Viral Story: IIT में जानबूझकर फेल हुए ऋषभ; एग्जाम में दिए गलत जवाब, अब पहाड़ों में जी रहे हैं अपनी पसंद की जिंदगी
IIT Viral Story: आईआईटी में दाखिला पाना जहां हर छात्र का सपना होता है, वहीं ऋषभ खनेजा ने अपने पैशन के लिए जानबूझकर इस परीक्षा को फेल कर दिया। आज उनकी स्टोरी बहुत वायरल हो रही है।

Rishabh Khaneja deliberate IIT failure: भारत में जहां हर साल लाखों छात्र आईआईटी (IIT) में दाखिला पाने का सपना देखते हैं और दिन-रात मेहनत करते हैं, वहीं एक ऐसा भी युवा था जिसने परीक्षा हॉल में बैठकर जानबूझकर गलत उत्तरों पर निशान लगाए ताकि वह JEE परीक्षा में फेल हो सके। यह कहानी है ऋषभ खनेजा की, जिन्होंने हाल ही में लिंक्डइन (LinkedIn) पर अपनी इस अनोखी जीवन-यात्रा को शेयर किया है। उनकी यह कहानी आज के उन छात्रों के लिए एक बड़ा सबक है जो करियर के भारी स्ट्रेस से गुजर रहे हैं।
क्यों चुनी जानबूझकर IIT परीक्षा फेल होने की राह?
ऋषभ के मुताबिक, उनका यह कदम कोई बगावत नहीं बल्कि एक डर था। यह डर परीक्षा में फेल होने का नहीं, बल्कि एक ऐसी जिंदगी में सफल होने का था जो उनकी अपनी नहीं थी। बड़े बेटे होने के नाते उनके परिवार ने पहले ही उनका भविष्य तय कर दिया था—स्कूल में साइंस पढ़ना, फिर इंजीनियरिंग, उसके बाद एमबीए और अंत में एक बड़ी कॉर्पोरेट नौकरी।
फैमली फंक्शन में अक्सर उन लड़कों की तारीफ होती थी जिन्होंने आईआईटी क्रैक किया था या बड़े पैकेज वाली नौकरियां पाई थीं। लेकिन जब ऋषभ उन लोगों से मिले, तो उन्होंने महसूस किया कि सब कुछ हासिल करने के बाद भी वे लोग अंदर से खुश नहीं दिखते थे। उनके मन में एक सवाल बैठ गया कि यदि इस दौड़ की मंजिल खुशियां पाना है, तो वहां पहुंचने वाला हर इंसान उदास क्यों है? इसी सवाल ने उन्हें एक अलग रास्ता चुनने पर मजबूर किया।
आर्ट्स की पढ़ाई से लेकर समाज सेवा तक का सफर
जब लोगों को लगा कि ऋषभ ने IIT परीक्षा में फेल होकर अपना भविष्य बर्बाद कर लिया है, तब उन्होंने मुंबई के मीठीबाई कॉलेज से आर्ट्स (Arts) की पढ़ाई की। इसके बाद वे ‘टीच फॉर इंडिया’ संस्था से जुड़े और मानखुर्द के एक क्लासरूम में बच्चों को पढ़ाने लगे। वहां सौ से ज्यादा बच्चों ने जब उन्हें "ऋषभ भैया" कहना शुरू किया, तो उन्हें समझ आया कि जीवन का असली उद्देश्य किसी बड़े बोर्डरूम में नहीं, बल्कि हर दिन किसी के काम आने में है।
इसके बाद ऋषभ ने कॉर्पोरेट जगत में भी काम किया। वहां सैलरी अच्छी थी और लोग भी अच्छे थे, लेकिन हर रविवार की शाम उन्हें एक खालीपन महसूस होता था। आखिरकार, उन्होंने वह नौकरी भी छोड़ दी।
पहाड़ों की वादियों में खुद की तलाश
नौकरी छोड़ने के बाद ऋषभ ने अपनी रॉयल एनफील्ड बुलेट बाइक उठाई और तीन महीनों के लिए स्पीति, जांस्कर और लद्दाख की वादियों में निकल गए। पहाड़ों के रास्तों और आकाशगंगा के नीचे अपना जन्मदिन मनाते हुए उन्होंने दूसरों की उम्मीदों पर जीना छोड़ दिया और वह बने जो वे असल में थे।
आज ऋषभ हिमाचल प्रदेश के बीर में एक लेखक, फोटोग्राफर और कलाकार के रूप में रह रहे हैं और दूसरों को उनकी क्रिएटिविटी से जोड़ने में मदद कर रहे हैं। ऋषभ का मानना है कि उनके माता-पिता भी सिर्फ उनकी खुशी चाहते थे, बस मंजिल तक पहुंचने का रास्ता दोनों का अलग था। उनका यह अनुभव सिखाता है कि कभी-कभी सबसे कठिन फैसला सफलता और असफलता के बीच नहीं, बल्कि दुनिया की मंजूरी और खुद की खुशी के बीच चुनना होता है।
डिस्क्लेमर: इस कहानी में किए गए सभी दावे और विचार संबंधित व्यक्ति के निजी अनुभव हैं। 'लाइव हिंदुस्तान' वेबसाइट सोशल मीडिया पोस्ट पर किए गए इन दावों की पुष्टि नहीं करती है।
लेखक के बारे में
Prachiशॉर्ट बायो: प्राची लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। पिछले 2 वर्षों से वे करियर, शिक्षा और सरकारी नौकरियों से जुड़े विषयों पर लिख रही हैं। मुश्किल खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी विशेषता है। वे 2024 से लाइव हिन्दुस्तान की करियर टीम का हिस्सा हैं।
अनुभव और करियर का सफर
प्राची ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 'नन्ही खबर' से की थी, जहां उन्होंने जमीनी स्तर पर खबरों के महत्व को समझा। इसके बाद, उन्होंने 'सी.वाई. फ्यूचर लिमिटेड' और 'कुटुंब' जैसे प्लेटफॉर्म्स पर बतौर कंटेंट राइटर काम करते हुए अपनी लेखनी और रिसर्च स्किल्स को निखारा। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने के बाद, वे करियर डेस्क पर सक्रिय हैं और छात्रों के लिए करियर विकल्पों, बोर्ड परीक्षाओं, जॉब और प्रतियोगी परीक्षाओं की बारीकियों को कवर कर रही हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
प्राची ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से इंग्लिश जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा किया है। उनकी शैक्षणिक नींव दिल्ली यूनिवर्सिटी से है, जहां से उन्होंने इतिहास में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। इतिहास की अच्छी जानकारी होने के कारण, वे आज की खबरों को बेहतर तरीके से समझ और समझा पाती हैं। यही वजह है कि उनके लेखों में जानकारी पूरी तरह सटीक और अधिक भरोसेमंद होती है।
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रुचियां
इतिहास की समझ और पत्रकारिता के जुनून के साथ, प्राची को खाली समय में उपन्यास पढ़ना और विश्व सिनेमा देखना पसंद है, जो उनके लेखन में एक नया दृष्टिकोण जोड़ता है।
विशेषज्ञता
बोर्ड परीक्षा अपडेट्स और रिजल्ट एनालिसिस
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