कॉर्पोरेट की गुलामी छोड़ी, अब अपनी शर्तों पर जीता 33 साल का युवक; हर महीने कमाता है 1.8 लाख रुपये

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एक मार्केटिंग प्रोफेशनल ने कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ रिमोट वर्क के जरिए हर महीने 1.8 लाख रुपये कमाने की अपनी बेहद प्रेरणादायक और सच्ची कहानी सोशल मीडिया पर साझा की है।

reddit user quits corporate job earns nearly two lakh monthly remote work

आज के दौर में कॉर्पोरेट नौकरी की भागदौड़, अंतहीन काम के घंटे और हर वक्त के मानसिक दबाव से परेशान होकर लोग अक्सर कुछ अपना करने की सोचते हैं। लेकिन, भविष्य की चिंता और आर्थिक असुरक्षा के डर से ज्यादातर लोग कदम पीछे खींच लेते हैं। ऐसे में सोशल मीडिया पर एक 33 साल के मार्केटिंग प्रोफेशनल की कहानी तेजी से सुर्खियां बटोर रही है। इस शख्स ने बताया कि कैसे उसने दो साल पहले अपनी बंधी-बंधाई कॉर्पोरेट नौकरी को अलविदा कह दिया और आज वह घर बैठे, बिना किसी बॉस की चिकचिक के, हर महीने 1.8 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई कर रहा है। रेडिट पर अपनी आपबीती साझा करते हुए इस शख्स ने पोस्ट का शीर्षक दिया, "2 साल पहले अपनी फुल-टाइम नौकरी छोड़ दी। अब हर महीने 180k+ कमा रहा हूं और ईमानदारी से कहूं तो अपनी जिंदगी को खुलकर जी रहा हूं।" उसने अपनी इस कामयाबी को सिर्फ पैसों की जीत नहीं, बल्कि सुकून की जीत बताया है। उनका कहना है कि यह बदलाव किसी 'मनी फ्लेक्स' से कहीं ज्यादा 'लाइफ फ्लेक्स' यानी अपनी जिंदगी को अपनी शर्तों पर जीने की आजादी है।

जब 14-16 घंटे की गुलामी से आया तंग

वह बताते हैं कि इस साल के आखिर में वह 33 साल के हो जाएंगे। साल 2024 के मध्य में उन्होंने अपनी फुल-टाइम नौकरी छोड़ने का कड़ा फैसला लिया था। यह फैसला सालों तक दिन-रात गधों की तरह खटने के बाद आया था। उन्होंने लिखा, "एक दौर था जब मैं अपनी नौकरी में रोजाना 14 से 16 घंटे काम किया करता था। आज जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं, तो मुझे लगता है जैसे वह कोई पिछला जन्म था।"

उन्हें अपने काम और हुनर पर पूरा भरोसा था। उन्हें पूरा यकीन था कि अगर वह आजाद होकर अपनी मार्केटिंग सर्विसेज सीधे क्लाइंट्स को देंगे, तो न सिर्फ ज्यादा कमाएंगे बल्कि मानसिक शांति भी हासिल कर सकेंगे। इस मुश्किल सफर में उनके पिता ने उनका पूरा साथ दिया। उन्होंने बताया कि शुरुआत में उनके पिता ने उन्हें आर्थिक रूप से संभाला, जिससे उन्हें एक मजबूत सेफ्टी नेट मिला। उन्होंने लिखा, "जब मैंने नौकरी छोड़ी, तो मुझे पूरा भरोसा था कि मैं अपने दम पर बेहतर कर सकता हूं। पिछले साल मेरी बेटी का जन्म हुआ, तब तक मैं धीरे-धीरे अपने पैर जमा रहा था। मेरे पिता का शुक्रिया, जिन्होंने मेरा साथ दिया। अगर वह सहारा न होता, तो राह बहुत मुश्किल हो जाती।"

