CBSE के बाद इस राज्य में भी कंप्यूटर स्क्रीन पर होगी बोर्ड परीक्षा की कॉपियों की जांच

Feb 13, 2026 11:31 pm ISTHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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सीबीएसई के बाद पंजाब बोर्ड ने भी ऑन स्क्रीन मार्किंग व्यवस्था शुरू कर दी है। इस व्यवस्था के तहत स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं ऑनलाइन शिक्षक जांचेंगे।

CBSE के बाद इस राज्य में भी कंप्यूटर स्क्रीन पर होगी बोर्ड परीक्षा की कॉपियों की जांच

परीक्षा के बाद उत्तर पुस्तिकाओं के ढेर, ढुलाई और महीनों तक चलने वाली जांच प्रक्रिया अब धीरे धीरे इतिहास बनने जा रही है। सीबीएसई के बाद Punjab में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अब शिक्षक छात्रों की कॉपियां हाथ से नहीं, बल्कि कंप्यूटर स्क्रीन पर जांचेंगे। इससे न केवल समय बचेगा बल्कि मूल्यांकन प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और सुरक्षित भी होगी।

क्या है नया On Screen Marking (OSM) सिस्टम

राज्य में ऑन स्क्रीन मार्किंग यानी OSM सिस्टम लागू किया जा रहा है, जिसके तहत उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जाएगा। इसके बाद परीक्षक इन्हें ऑनलाइन लॉगिन के जरिए देखेंगे और स्क्रीन पर ही अंक देंगे। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य मूल्यांकन को तेज, सटीक और तकनीक आधारित बनाना है।

शिक्षा मंत्री ने बताया क्यों जरूरी था बदलाव

राज्य के शिक्षा मंत्री Harjot Singh Bains ने कहा कि यह कदम पंजाब को उन शुरुआती राज्यों में शामिल करेगा जहां उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पूरी तरह डिजिटल तरीके से होगा। उनका कहना है कि इससे कॉपियों के खोने, गड़बड़ी या देरी जैसी समस्याओं पर रोक लगेगी और रिजल्ट समय पर जारी करना आसान होगा।

पहले ही हो चुका है सिस्टम का ट्रायल

यह व्यवस्था सीधे लागू नहीं की जा रही, बल्कि इसका परीक्षण पहले ही किया जा चुका है। सितंबर 2025 की सप्लीमेंट्री परीक्षाओं में लगभग 23 हजार उत्तर पुस्तिकाओं का डिजिटल मूल्यांकन किया गया था। इस ट्रायल के सफल रहने के बाद अब इसे बड़े स्तर पर लागू करने का फैसला लिया गया है।

कैसे काम करेगा पूरा डिजिटल मूल्यांकन सिस्टम

नई उत्तर पुस्तिकाओं के हर पेज पर एक यूनिक QR कोड दिया जाएगा। यह कोड कॉपी की पहचान को सुरक्षित बनाएगा। परीक्षा के बाद कॉपियों को सुरक्षित केंद्रों पर स्कैन किया जाएगा और फिर एक केंद्रीकृत डैशबोर्ड पर अपलोड किया जाएगा। परीक्षक तय मानक के अनुसार ऑनलाइन जांच करेंगे, अंक सीधे सिस्टम में दर्ज होंगे और पूरी प्रक्रिया रियल टाइम में मॉनिटर की जा सकेगी। इससे मानवीय गलती की संभावना भी कम होगी।

कौन लागू करेगा यह व्यवस्था

इस डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को Punjab School Education Board द्वारा लागू किया जाएगा। बोर्ड पहले चरण में इसे 2026 की मैट्रिक परीक्षा के एक विषय में शुरू करेगा और बाद में धीरे धीरे सभी विषयों में विस्तार किया जाएगा।

देश में डिजिटल मूल्यांकन की बढ़ती दिशा

इससे पहले Central Board of Secondary Education भी डिजिटल मार्किंग सिस्टम की शुरुआत कर चुका है। अब पंजाब का यह कदम राज्य बोर्ड स्तर पर परीक्षा प्रणाली को तकनीकी रूप से अपग्रेड करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

छात्रों और शिक्षकों दोनों को मिलेगा फायदा

नई व्यवस्था से कॉपियों की जांच में लगने वाला लंबा समय घटेगा, रिजल्ट जल्दी आएंगे और मूल्यांकन ज्यादा पारदर्शी होगा। शिक्षकों को भी अब भारी मात्रा में उत्तर पुस्तिकाएं संभालने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे उनका काम आसान और व्यवस्थित होगा।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

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काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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