दो बार इंटरव्यू तक पहुंचकर टूटा सपना, फिर चौथे प्रयास में UPSC क्रैक; प्रियाशा ने कैसे हासिल किया ये मुकाम

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लगातार दो बार इंटरव्यू में असफल होने के बाद भी हिम्मत न हारते हुए प्रियाशा वर्मा ने अपने चौथे प्रयास में यूपीएससी 2025 परीक्षा में 324वीं रैंक हासिल कर मिसाल पेश की है।

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यूपीएससी की तैयारी करने वाले हर मोड़ पर एक नई कहानी देखते हैं। कुछ लोग पहली बार में ही बाजी मार लेते हैं, तो कुछ को एक लंबी और थका देने वाली लड़ाई लड़नी पड़ती है। प्रियाशा वर्मा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जहां कामयाबी रातों-रात नहीं मिली। इसके पीछे उम्मीदों, टूटते सपनों और फिर से शून्य से शुरुआत करने का एक लंबा और मुश्किल सिलसिला रहा है। सिविल सेवा परीक्षा 2025 में प्रियाशा ने ऑल इंडिया 324वीं रैंक हासिल की है। यह उनका चौथा प्रयास था, जिसमें उन्होंने आखिरकार अपनी मंजिल पा ली। दिलचस्प बात यह है कि उनकी इस सफलता का राज हर महीने रणनीति बदलना या बाजार की नई किताबों के पीछे भागना नहीं था, बल्कि उन्होंने एक बेहद आसान और सीधे रास्ते पर भरोसा किया।

उत्तर प्रदेश से गहरा नाता

प्रियाशा की जिंदगी के रंग कई शहरों से जुड़े हुए हैं। उनका जन्म अयोध्या में हुआ, परवरिश लखनऊ में हुई और पढ़ाई वाराणसी में संपन्न हुई। फिलहाल, उनके पिता की पोस्टिंग के कारण उनका परिवार जबलपुर में रह रहा है। पढ़ाई की बात करें तो उन्होंने आईआईटी बीएचयू, वाराणसी से साल 2018 से 2022 के बीच सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की। देश सेवा और प्रशासनिक माहौल उनके लिए कोई नया नहीं था। उनके पिता खुद रेलवे में एक आईआरएसई अधिकारी हैं, जिन्होंने यूपीएससी इंजीनियरिंग सर्विसेज के जरिए सफलता पाई थी। पिता को करीब से काम करते देख प्रियाशा को सरकारी व्यवस्था और शासन की समझ बचपन से ही मिलने लगी थी।

कॉलेज के दिनों में उनका यह झुकाव और मजबूत हो गया। प्रियाशा बताती हैं कि कॉलेज के पहले और दूसरे साल में जब वह अपने करियर के विकल्पों को टटोल रही थीं, तब उनके पिता ने उन्हें सिविल सेवा में जाने की सलाह दी। इसके साथ ही, लखनऊ में तैनात उनकी एक कजिन, जो खुद आईएएस अधिकारी हैं, उनसे भी प्रियाशा को काफी प्रेरणा मिली।

चार प्रयास में दिया तीन इंटरव्यू

साल 2022 में आईआईटी से पास आउट होते ही प्रियाशा ने बिना समय गंवाए अपना पहला अटेंप्ट दिया। हालांकि, पहले प्रयास में वह मेन्स परीक्षा पास नहीं कर सकीं। आम तौर पर लोग पहली नाकामी से परेशान हो जाते हैं, लेकिन प्रियाशा के लिए यह सिर्फ एक शुरुआत थी। साल 2023 में उन्होंने जोरदार वापसी की और इंटरव्यू तक का सफर तय किया। मगर किस्मत को कुछ और मंजूर था; वह आखिरी लिस्ट में जगह बनाने से महज 14 नंबरों से चूक गईं। इसके बाद 2024 में उन्होंने फिर से इंटरव्यू दिया, लेकिन इस बार भी फासला सिर्फ 20 नंबरों का रह गया।

लगातार दो बार अंतिम रूप से चयन न होना किसी भी छात्र को तोड़ सकता है। प्रियाशा मानती हैं कि वह दौर उनके लिए सबसे मुश्किल था। जब आप सफलता के इतने करीब आकर वापस लौटते हैं, तो दोबारा से प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू के पूरे चक्र से गुजरना मानसिक रूप से बहुत थका देने वाला होता है। लेकिन प्रियाशा ने हार नहीं मानी और 2025 में अपने चौथे प्रयास में 324वीं रैंक हासिल करके ही दम लिया।

जब एक फैसले ने बदल दिए नंबर

इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से होने के बावजूद प्रियाशा ने अपने ऑप्शनल सब्जेक्ट के तौर पर राजनीति विज्ञान और अंतर्राष्ट्रीय संबंध को चुना। यह उनके लिए बिल्कुल नया विषय था, लेकिन उन्होंने इसे एक चुनौती की तरह लिया। उनका मानना था कि इसका सिलेबस काफी दिलचस्प है और यह जनरल स्टडीज के कई हिस्सों में मदद करता है। उनका यह फैसला बिल्कुल सही साबित हुआ। इस साल उनके ऑप्शनल के नंबरों में बड़ा उछाल आया और उन्होंने 282 अंक हासिल किए, जो पिछली बार से लगभग 30 नंबर ज्यादा थे। प्रियाशा के मुताबिक, इसके लिए उन्होंने ढेर सारी नई किताबें नहीं पढ़ीं, बल्कि अपनी आंसर राइटिंग में सुधार किया। उन्होंने अपने जवाबों को साफ-सुथरा, व्यवस्थित और सटीक बनाने पर ध्यान दिया।

इंटरनेट पर जानकारी की बाढ़ से बचें

आज के दौर में यूपीएससी की तैयारी कर रहे छात्रों के सामने सबसे बड़ी चुनौती स्टडी मटेरियल का जरूरत से ज्यादा होना है। टेलीग्राम चैनल्स, अंतहीन पीडीएफ और हर रोज बाजार में आने वाले नए नोट्स छात्रों को भटका देते हैं। प्रियाशा इसे इंफोडैमिक यानी जानकारी की महामारी कहती हैं। उनकी सलाह बहुत साफ है। उन्होंने बताया कि बहुत ज्यादा किताबों और सामग्रियों के पीछे मत भागिए। बुनियादी और सीमित सोर्सेज पर भरोसा रखें। अपने खुद के नोट्स बनाएं और सालों तक उन्हीं का बार-बार रिवीजन करें।

दिल्ली जाना जरूरी नहीं

कोचिंग हब बन चुके दिल्ली को लेकर भी प्रियाशा की राय काफी व्यावहारिक है। कुछ समय दिल्ली में बिताने के बाद उनका मानना है कि वहां रहने के अपने अलग खर्चे और चुनौतियां हैं। आज के डिजिटल युग में जब सारा मटेरियल ऑनलाइन मौजूद है, तो घर पर रहकर शांत माहौल में ज्यादा बेहतर तैयारी की जा सकती है। यह बात देश के छोटे शहरों और गांवों में रहने वाले उन लाखों उम्मीदवारों को हौसला देती है जो दिल्ली नहीं जा पाते। 324वीं रैंक के साथ प्रियाशा को आईआरएस मिलने की पूरी उम्मीद है।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

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हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

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काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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