तीन बार प्रीलिम्स में फेल, इंटरव्यू से पहले मां का निधन; चौथे प्रयास में UPSC में हासिल की AIR 26

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बागपत की रूपल राणा ने तीन बार प्रीलिम्स में असफल होने के बाद चौथे प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2023 में ऑल इंडिया रैंक 26 हासिल की। जानिए उनकी तैयारी, रणनीति, संघर्ष और सफलता की प्रेरणादायक कहानी।

तीन बार प्रीलिम्स में फेल, इंटरव्यू से पहले मां का निधन; चौथे प्रयास में UPSC में हासिल की AIR 26

Rupal Rana UPSC Success Story : देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिनी जाने वाली यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल करना लाखों युवाओं का सपना होता है। लेकिन इस मंजिल तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं होता। कई बार असफलताएं रास्ता रोकती हैं, कई बार हालात हिम्मत तोड़ने की कोशिश करते हैं। उत्तर प्रदेश के बागपत की रहने वाली रूपल राणा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जो बताती है कि अगर इरादा मजबूत हो तो लगातार मिलने वाली नाकामियां भी सफलता का रास्ता बन सकती हैं। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2023 में ऑल इंडिया रैंक 26 हासिल करने वाली रूपल राणा ने यह मुकाम अपने चौथे प्रयास में हासिल किया। उनकी यह सफलता केवल एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं, बल्कि सीखने, खुद को बदलने और हर असफलता से आगे बढ़ने की मिसाल है।

बागपत से दिल्ली तक का सफर

रूपल राणा की शुरुआती पढ़ाई बागपत में हुई। दसवीं तक की शिक्षा वहीं पूरी करने के बाद वह राजस्थान के पिलानी चली गईं, जहां उन्होंने 11वीं और 12वीं की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से गणित विषय में स्नातक की पढ़ाई की। कॉलेज के दूसरे वर्ष में पहली बार उन्हें यूपीएससी परीक्षा के बारे में विस्तार से जानकारी मिली। उसी समय उन्होंने तय कर लिया कि वह सिविल सेवा में जाना चाहती हैं। गणित और विज्ञान की छात्रा होने के कारण उनके लिए इतिहास, राजनीति और समसामयिक घटनाओं जैसे विषय बिल्कुल नए थे, लेकिन उन्होंने इस चुनौती को स्वीकार किया।

तीन असफल प्रयासों ने सिखाए बड़े सबक

रूपल के पहले तीन प्रयास प्रीलिम्स चरण में ही समाप्त हो गए। हालांकि उन्होंने इन असफलताओं को हार नहीं माना बल्कि सीखने का अवसर बनाया। पहले प्रयास के बारे में वह खुद मानती हैं कि उनकी तैयारी पूरी नहीं थी। उन्होंने परीक्षा को केवल अनुभव लेने के लिए दिया था। दूसरे और तीसरे प्रयास में उन्होंने काफी पढ़ाई की, लेकिन परीक्षा हॉल में एक बड़ी गलती कर बैठीं। नकारात्मक अंकन के डर से उन्होंने बहुत कम प्रश्नों के उत्तर दिए। दूसरे प्रयास में उन्होंने केवल 71 और तीसरे प्रयास में 78 प्रश्न हल किए। बाद में उन्हें महसूस हुआ कि यही रणनीति उनकी सबसे बड़ी कमजोरी बन गई थी।

रणनीति बदली और किस्मत भी बदल गई

तीसरे प्रयास के बाद रूपल ने अपनी पूरी तैयारी का गहराई से विश्लेषण किया। उन्होंने पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का अध्ययन शुरू किया और समझने की कोशिश की कि यूपीएससी सवाल किस तरह पूछता है। इसके साथ ही उन्होंने मॉक टेस्ट में अधिक प्रश्न हल करने की आदत डाली। धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास बढ़ने लगा और अंक भी बेहतर आने लगे। चौथे प्रयास में उन्होंने प्रीलिम्स में 94 प्रश्नों के उत्तर दिए। परिणाम यह रहा कि उन्होंने कटऑफ से 23 अंक अधिक प्राप्त किए और आराम से अगले चरण में पहुंच गईं।

