UPSC के लिए छोड़ी TCS की जॉब, बार-बार हुईं फेल, फिर UPPSC में 6वीं रैंक हासिल कर बनीं डिप्टी कलेक्टर
लखनऊ के एक बेहद ही साधारण परिवार में जन्मीं सल्तनत परवीन ने अपनी जर्नी एक वीडियो के माध्यम से शेयर करती हैं। वो बताती हैं कि मां का मेरे और मेरे भाईयों की पढ़ाई में अहम योगदान रहा। उनके पिता जनरल स्टोर चलाते हैं, जबकि मां गृहिणी हैं।

अल्लामा इकबाल का एक मशहूर शेर है कि खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रजा क्या है। इस कहावत पर बिल्कुल ही सटीक बैठती है सल्तनत परवीन की कहानी, जिन्होंने UPPCS-2022 परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए टॉपर्स की लिस्ट में अपनी जगह बनाने में कामयाब रहीं। हालांकि सल्तनत परवीन के लिए यह सफर बिल्कुल आसान नहीं था। कई बार असफलातओं का सामना करना पड़ा। मगर, सिविल सर्विस का जुनून ही इतना सवार था कि उन्होंने बुरे से बुरे हालातों के सामने हार नहीं मानी। चलिए आज हम आपको उनकी सक्सेस स्टोरी के बारे में बताते हैं।
कौन हैं सल्तनत परवीन
लखनऊ के एक बेहद ही साधारण परिवार में जन्मीं सल्तनत परवीन ने अपनी जर्नी एक वीडियो के माध्यम से शेयर करती हैं। वो बताती हैं कि मां का मेरे और मेरे भाईयों की पढ़ाई में अहम योगदान रहा। उनके पिता जनरल स्टोर चलाते हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। वह अपने माता-पिता की इकलौती बेटी हैं। सल्तनत पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी थीं और खेलों में भी उनकी अच्छी रुचि थी। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई सलेमगढ़ से पूरी की। इंटरमीडिएट के बाद साल 2016 में उन्होंने लखनऊ की इंटीग्रल यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में बीटेक की डिग्री हासिल की।
बीटेक के बाद नौकरी
बीटेक की पढ़ाई के बाद उनका कैंपस सिलेक्शन हो जाता है और टीसीएस में नौकरी लग जाती है। हालांकि, इस दौरान उनका मन सिविल सेवा में जाने का हो रहा था और इसी वजह से उन्होंने कॉर्पोरेट की नौकरी छोड़ दी। साल 2021र में उन्होंने जामिया मिल्लिया इस्लामिया की रेजिडेंशियल कोचिंग एकेडमी (RCA) की सिविल सर्विसेज कोचिंग के लिए परीक्षा पास की।
भाई का निधन
सिविल सेवा की तैयारी के दौरान सल्तनत पर दुखों का पहाड़ तब टूट पड़ा, जब उनका छोटा भाई अचानक गंभीर रूप से बीमार हो गया। थोड़े दिनों बाद ही उसका निधन हो गया। इस घटना के बाद जैसे-तैसे उन्होंने खुद को संभाला और कहा कि उन्हें जिम्मेदारी के तौर पर भाई की जगह लेनी है। मां के अटूट भरोसे ने सल्तनत को फिर से खड़ा किया और उन्होंने भाई की कमी को पूरा करने के लिए लक्ष्य तय कर लिया।
कई बार हुईं फेल
सिविल सेवा की तैयारी के दौरान उन्होंने यूपीएससी और यूपीपीएससी की परीक्षाएं दीं, लेकिन कई बार उन्हें असफलताओं का सामना करना पड़ा। यहां तक वो कई बार प्रीलिम्स परीक्षा में फेल हुईं। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और आगे बढ़ती रहीं। हमेशा नई रणनीति और कठिन दिनों को याद करके लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाती थीं और पूरी ऊर्जा पढ़ाई में लगा देती थीं।
सोशल मीडिया से बनाई दूरी
सल्तनत का मानना है कि सिविल सर्विसेज की तैयारी के लिए खुद को पूरी तरह कमरे में बंद करने या सामाजिक जीवन छोड़ने की जरूरत नहीं है। जरूरी यह है कि पढ़ाई आपका मुख्य फोकस बनी रहे और सोशल मीडिया के इस्तेमाल को सीमित रखा जाए।
6वीं रैंक लाकर बनीं डिप्टी कलेक्टर
आखिरकार उनकी मेहनतर रंग लाई। 7 अप्रैल 2023 का दिन उनके और उनके परिवार के लिए खुशियां लाया। UPPSC 2022 के रिजल्ट में सल्तनत ने रैंक-6 लाकर डिप्टी कलेक्टर का पद हासिल किया। यह उनका चौथा प्रयास था। उनकी सफलता सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि उनके पूरे परिवार के कई साल के संघर्ष का परिणाम थी। सल्तनत साल 2016 तक राष्ट्रीय स्तर की वॉलीबॉल खिलाड़ी थीं।