शुरुआती मुश्किलें और फिर रफ्तार

फ्रीलांसिंग की शुरुआत उतनी आसान नहीं थी जितनी दिखती है। पहले साल उन्हें सिर्फ दो क्लाइंट्स मिले और उन्हें अपने साथ जोड़े रखना एक बड़ी चुनौती थी। शुरुआत में क्लाइंट्स के साथ काफी तालमेल नहीं बैठ पा रहा था, लेकिन इस साल की शुरुआत से चीजें पूरी तरह पटरी पर आ गईं। पिछले छह महीनों से वह दो बड़े और लॉन्ग-टर्म क्लाइंट्स के साथ काम कर रहे हैं और हाल ही में उन्होंने एक नया क्लाइंट भी अपने साथ जोड़ा है।

'मैं अब सुबह 9 से शाम 5 के चक्रव्यूह में नहीं फंसा हूं'

वह साफ कहते हैं कि इस काम में मेहनत कम नहीं है, लेकिन जो आजादी मिली है, उसने जिंदगी का पूरा नजरिया ही बदल दिया है। घंटों लंबी स्ट्रैटेजी कॉल्स, मीटिंग्स और लैपटॉप के सामने वक्त बिताना अब भी उनकी दिनचर्या का हिस्सा है, लेकिन अब वह कॉर्पोरेट लाइफ की बंदिशों और थका देने वाले सफर से पूरी तरह आजाद हैं। अब वह अपनी मर्जी से दिन के वक्त आराम से राशन खरीदने जा सकते हैं, वर्किंग डेज में अपनी बेटी को समुद्र किनारे घुमाने ले जा सकते हैं और बारिश के मौसम में अपने गांव के घर से सुकून के साथ काम कर सकते हैं। वह कहते हैं, "बस, जिंदगी बढ़िया चल रही है।" आगे की योजना को लेकर वह बताते हैं कि वह अपने पार्टनर्स के साथ मिलकर अमेरिकी क्लाइंट्स को टारगेट कर रहे हैं। अगर यह योजना सही बैठी, तो उनकी कमाई 3 से 4 गुना तक बढ़ सकती है।

नए लोगों के लिए 3 बेहद जरूरी सबक

इस मुकाम तक पहुंचने के बाद उन्होंने उन लोगों के लिए तीन जरूरी सलाह दी हैं जो नौकरी छोड़ने का मन बना रहे हैं -

जल्दबाजी में कदम न उठाएं: बिना किसी मजबूत फाइनेंशियल बैकअप, पर्याप्त सेविंग्स या परिवार के सपोर्ट के कभी भी अपनी नौकरी छोड़ने की गलती न करें।

शुरुआत में ही बड़े क्लाइंट्स के पीछे न भागें: शुरुआती दिनों में बहुत ज्यादा पैसे देने वाले क्लाइंट्स के पीछे भागने के बजाय छोटे क्लाइंट्स के साथ काम करें। इससे आपको अपने सिस्टम को बेहतर बनाने और काम को स्केल करने का मौका मिलता है।

काम का तरीका तय रखें: अपने काम का एक पुख्ता और तय प्रोसेस तैयार रखें। क्लाइंट को हमेशा आपके काम के नतीजे दिखने चाहिए, जिससे उन्हें आपके काम की वैल्यू समझ आए।

सोशल मीडिया पर लोगों ने बांधे तारीफों के पुल

इस पोस्ट ने इंटरनेट पर बहुत से लोगों का दिल जीत लिया है और लोग उन्हें लगातार बधाई दे रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, "मैं इस बात से पूरी तरह सहमत हूं। जब आप बिना किसी 9-से-5 के दबाव के रिमोट वर्क करते हैं, तो जिंदगी वाकई खूबसूरत हो जाती है। बधाई हो दोस्त।" वहीं एक अन्य यूजर ने उनकी ईमानदारी की सराहना करते हुए कहा, "सबसे अच्छी बात यह लगी कि आपने सिर्फ आजादी के पीछे भागने के बजाय उसे धैर्य, कड़ी मेहनत और सीखने की इच्छा से हासिल किया। आपने जिस तरह अपने पिता के सपोर्ट को स्वीकार किया, वह काबिले तारीफ है। अक्सर लोग सिर्फ कामयाबी दिखाते हैं, उसके पीछे के संघर्ष और अपनों के सहारे को भूल जाते हैं।"

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव

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