90 हजार की सैलरी, कोई फालतू खर्च नहीं, फिर भी 15 लाख के कर्ज में डूबा शख्स; आप तो नहीं कर रहे यही गलती

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पुणे के एक 36 साल के आदमी की कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पोस्ट में यह बताया गया है कि इस शख्स ने 90 हजार की सलैरी थी, उसके पास कोई फालतू का खर्च नहीं था फिर वह 15 लाख के कर्ज में कैसे चला गया।

90 हजार की सैलरी, कोई फालतू खर्च नहीं, फिर भी 15 लाख के कर्ज में डूबा शख्स; आप तो नहीं कर रहे यही गलती

वीकेंड महंगी जगहों पर पार्टी करना, नए-नए गैजेट्स खरीदना, या अपनी हैसियत से ज्यादा दिखावे पर पैसे उड़ाना। हम अक्सर यही मानकर चलते हैं कि कर्ज के दलदल में सिर्फ वही लोग फंसते हैं जो अपने शौक पूरे करने के लिए ऐसे बेहिसाब पैसे खर्च करते हैं। लेकिन, असल जिंदगी की हकीकत इस सोच से कहीं ज्यादा डरावनी है। हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है, जिसने पैसे बचाने और खर्च करने के हमारे नजरिए को झकझोर कर रख दिया है। एक फाइनेंशियल एडवाइजर ने अपनी पोस्ट में बताया है कि कैसे एक पढ़ा-लिखा नौकरीपेशा इंसान, जिसने कभी कोई फिजूलखर्ची या गलत वित्तीय फैसला नहीं लिया, वो भी 15 लाख रुपये के भारी-भरकम कर्ज में डूब गया। यह कहानी हमें बताती है कि कैसे एक अचानक आई मुसीबत आपकी पूरी जिंदगी की जमा-पूंजी और बजट को तहस-नहस कर सकती है।

कैसे शुरू हुआ कर्ज का ये सिलसिला?

फाइनेंशियल एडवाइजर विवेक ने लिंक्डइन पर इस केस स्टडी को शेयर किया है। उन्होंने बताया, "पुणे में रहने वाला एक 36 साल का ऑपरेशंस मैनेजर आज 15 लाख रुपये के कर्ज में फंसा हुआ है। हैरानी की बात ये है कि हर महीने 90,000 रुपये कमाने वाले इस शख्स ने कभी कोई भी लापरवाही भरा आर्थिक फैसला नहीं लिया।" विवेक के मुताबिक, करीब 3 साल पहले इस व्यक्ति की जिंदगी बिल्कुल पटरी पर थी। उसकी महीने की आमदनी 90,000 रुपये थी, जिसमें से 82,000 रुपये उसके घर के जरूरी खर्चों, बच्चों की फीस और बाकी चीजों में चले जाते थे। बचत भले ही कम थी, लेकिन जिंदगी बिना किसी उधारी के सुकून से कट रही थी। सब कुछ ठीक चल रहा था, तभी जिंदगी ने एक करवट ली।

अचानक उसके पिता बीमार पड़ गए और उनकी एक इमरजेंसी सर्जरी करानी पड़ी। इस सर्जरी का खर्च 5 लाख रुपये आया। उस वक्त हाथ में इतना कैश न होने की वजह से, इस शख्स ने 14% के ब्याज दर पर 5 लाख रुपये का पर्सनल लोन ले लिया। उसकी हर महीने की ईएमआई 13,663 रुपये तय हुई। बस यही वो एक फैसला था, जिसने उसके सधे हुए बजट की कमर तोड़ कर रख दी।

ऐसे बिगड़ गया पूरा बजट

अब जरा गणित समझिए। पहले उसके घर का जरूरी खर्च 82,000 रुपये था। अब इसमें 13,663 रुपये की ईएमआई भी जुड़ गई। यानी उसका कुल महीने का खर्च लगभग 96,000 रुपये हो गया। लेकिन, उसकी सैलरी तो अब भी 90,000 रुपये ही थी। नतीजा यह हुआ कि वो हर महीने करीब 6,000 रुपये शॉर्ट होने लगा। इस महीने की कमी को पूरा करने के लिए उसने अपने क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। राशन का सामान, पेट्रोल, और घर के छोटे-मोटे खर्च अब क्रेडिट कार्ड से होने लगे। देखते ही देखते, महज एक साल के अंदर उसके क्रेडिट कार्ड का बिल 4 लाख रुपये तक पहुंच गया। क्रेडिट कार्ड पर उसे हर महीने 20,000 रुपये का मिनिमम पेमेंट करना पड़ रहा था, वो भी 40% के भारी भरकम ब्याज दर के साथ।

कर्ज चुकाने के लिए एक और कर्ज

जब चीजें हाथ से निकलने लगीं, तो इस रायते को समेटने के लिए उसने एक और लोन लेने का फैसला किया। उसने सोचा कि एक बड़ा लोन लेकर वो क्रेडिट कार्ड का सारा बिल चुका देगा। लेकिन तब तक उसका क्रेडिट स्कोर (CIBIL) काफी गिर चुका था। खराब क्रेडिट स्कोर की वजह से उसे 6 लाख रुपये का जो नया लोन मिला, उस पर 18% का ब्याज देना पड़ा। अब उसकी जिंदगी में 17,625 रुपये की एक और नई ईएमआई जुड़ गई। अगले दो सालों में हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ते चले गए। आज उस पर 15 लाख रुपये का कुल कर्ज है। वह अपनी टेक-होम सैलरी का 57% हिस्सा, यानी लगभग 51,000 रुपये, सिर्फ कर्ज की ईएमआई चुकाने में दे रहा है। विवेक ने बताया कि वो शख्स अब सिर्फ एक ही काम कर रहा है वह ये कि पुराने कर्ज को चुकाने के लिए नया कर्ज ले रहा है।

कैसे बचें इस जंजाल से

इस डरावने हालात को समझाते हुए विवेक कहते हैं, "यही वो तरीका है जिससे कर्ज का चक्रव्यूह काम करता है। आपका एक लोन एक नई ईएमआई पैदा करता है, जो आपके पास मौजूद कैश को कम कर देता है, और फिर यही कमी आपको अपना घर चलाने के लिए अगला लोन लेने पर मजबूर कर देती है।" उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "अगर आपकी महीने की ईएमआई आपकी टेक-होम सैलरी के 40% से ज्यादा हो चुकी है, तो इसे खतरे की घंटी समझें।" इस स्थिति से बाहर निकलने का सबसे पहला और जरूरी कदम है कि नए लोन लेना तुरंत बंद कर दें। इसके बाद, अपने सभी कर्जों और उनकी ब्याज दरों की एक लिस्ट बनाएं और सबसे पहले उस कर्ज को चुकाने पर फोकस करें जिस पर सबसे ज्यादा ब्याज लग रहा हो।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

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हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

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हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

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