भर्ती परीक्षा के अंक गोपनीय नहीं, RTI में दी जा सकती है जानकारी, रेलवे भर्ती पर कोर्ट का फैसला, दिया ये तर्क

Mar 10, 2026 06:02 am ISTPankaj Vijay लाइव हिन्दुस्तान, विधि संवाददाता, प्रयागराज
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हाइकोर्ट ने कहा है कि आरटीआई कानून का उद्देश्य सार्वजनिक हित से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराना है। इसलिए सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं में प्राप्त अंकों की जानकारी देना जरूरी है, लेकिन दूसरे अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां देना अनिवार्य नहीं है।

भर्ती परीक्षा के अंक गोपनीय नहीं, RTI में दी जा सकती है जानकारी, रेलवे भर्ती पर कोर्ट का फैसला, दिया ये तर्क

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं में प्राप्त अंक गोपनीय जानकारी नहीं माने जा सकते। इसलिए यदि परीक्षा में शामिल कोई अभ्यर्थी सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई ) के तहत दूसरे अभ्यर्थियों के अंक की जानकारी मांगता है, तो इसके लिए तीसरे पक्ष की सहमति आवश्यक नहीं है। न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने कहा कि सार्वजनिक परीक्षा में प्राप्त अंक निजी गोपनीय जानकारी की श्रेणी में नहीं आते। मामला रेलवे में विधि सहायक पद के लिए आयोजित परीक्षा से जुड़ा था।

वर्ष 2008 में रेलवे विधि सहायक भर्ती के एक अभ्यर्थी ने सूचना का अधिकार कानून के तहत अपने और दो अन्य अभ्यर्थियों के अंक तथा उत्तरपुस्तिकाओं की जानकारी मांगी थी। विभाग ने अंक उपलब्ध नहीं कराए, लेकिन याची को किसी भी दिन उत्तरपुस्तिकाओं का अवलोकन करने की अनुमति दी। इस आदेश के खिलाफ केंद्रीय सूचना आयोग में अपील की गई, जहां आयोग ने याची को उत्तरपुस्तिकाओं की प्रतियां देने का निर्देश दिया। इसके बाद वाराणसी स्थित डीजल लोकोमोटिव वर्क्स के महाप्रबंधक ने उत्तरपुस्तिकाओं की प्रतियां देने के निर्देश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने कहा कि आरटीआई कानून के तहत ऐसी निजी जानकारी का खुलासा नहीं किया जा सकता, जो किसी सार्वजनिक गतिविधि या सार्वजनिक हित से संबंधित न हो और जिससे किसी की निजता का अनावश्यक हनन हो।

अंक का खुलासा करना निजता का उल्लंघन नहीं

हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक परीक्षा में प्राप्त अंक सार्वजनिक गतिविधि से जुड़े होते हैं और इन्हें साझा करने से किसी की निजता का उल्लंघन नहीं होता। अदालत ने यह भी कहा कि यदि किसी मामले में जांच लंबित हो तो उस अवधि तक जानकारी रोकी जा सकती है, लेकिन सामान्य परिस्थितियों में अंक बताने से इंकार नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी दूसरे अभ्यर्थी की उत्तरपुस्तिका की फोटोकॉपी मांगना अधिकार के रूप में नहीं किया जा सकता, क्योंकि उत्तरपुस्तिकाओं में परीक्षक के हस्ताक्षर या अन्य ऐसी जानकारी हो सकती है जो सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में अभ्यर्थी को उत्तरपुस्तिका का अवलोकन करने की अनुमति देना पर्याप्त माना जा सकता है। हाइकोर्ट ने कहा कि आरटीआई कानून का उद्देश्य सार्वजनिक हित से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराना है। इसलिए सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं में प्राप्त अंकों की जानकारी देना जरूरी है, लेकिन दूसरे अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां देना अनिवार्य नहीं है।

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पंकज विजय| वरिष्ठ पत्रकार

शॉर्ट बायो पंकज विजय एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 15 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में livehindustan.com में असिस्टेंट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। वे करियर, स्कूल व हायर एजुकेशन, जॉब्स से जुड़े विषयों पर खबर लेखन और विश्लेषण में विशेषज्ञता रखते हैं। 9 वर्षों से यहां इसी भूमिका में हैं। सरकारी भर्तियों, बोर्ड व एंट्रेंस एग्जाम, प्रतियोगी परीक्षाओं, उनके परिणाम, बदलते दौर में करियर की नई राहों, कोर्स, एडमिशन एवं नए जमाने के रोजगार के लिए जरूरी स्किल्स से जुड़ी अपडेट तेजी से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं।


15 से अधिक सालों का अनुभव

पंकज विजय ने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की। अमर उजाला समाचार पत्र में रिसर्च, संपादकीय और करियर एजुकेशन जॉब्स डेस्क पर काम किया। यहां उन्हें फीचर लेखन व रिपोर्टिंग का भी मौका मिला। इसके बाद उन्होंने आज तक डिजिटल में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। आज तक वेबसाइट पर राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और एजुकेशन व रोजगार जगत से जुड़ी खबरें लिखीं। इसके बाद एनडीटीवी ऑनलाइन में एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर इस विषय में अपनी समझ को और व्यापक बनाया। एनडीटीवी की पारी के बाद वे लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े और बीते 9 वर्षों से करियर एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर रहे हैं।


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भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), दिल्ली से हिन्दी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा, गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में एमए व दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास में बीए ऑनर्स किया है। एनसीसी सी सर्टिफिकेट होल्डर हैं जिसके चलते उन्हें रक्षा क्षेत्र जैसे पुलिस व सेनाओं की भर्तियों की बेहतर समझ है।


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