सफलता की असली कुंजी बनी सीमित स्रोतों की तैयारी

आज जब ज्यादातर अभ्यर्थी नई-नई किताबों और सामग्री के पीछे भागते हैं, रूपल का मानना है कि सफलता का रास्ता सीमित और भरोसेमंद स्रोतों से होकर गुजरता है। उनके अनुसार एक किताब को कई बार पढ़ना, कई किताबों को एक बार पढ़ने से कहीं ज्यादा उपयोगी है। बार-बार दोहराव करने से विषय दिमाग में बैठ जाता है और परीक्षा के समय याद भी रहता है। रूपल का कहना है कि तैयारी के दौरान सामग्री बढ़ाने से ज्यादा जरूरी है पहले से पढ़ी गई चीजों को मजबूत करना।

मुख्य परीक्षा के लिए अलग तैयारी

मुख्य परीक्षा के लिए उन्होंने विषयवार नोट्स तैयार किए। हर विषय में समस्या, कारण और समाधान के आधार पर सामग्री तैयार की। समसामयिक घटनाओं के उदाहरणों को अपने उत्तरों में शामिल किया ताकि जवाब ज्यादा प्रभावी बन सकें। नैतिकता के प्रश्नपत्र के लिए उन्होंने विभिन्न स्रोतों के नोट्स का सहारा लिया और रामायण, महाभारत तथा महात्मा गांधी के विचारों से उदाहरण लेकर अपने उत्तरों को समृद्ध बनाया।

गणित छोड़कर चुना राजनीति विज्ञान

गणित की छात्रा होने के बावजूद रूपल ने वैकल्पिक विषय के रूप में राजनीति विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय संबंध को चुना। उनका मानना था कि गणित में गहरी विशेषज्ञता की जरूरत होती है, जबकि राजनीति विज्ञान सामान्य अध्ययन के कई हिस्सों में भी मदद करता है। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को समझने के लिए नियमित रूप से समाचार पत्र पढ़े और विदेश नीति से जुड़े विषयों पर विशेष ध्यान दिया।

मां को खोने का दुख, फिर भी नहीं टूटा हौसला

रूपल की यात्रा का सबसे भावुक अध्याय उनकी मां से जुड़ा है। साक्षात्कार से केवल दो महीने पहले उनकी मां का अचानक निधन हो गया। यह उनके जीवन का सबसे कठिन समय था। इस गहरे दुख ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्हें अपनी मां का भरोसा और अपना सपना याद था। इसी ने उन्हें फिर से खड़ा होने की ताकत दी। उन्होंने पूरी लगन के साथ साक्षात्कार की तैयारी की और कई मॉक इंटरव्यू में हिस्सा लिया। अनुभवी अधिकारियों से बातचीत करके अपनी प्रस्तुति को बेहतर बनाया।

साक्षात्कार में ईमानदारी बनी सबसे बड़ी ताकत

रूपल का मानना है कि साक्षात्कार में सबसे जरूरी चीज ईमानदारी होती है। उन्होंने अपने विस्तृत आवेदन पत्र से जुड़े हर पहलू की गंभीर तैयारी की। साक्षात्कार के दौरान उनसे राजनीति विज्ञान, गणित, कॉलेज और अन्य कई विषयों पर सवाल पूछे गए। उन्होंने पूरे आत्मविश्वास और स्पष्टता के साथ जवाब दिए। इसका परिणाम यह हुआ कि उन्हें साक्षात्कार में 201 अंक प्राप्त हुए, जो उनकी अंतिम सफलता में बेहद महत्वपूर्ण साबित हुए।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव

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