आंखों से नहीं देख सकते रवि राज, लेकिन UPSC में AIR 20 लाकर कैसे किया कमाल
बिहार के नवादा जिले के महुली गांव के दृष्टिबाधित रवि राज ने UPSC CSE 2025 में AIR 20 हासिल कर इतिहास रच दिया। किसान परिवार से आने वाले रवि की सफलता में उनकी मां का सबसे बड़ा योगदान रहा।

बिहार के नवादा जिले के छोटे से गांव महुली में रहने वाले रवि राज ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 ने ऑल इंडिया रैंक 20 हासिल किया है। मगर उनकी सफलता की कहानी सिर्फ एक रैंक की कहानी नहीं है। उनके यह संघर्ष, भरोसे, मां के त्याग और लगातार मेहनत की ऐसी मिसाल है जिसने लाखों युवाओं को नई उम्मीद दी है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि दृष्टिबाधित रवि राज ने जिन कठिनाइयों का सामना कर यूपीएससी में शानदार रैंक हासिल की है वह काबीले तारीफ है। क्योंकि एक आम अभ्यर्थी अपनी परीक्षा को अपनी मेहनत और लगन के साथ हासिल करता है, मगर रवि की सफलता में उनकी मां भी साथी रहीं।
क्लास 9 में शुरू हुआ था IAS बनने का सपना
रवि राज का सपना किसी बड़े शहर के कोचिंग संस्थान में नहीं पैदा हुआ था। यह सपना तब शुरू हुआ जब वह स्कूल में पढ़ते थे। क्लास 9 के दौरान उन्होंने अपने कुछ दोस्तों को IAS बनने की बात करते सुना। बाकी दोस्त आगे चलकर उस रास्ते पर नहीं गए, लेकिन रवि के मन में यह बात बैठ गई। धीरे-धीरे उन्होंने UPSC के बारे में समझना शुरू किया। फिर साल 2021 आते-आते उन्होंने पूरी तरह तय कर लिया कि अब उन्हें सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी ही करनी है। रवि बताते हैं कि शुरुआत में उन्हें भी लगता था कि टॉपर्स कोई अलग दुनिया के लोग होते हैं, लेकिन तैयारी के दौरान उन्हें समझ आया कि लगातार मेहनत करने वाला कोई भी इंसान वहां तक पहुंच सकता है।
मां ने किताबें पढ़ीं, बेटे ने सपनों को याद किया
UPSC की तैयारी वैसे ही कठिन मानी जाती है, लेकिन दृष्टिबाधित होने की वजह से रवि के सामने चुनौतियां और बड़ी थीं। मोटी किताबें पढ़ना, नोट्स बनाना और उत्तर लेखन करना आसान नहीं था। ऐसे समय में उनकी मां विभा सिन्हा उनकी सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आईं। घर का एक छोटा सा कमरा पढ़ाई का केंद्र बन गया। मां घंटों बैठकर अखबार, किताबें और नोट्स जोर-जोर से पढ़ती थीं और रवि उन्हें सुनकर याद करते थे। जब उत्तर लिखने की प्रैक्टिस करनी होती, तब रवि बोलते जाते और उनकी मां लिखती जातीं। यही रोज का रूटीन धीरे-धीरे उनकी सफलता की नींव बन गया। रवि खुलकर कहते हैं कि उनकी इस उपलब्धि के असली हकदार उनके माता-पिता हैं।
किसान पिता ने कभी टूटने नहीं दिया हौसला
रवि के पिता रंजन कुमार सिन्हा एक किसान हैं। खेती से होने वाली सीमित आमदनी के बावजूद उन्होंने बेटे के सपने को कभी बोझ नहीं माना। आर्थिक परेशानियां थीं, अनिश्चितता थी, लेकिन परिवार ने रवि का साथ नहीं छोड़ा। रवि अपने परिवार में पहले ऐसे सदस्य हैं जिन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की। यही वजह है कि उनकी सफलता पूरे परिवार के लिए भावुक कर देने वाला पल बन गई।
पांच प्रयासों के बाद मिली सबसे बड़ी सफलता
