न IIT, न NIT... गांव के लड़के ने कैसे हासिल किया Nvidia में 2.6 करोड़ का पैकेज, वायरल हो रही कहानी
कर्नाटक के एक छोटे से गांव से निकलकर कैलिफोर्निया में एनवीडिया तक का शानदार सफर तय करने वाले पृथ्वीराज की कहानी वायरल है। उन्होंने कैसे हासिल किया ये मुकाम, आइए जानते हैं।

एक ऐसा लड़का जिसका बचपन उस गांव में गुजरा हो जहां बैलगाड़ियां ही सफर का इकलौता जरिया हुआ करती थीं। धूल भरी पगडंडियों से निकलकर सीधा कैलिफोर्निया की उस कंपनी तक पहुंचना, जो आज पूरी दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की दुनिया पर राज कर रही है। जी हां हम बात कर रहे हैं मशहूर दिग्गज कंपनी एनवीडिया (Nvidia) की। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं है, बल्कि कर्नाटक के चित्रदुर्ग के पास बसे एक छोटे से गांव के रहने वाले पृथ्वीराज की हकीकत है। आजकल लिंक्डइन और बाकी सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स पर पृथ्वीराज के इस शानदार सफर की जमकर चर्चा हो रही है। उनकी कामयाबी की कहानी ने उन तमाम लोगों के भ्रम को तोड़ दिया है, जिनका मानना है कि दुनिया की टॉप टेक कंपनियों में जाने के लिए आपके पास आईआईटी या किसी बहुत बड़े और महंगे संस्थान की डिग्री होना बेहद जरूरी है। पृथ्वीराज ने कैसे हासिल किया यह मुकाम, आइए जानते हैं।
पृथ्वीराज की कहानी उस जमीन से शुरू होती है जहां बड़े सपने देखना भी किसी लग्जरी से कम नहीं माना जाता। गांव की साधारण सी जिंदगी और सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने अपनी पढ़ाई को कभी रुकने नहीं दिया। दिलचस्प बात यह है कि पृथ्वीराज ने किसी आईआईटी या एनआईटी से पढ़ाई नहीं की है। उन्होंने अपनी इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की तालीम बेंगलुरु की पीईएस यूनिवर्सिटी से हासिल की। यह इस बात का जीता-जागता सबूत है कि अगर इंसान के अंदर कुछ कर गुजरने की आग हो, तो कॉलेज का नाम नहीं, बल्कि आपकी लगन और हुनर मायने रखता है। उन्होंने कभी भी क्लासरूम की चारदीवारी तक खुद को सीमित नहीं रखा।
कामयाबी का असली मंत्र क्या रहा?
अक्सर हम देखते हैं कि नौजवान रातों-रात कामयाबी पाने या सिर्फ महंगी डिग्रियों के पीछे भागते हैं, लेकिन पृथ्वीराज का रास्ता थोड़ा अलग था। उन्होंने अपने हुनर को लगातार तराशने पर सबसे ज्यादा जोर दिया। नई-नई तकनीक सीखना, इंटर्नशिप करना, अपने खुद के पर्सनल प्रोजेक्ट्स बनाना और बिना थके मेहनत करना, यही उनकी कामयाबी की असल सीढ़ी बनी। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहा कि किताबी ज्ञान से परे जाकर असल दुनिया की चुनौतियों को कैसे सुलझाया जाए।
एनवीडिया में अहम रोल
आज पृथ्वीराज एनवीडिया के कैलिफोर्निया स्थित हेडक्वार्टर में काम करते हैं। आपको बता दें कि एनवीडिया आज के समय में दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में से एक है, जिसके बनाए गए चिप्स पर पूरी दुनिया का एआई सिस्टम टिका हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस वक्त पृथ्वीराज का सालाना पैकेज लगभग 2.6 करोड़ रुपये है। वह उन बेहद एडवांस चिप्स को डेवलप करने वाली टीम का एक अहम हिस्सा हैं, जो भविष्य की एआई तकनीक को नई दिशा दे रहे हैं। यह महज़ एक मोटी सैलरी वाली नौकरी की बात नहीं है, बल्कि उस मुकाम की बात है जहां एक आम पृष्ठभूमि से आने वाला नौजवान दुनिया की सबसे आधुनिक तकनीक को आकार दे रहा है।
लिंक्डइन पर लोगों ने लुटाया जमकर प्यार
जैसे ही पृथ्वीराज की यह कहानी लिंक्डइन पर वायरल हुई, यूज़र्स ने इस पर जमकर प्यार और सम्मान लुटाया। हजारों लोगों के लिए यह कहानी एक नई उम्मीद लेकर आई है। एक यूजर ने अपने दिल की बात लिखते हुए कहा, "आज भी बहुत से लोगों के लिए अपनी सामाजिक और आर्थिक स्थिति को सुधारने का सबसे बड़ा ज़रिया तालीम ही है। हम भले ही इस बात पर कितनी भी लंबी बहस कर लें कि एआई के आने से हमारी शिक्षा प्रणाली का क्या होगा, लेकिन तालीम की अहमियत और उसका गहरा असर कभी खत्म नहीं होने वाला।"
वहीं एक दूसरे शख्स ने कमेंट किया, "यह सच में बहुत ज्यादा इंस्पायरिंग है! यह साबित करता है कि आपका बैकग्राउंड क्या है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। आपकी लगन, कुछ नया सीखने की चाहत और लगातार कोशिशें ही असली मायने रखती हैं। उन सभी छात्रों के लिए यह फख्र का पल है जो बड़े सपने देखने की हिम्मत जुटाते हैं।" एक तीसरे व्यक्ति ने लिखा, "यह कहानी एक बेहतरीन रिमाइंडर है कि आपका अतीत आपका भविष्य तय नहीं करता। लगातार मेहनत आपको वहां ले जा सकती है, जहां आपने कभी सोचा भी न हो।"
डिस्क्लेमर: यह खबर सोशल मीडिया पर किए गए दावों के आधार पर तैयार की गई है, लाइन हिन्दुस्तान इसकी पुष्टि नहीं करता है।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव


