पढ़ाने का ऐसा जुनून कि दुनिया ने किया सलाम; कौन हैं रूबल नागी, मिला 1 मिलियन डॉलर का ग्लोबल टीचर प्राइज
झुग्गी की दीवारों को क्लासरूम बनाने वाली शिक्षिका रूबल नागी ने GEMS Education Global Teacher Prize जीतकर भारत का नाम रोशन किया। जानिए उनकी कहानी और समाजसेवा का सफर।

जिस देश में अब भी लाखों बच्चे स्कूल की चौखट तक नहीं पहुंच पाते, वहीं एक शिक्षिका ने गलियों, झुग्गियों और दीवारों को ही क्लासरूम बना दिया। उसी मेहनत और सोच का नतीजा है कि रूबल नागी आज पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन कर रही हैं। शिक्षा के क्षेत्र में बेहतरीन योगदान के लिए उन्हें 5 फरवरी को GEMS Education Global Teacher Prize से सम्मानित किया गया है। इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के साथ उन्हें करीब 1 मिलियन डॉलर (लगभग 8 करोड़ रुपये) की इनामी राशि भी मिली है। दुबई में हुए इस समारोह में हजारों नामांकनों के बीच रूबल नागी को सर्वश्रेष्ठ शिक्षिका चुना गया।
कौन हैं रूबल नागी
रूबल नागी सिर्फ एक टीचर नहीं, बल्कि एक आर्टिस्ट और समाजसेवी भी हैं। उन्होंने Rouble Nagi Art Foundation की स्थापना कर उत्तर प्रदेश के झुग्गी-झोपड़ी इलाकों में रहने वाले बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने का बीड़ा उठाया। उनका मानना है कि अगर बच्चा स्कूल नहीं आ सकता, तो स्कूल बच्चे तक पहुँचना चाहिए।
दीवारें बनीं क्लासरूम
रूबल नागी ने पढ़ाई से दूर रह रहे बच्चों के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने झुग्गियों और बस्तियों की दीवारों पर अक्षरमाला, गणित, विज्ञान और इतिहास को चित्रों के ज़रिये उकेरा। बच्चे खेल-खेल में सीखें, इसी सोच के साथ दीवारों को पढ़ाई का जरिया बना दिया। इस पहल से न सिर्फ बच्चों की सीखने में दिलचस्पी बढ़ी, बल्कि हजारों बच्चे दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़े।
अब तक 800 से ज्यादा लर्निंग सेंटर
रूबल नागी अब तक देशभर में 800 से ज्यादा लर्निंग सेंटर शुरू कर चुकी हैं। इन केंद्रों में गरीब और पिछड़े वर्ग के बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जाती है। उनका साफ कहना है कि शिक्षा कोई सुविधा नहीं, बल्कि हर बच्चे का हक है। उनकी इस कोशिश से कई बच्चों की ज़िंदगी बदली है। जो बच्चे कभी स्कूल का नाम सुनकर भी डरते थे, आज वही बच्चे आत्मविश्वास के साथ पढ़ाई कर रहे हैं और अपने भविष्य के सपने देखने लगे हैं।
सोशल मीडिया पर भी जताई खुशी
ग्लोबल टीचर प्राइज़ मिलने के बाद रूबल नागी की खुशी सोशल मीडिया पर भी देखने को मिली। इस उपलब्धि को उन्होंने सिर्फ अपनी नहीं, बल्कि उन तमाम बच्चों और शिक्षकों की जीत बताया, जो सीमित संसाधनों में भी शिक्षा की अलख जगा रहे हैं।
हर शिक्षक के लिए प्रेरणा
रूबल नागी की कहानी बताती है कि एक इंसान की सोच और मेहनत समाज में बड़ा बदलाव ला सकती है। कला के जरिये शिक्षा को लोगों तक पहुंचाने का उनका तरीका ही उन्हें दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षक पुरस्कार तक ले गया। उनकी यह उपलब्धि सिर्फ एक सम्मान नहीं, बल्कि इस बात का सबूत है कि अगर इरादा मजबूत हो, तो झुग्गी की दीवारें भी बच्चों के सपनों की नींव बन सकती हैं।



