
Safla Ekadashi Paran 2025 : सफला एकादशी का पारण कब करें, जानें व्रत तोड़ने का सही समय
Safla Ekadashi Paran 2025 : सफला एकादशी का व्रत बहुत फलदायी होता है। इसके पारण का भी विशेष महत्व है, इसलिए इसे बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। सफला एकादशी पारण 16 दिसंबर को सुबह 07:07 से 09:11 बजे के बीच करना उचित है।
Safla Ekadashi Paran 2025 : इस साल के दिसंबर का महीना हिन्दू पंचांग में विशेष महत्व रखने वाला है, खासकर उन लोगों के लिए जो हर मास की एकादशी पर भगवान विष्णु का व्रत रखते हैं। इसी कड़ी में सफला एकादशी अत्यंत पुण्यदायिनी मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार इस एकादशी का फल कई गुना अधिक मिलता है और इसका पारण, यानी व्रत खोलने का समय सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण माना गया है। इस बार सफला एकादशी सोमवार, 15 दिसंबर 2025 को पड़ेगी और इसका पारण अगले दिन विशिष्ट मुहूर्त में ही किया जाएगा।
Safla Ekadashi Paran 2025 : कब करें सफला एकादशी का पारण?
सफला एकादशी व्रत का पारण 16 दिसंबर 2025 को किया जाएगा। ज्योतिष के अनुसार, पारण का शुभ समय सुबह 07:07 बजे से सुबह 09:11 तक है। द्वादशी समाप्ति का समय रात 11:57 को निर्धारित है। द्वादशी समाप्त होने से पहले पारण कर लेना आवश्यक है। यही कारण है कि सुबह का समय सर्वोत्तम माना गया है।
Safla Ekadashi Paran 2025 : एकादशी तिथि कब शुरू और कब समाप्त?
सफला एकादशी की तिथि 14 दिसंबर 2025 को संध्या 06:49 से प्रारंभ होकर 15 दिसंबर 2025 को रात 09:19 पर समाप्त होगी। इसी आधार पर 15 दिसंबर को पूरे दिन व्रत रखा जाएगा। नियमों के अनुसार व्रत का पारण अगले दिन, यानी 16 दिसंबर की सुबह किया जाता है। शास्त्रों में यही माना गया है कि एकादशी समाप्त होने के बाद द्वादशी की अवधि में, सूर्योदय के पश्चात, व्रत खोलना सर्वोत्तम रहता है।
Safla Ekadashi Paran 2025 : पारण में हरि वासर का विशेष ध्यान
पारण का समय तय करते समय हरि वासर का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है। हरि वासर द्वादशी का पहला एक-चौथाई भाग होता है और इस अवधि में व्रत तोड़ना वर्जित माना गया है। व्रत तोड़ने का उचित समय हमेशा सूर्योदय के बाद का प्रातःकाल होता है। यदि किसी कारणवश यह संभव न हो पाए, तो पारण मध्याह्न के बाद किया जा सकता है, परंतु द्वादशी समाप्त होने से पहले ही। इससे व्रत का फल पूर्ण रूप से प्राप्त होता है।
Safla Ekadashi Paran 2025 : सफला एकादशी पर लगाएं श्रीहरि का प्रिय भोग
सफला एकादशी पर भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए कई प्रकार के सात्विक भोग लगाए जाते हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि इस दिन पंचामृत, पंजीरी, गुड़-चना, पीली बर्फी और बेसन के लड्डू विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं। सुबह पूजा के समय पंचामृत का भोग लगाने से प्रभु प्रसन्न होते हैं, जबकि धनिया और सूखे मेवों से बनी पंजीरी जीवन में धन-संपन्नता बढ़ाने वाली मानी जाती है। शाम के समय गुड़ और चने का भोग विवाह में देरी, कर्ज और तनाव जैसी समस्याओं को दूर करने वाला माना जाता है। इसके अलावा, पीली बर्फी अति प्रिय भोग माना गया है, जो साधक की मनोकामनाएं पूर्ण करता है। वहीं बेसन के लड्डू का भोग कुंडली में गुरु को मजबूत कर संतान सुख प्रदान करने वाला बताया गया है।
Safla Ekadashi Paran 2025 : सफला एकादशी की पौराणिक कथा
सफला एकादशी से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा राजा महिष्मान और उनके पापी पुत्र लुम्पक की है। कथा के अनुसार लुम्पक अत्यंत अधर्मी और पापी था, लेकिन एकादशी के व्रत और भगवान विष्णु की कृपा से उसका जीवन पूरी तरह बदल गया। उसे न केवल पापों से मुक्ति मिली बल्कि प्रभु का स्नेह और आश्रय भी प्राप्त हुआ। यही कारण है कि सफला एकादशी आज भी बेहद पुण्यदायिनी मानी जाती है और इसकी कथा व्रत की महत्ता समझाने के लिए सुनाई जाती है।