रवि राज की यात्रा बिल्कुल आसान नहीं रही। उन्होंने UPSC परीक्षा पांच बार दी। पहले प्रयास में वह प्रीलिम्स निकाल पाए लेकिन मेंस में नहीं पहुंच सके। दूसरे और तीसरे प्रयास में प्रीलिम्स भी क्लियर नहीं हुआ। लगातार असफलताओं ने उन्हें रोका जरूर, लेकिन तोड़ा नहीं। चौथे प्रयास में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 182 हासिल की और उनका चयन IRS में हो गया। आमतौर पर यहां पहुंचने के बाद ज्यादातर उम्मीदवार रुक जाते हैं, लेकिन रवि को अभी और आगे जाना था। IRS की ट्रेनिंग के दौरान भी उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और पांचवें प्रयास में सीधे AIR 20 हासिल कर ली।
BPSC में भी झेला संघर्ष, फिर मिली कामयाबी
UPSC के साथ-साथ रवि ने बिहार लोक सेवा आयोग यानी BPSC की परीक्षा भी दी। वहां भी उन्हें शुरुआती दो प्रयासों में असफलता मिली। तीसरे प्रयास में उनका चयन राजस्व अधिकारी के रूप में हुआ। हालांकि उन्होंने उस नौकरी को जॉइन नहीं किया क्योंकि उनका पूरा ध्यान UPSC पर था। रवि मानते हैं कि यह फैसला जोखिम भरा था, लेकिन उन्हें खुद पर भरोसा था।
सीमित संसाधनों से की स्मार्ट तैयारी
रवि ने अपनी तैयारी को हमेशा सरल रखा। उन्होंने बहुत ज्यादा किताबें बदलने या नए-नए सोर्स इकट्ठा करने के बजाय सीमित सामग्री को बार-बार पढ़ने पर ध्यान दिया। उन्होंने 2024 और 2025 के प्रयासों के दौरान कोचिंग भी ली। सीसैट और जियोग्राफी के लिए उन्होंने यूट्यूब लेक्चर का सहारा लिया। एथिक्स आंसर राइटिंग सुधारने के लिए टेलीग्राफ ग्रुप का सहारा लिया। उन्होंने AI टूल्स का इस्तेमाल भी किया, लेकिन बहुत सीमित तरीके से। मुख्य रूप से एथिक्स के उदाहरण जुटाने के लिए। रवि साफ कहते हैं कि AI मदद कर सकता है, लेकिन किताबों की जगह नहीं ले सकता।
हिंदी माध्यम को कमजोरी नहीं बनने दिया
रवि ने पूरी तैयारी हिंदी माध्यम से की। अक्सर यह माना जाता है कि हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए UPSC में संसाधन कम होते हैं, लेकिन रवि इस सोच से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि दिक्कतें जरूर होती हैं, लेकिन अगर छात्र गंभीर है तो रास्ते मिल जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कई हिंदी माध्यम के छात्रों ने शानदार रैंक हासिल की है।
इंटरव्यू में जवाब सुनकर हैरान रह गए बोर्ड सदस्य
रवि तीन बार इंटरव्यू फेस कर चुके हैं। एक बार BPSC और दो बार UPSC में। BPSC इंटरव्यू का अनुभव उन्हें आज भी याद है। उन्होंने बताया कि इंटरव्यू बोर्ड के चेयरमैन उनके जवाबों की स्पष्टता और आत्मविश्वास देखकर प्रभावित हो गए थे। UPSC इंटरव्यू में उनसे गांव, समसामयिक घटनाओं, प्रशासनिक सोच और केस स्टडी से जुड़े सवाल पूछे गए। रवि मानते हैं कि इंटरव्यू रटी हुई बातें बोलने की जगह नहीं होती। वहां शांत दिमाग और साफ सोच सबसे ज्यादा काम आती है।
“टॉपर्स किसी दूसरे ग्रह से नहीं आते”
आज रवि राज की कहानी पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है। लेकिन उनकी सबसे बड़ी खासियत उनकी सादगी है। वह कहते हैं कि टॉपर्स कोई असाधारण लोग नहीं होते। वे भी सामान्य इंसान ही होते हैं, फर्क सिर्फ इतना होता है कि वे खुद पर भरोसा बनाए रखते हैं और लगातार मेहनत करते रहते हैं। उनका संदेश साफ है कि तैयारी को कठिन बनाकर नहीं, बल्कि सरल रखकर आगे बढ़ना चाहिए। खुद पर भरोसा, ईमानदार मेहनत और लगातार धैर्य ही सबसे बड़ी ताकत है।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव


