राजस्थान CET 2026 में बड़ा बदलाव, गलत जवाब पर कटेंगे नंबर
राजस्थान CET 2026 में इस बार नेगेटिव मार्किंग लागू होगी। RSSB ने परीक्षा पैटर्न में बड़े बदलाव किए हैं। CET पास करने वालों को पटवारी, VDO, LDC और पुलिस कांस्टेबल समेत कई भर्तियों में मौका मिलेगा।
राजस्थान में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए इस बार CET यानी समान पात्रता परीक्षा पहले से काफी अलग होने वाली है। कर्मचारी चयन बोर्ड ने साफ कर दिया है कि अब सिर्फ परीक्षा पास करना ही काफी नहीं होगा, बल्कि बेहतर प्रदर्शन करने वालों को ही आगे भर्ती परीक्षाओं में मौका मिलेगा। इसी वजह से इस बार परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग लागू करने का फैसला लिया गया है।
CET-2026 में पहली बार लागू होगी नेगेटिव मार्किंग
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड यानी RSSB ने CET-2026 की तैयारियां शुरू कर दी हैं। बोर्ड अध्यक्ष आलोक राज के मुताबिक इस बार परीक्षा का स्तर पहले की तुलना में कठिन रखा जाएगा। सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि गलत जवाब देने पर अंक काटे जाएंगे। बोर्ड का कहना है कि पहले बड़ी संख्या में अभ्यर्थी पात्र घोषित हो जाते थे, जिससे भर्ती प्रक्रिया लंबी और जटिल हो जाती थी। अब कोशिश यह रहेगी कि केवल 3 से 4 लाख अभ्यर्थी ही पात्रता हासिल कर सकें। यानी अब अभ्यर्थियों को हर सवाल सोच-समझकर हल करना होगा। अंदाजे से जवाब देना नुकसान पहुंचा सकता है।
20 से ज्यादा बड़ी भर्तियों का खुलेगा रास्ता
राजस्थान में कई बड़ी सरकारी भर्तियां CET के आधार पर होती हैं। CET पास करने के बाद ही अभ्यर्थी इन पदों की मुख्य भर्ती परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। इन भर्तियों में शामिल हैं -
- पटवारी
- ग्राम विकास अधिकारी (VDO)
- कनिष्ठ लेखाकार
- एलडीसी (LDC)
- पुलिस कांस्टेबल
- प्लाटून कमांडर
- छात्रावास अधीक्षक
- महिला पर्यवेक्षक
- उपजेलर
बताया जा रहा है कि करीब 19 से 23 बड़ी भर्तियां CET पात्रता के जरिए भरी जाएंगी। ऐसे में CET-2026 लाखों युवाओं के करियर के लिए बेहद अहम परीक्षा बनने जा रही है।
अब 3 साल तक मान्य रहेगा CET सर्टिफिकेट
इस बार अभ्यर्थियों को एक बड़ी राहत भी दी गई है। पहले CET सर्टिफिकेट की वैधता सिर्फ 1 साल होती थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 3 साल कर दिया गया है। इस फैसले से 20 लाख से ज्यादा युवाओं को फायदा मिलने की उम्मीद है। पहले हर साल पात्रता खत्म होने के बाद युवाओं को दोबारा परीक्षा देनी पड़ती थी, जिससे समय और पैसा दोनों खर्च होते थे। अब एक बार CET पास करने के बाद अभ्यर्थी तीन साल तक विभिन्न भर्तियों में आवेदन कर सकेंगे।
पास होने के लिए कितने अंक जरूरी?
बोर्ड ने पात्रता के लिए न्यूनतम अंक भी तय कर दिए हैं। सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को कम से कम 40 प्रतिशत अंक लाने होंगे। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को 5 प्रतिशत की छूट मिलेगी हालांकि, सिर्फ न्यूनतम अंक लाना ही पर्याप्त नहीं माना जा रहा। क्योंकि इस बार प्रतियोगिता और परीक्षा स्तर दोनों पहले से ज्यादा कठिन रहने वाले हैं।
कब शुरू होंगे आवेदन?
RSSB के अनुसार CET स्नातक स्तर की परीक्षा के आवेदन जून 2026 में शुरू होंगे। आवेदन प्रक्रिया लगभग एक महीने तक चल सकती है। परीक्षा नवंबर 2026 में आयोजित होने की संभावना है। वहीं CET सीनियर सेकंडरी स्तर के आवेदन जुलाई 2026 में शुरू हो सकते हैं और परीक्षा दिसंबर 2026 में कराई जा सकती है। बोर्ड ने बताया कि परीक्षा को लेकर शुरुआती तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
CET-2024 की वैधता खत्म होने से बढ़ी थी चिंता
दरअसल, फरवरी 2026 में CET-2024 की वैधता खत्म हो चुकी है। इसके बाद लाखों अभ्यर्थियों की पात्रता समाप्त हो गई थी। आंकड़ों के मुताबिक, स्नातक स्तर के करीब 8.78 लाख अभ्यर्थी और सीनियर सेकंडरी स्तर के लगभग 9.17 लाख अभ्यर्थी शामिल हैं जो अपनी पात्रता खो चुके थे। इसके बाद से नई CET परीक्षा को लेकर लगातार असमंजस बना हुआ था। अब बोर्ड की तरफ से नई परीक्षा और नियमों को लेकर तस्वीर साफ कर दी गई है।
अब तैयारी का तरीका बदलना होगा
विशेषज्ञों का मानना है कि नेगेटिव मार्किंग लागू होने के बाद अब सिर्फ ज्यादा सवाल हल करना रणनीति नहीं होगी। अभ्यर्थियों को सटीकता पर ज्यादा ध्यान देना पड़ेगा। इसके अलावा कठिन स्तर की परीक्षा होने की वजह से सामान्य तैयारी से काम नहीं चलेगा। इस बार चयन की दौड़ पहले से ज्यादा टक्कर वाली मानी जा रही है।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
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हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
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हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
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काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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