पूर्वांचल के 20 लाल और बेटियों ने UPSC में गाड़ा झंडा, बलिया, भदोही और चंदौली की बेटियों ने किया कमाल
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के नतीजों में पूर्वांचल के 20 मेधावियों ने परचम लहराया है। बलिया की मोनिका को 16वीं, भदोही की इफ्रा को 24वीं और चंदौली की इशिता को 50वीं रैंक मिली है।

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के फाइनल नतीजे जब भी आते हैं, तो उत्तर प्रदेश के छोटे-छोटे जिलों और कस्बों में एक अलग ही दीवाली मनने लगती है। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है। संसाधनों की कमी, बिजली की कटौती और तमाम दुश्वारियों के बीच तपकर कुंदन बने पूर्वांचल के 20 से ज्यादा मेधावियों ने देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में कामयाबी का परचम लहरा दिया है। इन होनहारों ने साबित कर दिया है कि अगर आंखों में सपने हों और हौसलों में उड़ान, तो दिल्ली के मुखर्जी नगर या करोल बाग की चकाचौंध के बिना भी कामयाबी की इबारत लिखी जा सकती है। इस साल के नतीजों की सबसे खूबसूरत बात यह रही कि लड़कों के साथ-साथ बेटियों ने भी टॉप रैंक्स में अपनी मजबूत जगह बनाई है। आइए, उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से निकलकर देश के नौकरशाही के शीर्ष पर पहुंचने वाले इन होनहारों की बात करते हैं।
बलिया से चंदौली तक... बेटियों का रहा दबदबा
बागी बलिया की माटी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यहां के युवाओं में जुनून कूट-कूट कर भरा है। बलिया की रहने वाली होनहार बेटी मोनिका श्रीवास्तव ने पूरे देश में 16वीं रैंक (AIR 16) हासिल कर न सिर्फ अपने जिले का, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश का मान बढ़ाया है। उनकी इस कामयाबी पर पूरे बलिया में जश्न का माहौल है और बधाइयों का तांता लगा हुआ है।
पूर्वांचल के ही एक और अहम जिले भदोही, जिसे कालीन नगरी के नाम से जाना जाता है, वहां की बेटी इफ्रा शम्स अंसारी ने भी कमाल कर दिया है। इफ्रा ने अपनी शानदार मेहनत के दम पर 24वीं रैंक हासिल की है। यह सफलता उनके परिवार के उस त्याग का नतीजा है, जो उन्होंने बरसों तक किया। वहीं, धान के कटोरे के रूप में मशहूर चंदौली जिले की इशिता आनंद ने 50वीं रैंक हासिल कर यह दिखा दिया है कि तराई के इस छोटे से जिले की बेटियां किसी से कम नहीं हैं। इन तीनों बेटियों की सफलता आज यूपी की लाखों लड़कियों के लिए एक प्रेरणा बन गई है।
ब्रज से लेकर बुंदेलखंड तक गूंजी कामयाबी की गूंज
यह कामयाबी सिर्फ पूर्वांचल तक सीमित नहीं रही है, बल्कि प्रदेश के अन्य हिस्सों के मेधावियों ने भी अपना दम दिखाया है। सुहाग नगरी फिरोजाबाद के लाल उत्कर्ष यादव ने अपनी धाक जमाते हुए पूरे भारत में 32वीं रैंक हासिल की है। वहीं, बुंदेलखंड के बांदा जिले की रहने वाली शांभवी ने 46वीं रैंक लाकर यह बता दिया है कि उनके इलाके में पानी की कमी भले ही हो, लेकिन मेधा और जज्बे की कोई कमी नहीं है।
अवध और तराई के युवाओं ने भी किया कमाल
रायबरेली के विमल ने अपनी अथक मेहनत से यूपीएससी में 107वीं रैंक हासिल की है। एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले विमल का सफर संघर्षों से भरा रहा है, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
तराई इलाके की बात करें, तो बहराइच जिले ने इस बार शानदार प्रदर्शन किया है। जिले से एक या दो नहीं, बल्कि तीन होनहारों- रोली मद्देशिया, महेश जायसवाल और अंशुल अग्रवाल का चयन सिविल सेवाओं के लिए हुआ है। एक ही जिले से तीन-तीन युवाओं का अफसर बनना वहां के शिक्षा के बदलते माहौल को दर्शाता है।
अंबेडकरनगर जिले के युवाओं ने भी इस लिस्ट में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। यहां के पुरू दुबे ने शानदार 86वीं रैंक हासिल कर टॉप 100 में जगह बनाई है, जबकि विपिन यादव ने 316वीं रैंक लाकर अपने परिवार और जिले का नाम रोशन किया है।
गोंडा के कार्तिकेय और प्राची की शानदार उड़ान
गोंडा जिले के लिए भी यह रिजल्ट खुशियां लेकर आया। जिले के कार्तिकेय सिंह ने 269वीं रैंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। वहीं, गोंडा के हथियागढ़ की रहने वाली प्राची सोनी ने 680वीं रैंक हासिल की है। प्राची की यह सफलता उन सभी युवाओं के लिए एक सबक है जो बार-बार मिलने वाली असफलताओं से निराश हो जाते हैं।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
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हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
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शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव


