RBSE 12वीं आर्ट्स 2026 रिजल्ट जारी, इस विषय ने बढ़ाई छात्रों की टेंशन; पास प्रतिशत सबसे कम
RBSE 12वीं आर्ट्स 2026 के विषयवार आंकड़ों में सामने आया कि किस विषय में सबसे कम पास प्रतिशत रहा। जानिए कौन सा सब्जेक्ट छात्रों के लिए सबसे कठिन साबित हुआ।

rbse 12th arts 2026 out: राजस्थान बोर्ड 12वीं का रिजल्ट जारी कर दिया गया है। इसके साथ ही तीनों स्ट्रीम- साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स् का रिजल्ट जारी किया गया है। रिजल्ट के साथ साथ आंकड़े भी जारी किए गए। रिजल्ट आते ही हर छात्र के मन में एक सवाल जरूर उठता है, आखिर इस बार सबसे कठिन विषय कौन सा रहा? राजस्थान बोर्ड 12वीं आर्ट्स 2026 के आंकड़ों ने इस सवाल का साफ जवाब दे दिया है। जहां लगभग हर विषय में छात्रों ने शानदार प्रदर्शन किया, वहीं कुछ सब्जेक्ट ऐसे भी रहे जिन्होंने छात्रों की राह थोड़ी मुश्किल बना दी। आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि इस बार असली चुनौती किन विषयों ने पेश की।
सबसे कठिन विषय बना फूड प्रोसेसिंग
अगर सबसे कम पास प्रतिशत की बात करें, तो फूड प्रोसेसिंग इस बार सबसे कठिन विषय साबित हुआ। इस विषय में केवल 84.77% छात्र ही पास हो सके, जो बाकी विषयों की तुलना में काफी कम है। यह साफ इशारा करता है कि इस पेपर ने छात्रों की तैयारी की असली परीक्षा ली।
साइकोलॉजी भी रही चुनौतीपूर्ण
फूड प्रोसेसिंग के बाद साइकोलॉजी दूसरा ऐसा विषय रहा, जहां पास प्रतिशत थोड़ा गिरा हुआ नजर आया। इस विषय में 91.81% छात्र पास हुए। हालांकि यह आंकड़ा खराब नहीं कहा जा सकता, लेकिन जब बाकी विषय 98-99% के आसपास हों, तो यह अंतर साफ दिखता है।
प्राइवेट छात्रों के लिए कुछ विषय बने मुश्किल
दिलचस्प बात यह भी है कि प्राइवेट कैटेगरी के छात्रों के लिए कई विषय ज्यादा कठिन साबित हुए। जैसे पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, इतिहास और पॉलिटिकल साइंस में प्राइवेट छात्रों का पास प्रतिशत 70% के आसपास या उससे नीचे रहा। इससे यह साफ होता है कि रेगुलर और प्राइवेट छात्रों के प्रदर्शन में बड़ा अंतर देखने को मिला।
बाकी विषयों में आसान रहा सफर
जहां कुछ विषयों ने चुनौती दी, वहीं ज्यादातर विषयों में छात्रों के लिए रास्ता काफी आसान रहा। हिंदी, अंग्रेजी, इकोनॉमिक्स, इतिहास और पॉलिटिकल साइंस जैसे विषयों में 99% के करीब पास प्रतिशत यह दिखाता है कि इन विषयों में छात्रों ने जबरदस्त पकड़ बनाई।
क्या कहते हैं ये आंकड़े
पूरे डेटा को देखें तो यह साफ है कि इस बार पेपर का स्तर पूरी तरह संतुलित रहा। कुछ विषयों ने छात्रों की असली तैयारी को परखा, जबकि बाकी विषयों में छात्रों ने शानदार प्रदर्शन कर दिखाया कि मेहनत और तैयारी दोनों मजबूत थीं।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
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- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव


