Re-NEET UG Result 2026: 19 छात्रों ने हासिल किए 700 से अधिक अंक, 58 प्रतिशत लड़कियां हुईं सफल, देखें पूरा डेटा

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Re-NEET UG 2026 में 19 छात्रों ने हासिल किए 700 से अंक हासिल किए हैं। वहीं इस बार लड़कियों ने बाजी मारी है। इस बार 58% सफल उम्मीदवार बेटियां रहीं।

Re-NEET UG Result 2026: girls dominate success 19 students scores 700 above

Re-NEET UG Result 2026: राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने गुरुवार को NEET UG 2026 के नतीजे जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही एनटीए की तरफ से परीक्षा के मद्देनजर आंकड़ों को भी जारी किया है। आंकड़ों के मुताबिक, NEET UG 2026 के परिणामों में 19 छात्रों ने 700 से अधिक अंक हासिल किए हैं। वहीं इस बार भी लड़कियों का दबदबा साफ नजर आ रहा है। इस बार क्वालिफाई करने वाले कुल उम्मीदवारों में 58 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बेटियों का है। इस बार के नीट यूजी की परीक्षा की बात करें तो सफलता दर यानी 'सक्सेस रेट' में भी लड़कियां लड़कों से दो कदम आगे निकली हैं। परीक्षा में शामिल होने वाली लड़कियों की सफलता दर 56.8 प्रतिशत दर्ज की गई है, जबकि लड़कों के लिए यह आंकड़ा 55.1 प्रतिशत पर ही सिमट गया।

खूब रहा कम्पटीशन

इस साल NEET की परीक्षा का स्तर और अभ्यर्थियों की गंभीरता दोनों ही काफी चर्चा में रहे। लगभग 20 लाख छात्रों ने इस महाकुंभ में हिस्सा लिया था, जिनमें से 11.21 लाख अभ्यर्थियों ने मेडिकल, डेंटल, आयुष और अन्य संबद्ध पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अपनी योग्यता साबित की है। अगर बात टॉप स्कोरर्स की करें, तो इस बार प्रतिस्पर्धा का स्तर काफी ऊंचा रहा। 138 अभ्यर्थियों ने 690 से अधिक अंक हासिल कर एक कीर्तिमान स्थापित किया है। इन होनहारों में 93 प्रतिशत से अधिक ऐसे छात्र थे जो पहली बार इस कठिन परीक्षा में बैठे थे, और उनकी आयु 17 से 19 वर्ष के बीच थी। 19 छात्रों ने 700 से अधिक अंकों का जादुई आंकड़ा पार कर लिया। परीक्षा का सर्वोच्च स्कोर 715/720 रहा, जिसे पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पांशुल बंसल ने संयुक्त रूप से हासिल कर अपने परिवारों और राज्यों का नाम रोशन किया।

रिलीज के मुताबिक, देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से सफल उम्मीदवार सामने आए हैं। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य से 1.7 लाख से अधिक अभ्यर्थियों का क्वालिफाई करना अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड है। वहीं, भौगोलिक रूप से दूरस्थ लक्षद्वीप से भी 43 अभ्यर्थी सफल हुए हैं, जो यह साबित करता है कि संसाधनों के सीमित होने के बावजूद प्रतिभा किसी बंधन को नहीं मानती। देश के 17 राज्यों के टॉपर्स ने 700 या उससे अधिक अंक लाकर यह सिद्ध कर दिया है कि बेहतर शिक्षा का अवसर अब देश के हर कोने में पहुंच चुका है। इस साल परीक्षा का आयोजन 13 भाषाओं में किया गया था, जिनमें हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, तमिल, तेलुगु, मराठी, गुजराती, बंगाली, असमिया, ओड़िया, कन्नड़, मलयालम और पंजाबी शामिल थीं। भाषा की बाधा को खत्म कर NTA ने हर बच्चे को अपनी भाषा में अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका दिया।

काउंसलिंग में रहें सतर्क

परिणाम घोषित होने के साथ ही अब काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता भी साफ हो गया है। NTA ने तमाम सफल उम्मीदवारों और उनके अभिभावकों को आगाह किया है कि वे केवल आधिकारिक वेबसाइटों पर दी गई जानकारी पर ही भरोसा करें। आजकल सीट दिलाने के नाम पर ठगों और फर्जी गिरोहों का जाल सक्रिय हो जाता है, इसलिए किसी भी तरह के प्रलोभन या फर्जी कॉल से सावधान रहें।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव

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