पढ़ाने का ऐसा जुनून कि दुनिया ने किया सलाम; कौन हैं रूबल नागी, मिला 1 मिलियन डॉलर का ग्लोबल टीचर प्राइज

Feb 08, 2026 05:18 pm ISTHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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झुग्गी की दीवारों को क्लासरूम बनाने वाली शिक्षिका रूबल नागी ने GEMS Education Global Teacher Prize जीतकर भारत का नाम रोशन किया। जानिए उनकी कहानी और समाजसेवा का सफर। 

पढ़ाने का ऐसा जुनून कि दुनिया ने किया सलाम; कौन हैं रूबल नागी, मिला 1 मिलियन डॉलर का ग्लोबल टीचर प्राइज

जिस देश में अब भी लाखों बच्चे स्कूल की चौखट तक नहीं पहुंच पाते, वहीं एक शिक्षिका ने गलियों, झुग्गियों और दीवारों को ही क्लासरूम बना दिया। उसी मेहनत और सोच का नतीजा है कि रूबल नागी आज पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन कर रही हैं। शिक्षा के क्षेत्र में बेहतरीन योगदान के लिए उन्हें 5 फरवरी को GEMS Education Global Teacher Prize से सम्मानित किया गया है। इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के साथ उन्हें करीब 1 मिलियन डॉलर (लगभग 8 करोड़ रुपये) की इनामी राशि भी मिली है। दुबई में हुए इस समारोह में हजारों नामांकनों के बीच रूबल नागी को सर्वश्रेष्ठ शिक्षिका चुना गया।

कौन हैं रूबल नागी

रूबल नागी सिर्फ एक टीचर नहीं, बल्कि एक आर्टिस्ट और समाजसेवी भी हैं। उन्होंने Rouble Nagi Art Foundation की स्थापना कर उत्तर प्रदेश के झुग्गी-झोपड़ी इलाकों में रहने वाले बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने का बीड़ा उठाया। उनका मानना है कि अगर बच्चा स्कूल नहीं आ सकता, तो स्कूल बच्चे तक पहुँचना चाहिए।

दीवारें बनीं क्लासरूम

रूबल नागी ने पढ़ाई से दूर रह रहे बच्चों के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने झुग्गियों और बस्तियों की दीवारों पर अक्षरमाला, गणित, विज्ञान और इतिहास को चित्रों के ज़रिये उकेरा। बच्चे खेल-खेल में सीखें, इसी सोच के साथ दीवारों को पढ़ाई का जरिया बना दिया। इस पहल से न सिर्फ बच्चों की सीखने में दिलचस्पी बढ़ी, बल्कि हजारों बच्चे दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़े।

अब तक 800 से ज्यादा लर्निंग सेंटर

रूबल नागी अब तक देशभर में 800 से ज्यादा लर्निंग सेंटर शुरू कर चुकी हैं। इन केंद्रों में गरीब और पिछड़े वर्ग के बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जाती है। उनका साफ कहना है कि शिक्षा कोई सुविधा नहीं, बल्कि हर बच्चे का हक है। उनकी इस कोशिश से कई बच्चों की ज़िंदगी बदली है। जो बच्चे कभी स्कूल का नाम सुनकर भी डरते थे, आज वही बच्चे आत्मविश्वास के साथ पढ़ाई कर रहे हैं और अपने भविष्य के सपने देखने लगे हैं।

सोशल मीडिया पर भी जताई खुशी

ग्लोबल टीचर प्राइज़ मिलने के बाद रूबल नागी की खुशी सोशल मीडिया पर भी देखने को मिली। इस उपलब्धि को उन्होंने सिर्फ अपनी नहीं, बल्कि उन तमाम बच्चों और शिक्षकों की जीत बताया, जो सीमित संसाधनों में भी शिक्षा की अलख जगा रहे हैं।

हर शिक्षक के लिए प्रेरणा

रूबल नागी की कहानी बताती है कि एक इंसान की सोच और मेहनत समाज में बड़ा बदलाव ला सकती है। कला के जरिये शिक्षा को लोगों तक पहुंचाने का उनका तरीका ही उन्हें दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षक पुरस्कार तक ले गया। उनकी यह उपलब्धि सिर्फ एक सम्मान नहीं, बल्कि इस बात का सबूत है कि अगर इरादा मजबूत हो, तो झुग्गी की दीवारें भी बच्चों के सपनों की नींव बन सकती हैं।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव

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