग्धा भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर काम करती थीं। यह वही नौकरी है जिसके बारे में अक्सर कहा जाता है कि इसे कभी मत छोड़ना। लेकिन उन्होंने ठीक इसके उलट फैसला लिया और इस्तीफा देकर अपना खुद का योगा स्टूडियो शुरू कर दिया।
स्निग्धा ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर करते हुए बताया कि लोगों ने उन्हें बार-बार समझाया था कि इतनी अच्छी नौकरी छोड़ना समझदारी नहीं है। उन्होंने लिखा, "मेरे पास स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में एक स्थिर नौकरी थी। एक सुरक्षित करियर। असिस्टेंट मैनेजर के तौर पर एक अच्छी सैलरी। वही नौकरी जिसे छोड़ने से लोग अक्सर मना करते हैं।" लेकिन बाहर से जो जिंदगी परफेक्ट दिखती थी, अंदर से वैसी बिल्कुल नहीं थी। वीडियो में उन्होंने साफ शब्दों में कहा, "मैं एसबीआई की नौकरी छोड़कर अब अपना खुद का योगा स्टूडियो चला रही हूं।"
हर दिन सिरदर्द लेना पड़ता था पेनकिलर
स्निग्धा ने बताया कि नौकरी के दौरान उन पर लगातार एक अजीब सा दबाव बना रहता था। उन्होंने कहा, "मुझे बहुत ज्यादा प्रेशर महसूस होता था, रोज सिरदर्द रहता था, मैं हर दिन पेनकिलर लेती थी, और मुझे वो जिंदगी बिल्कुल पसंद नहीं थी। मुझे पता था कि मुझे अपने अंदर कुछ बदलना होगा, और यही वजह थी कि मैंने अपने लिए यह बड़ा कदम उठाया।"
अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट के कैप्शन में उन्होंने आगे लिखा कि धीरे-धीरे उन्होंने लंबे समय तक बैठे रहना, लगातार तनाव, मानसिक थकान और अपने शरीर से जुड़ने के लिए बहुत कम समय मिलना इन सबको अपनी नॉर्मल लाइफ मान लिया था। मगर एक समय के बाद उन्हें एहसास हुआ कि बेहतर महसूस करने के लिए उन्हें कुछ ठोस बदलाव करना ही होगा।
हर किसी को नौकरी छोड़ने की सलाह नहीं
सबसे दिलचस्प बात यह है कि स्निग्धा किसी को भी अंधाधुंध नौकरी छोड़ने की सलाह नहीं देतीं। उन्होंने साफ किया कि सेहत का ख्याल रखने के लिए जरूरी नहीं कि पूरी जिंदगी ही बदल दी जाए। उन्होंने कहा, "आप एक डिमांडिंग नौकरी करते हुए भी अपने शरीर का ख्याल रख सकते हैं। आप अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में ताकत, मूवमेंट और शांति को शामिल कर सकते हैं। बिना अपनी पूरी जिंदगी बदले भी आप बेहतर महसूस कर सकते हैं।" यानी उनका मकसद लोगों को नौकरी छोड़ने के लिए उकसाना नहीं, बल्कि यह याद दिलाना है कि शरीर और दिमाग की सेहत को नजरअंदाज करना कभी समझदारी नहीं होती, चाहे नौकरी कितनी भी अच्छी क्यों न हो।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
स्निग्धा का यह वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कुछ यूजर्स ने उनकी हिम्मत की जमकर तारीफ की और कहा कि सेहत से बढ़कर कुछ नहीं होता। वहीं कुछ लोगों ने यह भी लिखा कि हर किसी के पास इतना बड़ा कदम उठाने की आर्थिक सुरक्षा नहीं होती, इसलिए यह फैसला आसान नहीं है। बहरहाल, स्निग्धा बोस की कहानी एक बार फिर उस पुरानी बहस को हवा दे गई है, क्या स्थिर नौकरी की कीमत मानसिक सेहत से ज्यादा है? हर किसी के लिए इसका जवाब अलग हो सकता है, लेकिन स्निग्धा ने अपने लिए जो चुना, उसमें उन्हें अब सुकून जरूर मिल रहा है।


