Prayagraj: ITI परीक्षा में फर्जीवाड़ा, प्रधानाचार्य समेत 11 गिरफ्तार; 4-4 हजार रुपये लेकर बैठाए थे सॉल्वर

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छापेमारी में पांच लाख दस हजार रुपये नकद समेत परीक्षा से जुड़े दस्तावेज, कंप्यूटर सिस्टम, मोबाइल और अन्य सामग्री बरामद की गई। एसटीएफ अब गिरोह के मास्टर माइंड आईटीआई बांदा के अनुदेशक धीरंजन कुमार समेत आठ वांछितों की तलाश में जुटी है।

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ITI परीक्षा में फर्जीवाड़ा (फाइल फोटो)

राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) नैनी में चल रही अखिल भारतीय व्यावसायिक परीक्षा में सॉल्वर गैंग के जरिए बड़े स्तर पर नकल कराने के संगठित खेल का एसटीएफ ने पर्दाफाश किया है। एसटीएफ की छापेमारी में संस्थान के प्रधानाचार्य, परीक्षा प्रभारी और चार अनुदेशकों सहित कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि परीक्षार्थियों से चार-चार हजार रुपये लेकर उनकी जगह सॉल्वर बैठाकर ऑनलाइन परीक्षा दिलाई जा रही थी।

छापेमारी में क्या मिला

छापेमारी में पांच लाख दस हजार रुपये नकद समेत परीक्षा से जुड़े दस्तावेज, कंप्यूटर सिस्टम, मोबाइल और अन्य सामग्री बरामद की गई। एसटीएफ अब गिरोह के मास्टर माइंड आईटीआई बांदा के अनुदेशक धीरंजन कुमार समेत आठ वांछितों की तलाश में जुटी है।

एसटीएफ सीओ शैलेश प्रताप सिंह ने बताया कि 11 जुलाई से 8 अगस्त तक आयोजित हो रही कम्प्यूटर आधारित अखिल भारतीय व्यावसायिक परीक्षा में संस्थान के कुछ अधिकारी और कर्मचारी द्वारा पैसे लेकर सामूहिक नकल कराने की सूचना मिल रही थी। टीम ने बुधवार को नैनी आईटीआई परिसर स्थित कौशल विकास बिल्डिंग में तीसरी पाली की परीक्षा के दौरान छापेमारी की।

कौन-कौन हुआ गिरफ्तार

इस दौरान पांच सॉल्वर शिवम कुमार, रणविजय सिंह, जय सिंह, जितेंद्र पटेल व दिलीप कुमार पटेल के अलावा संस्थान के प्रधानाचार्य अशोक कुमार, परीक्षा प्रभारी रवि प्रकाश और अनुदेशक फूल प्रकाश, धीरज कुमार शर्मा, राजेश कुमार व राजकुमार मौर्य को गिरफ्तार किया गया। छापेमारी के दौरान परीक्षार्थियों से परीक्षा पास कराने के एवज में वसूले गए पांच लाख दस हजार रुपये नकद, 67 परीक्षा संबंधी दस्तावेज, छह एंड्रॉयड मोबाइल, पांच कंप्यूटर सिस्टम, आधारकार्ड, पैनकार्ड और एटीएम कार्ड समेत अन्य सामग्री बरामद हुई।

300 से अधिक परीक्षार्थियों से लाखों वसूले

राजकीय आईटीआई कॉलेज नैनी में वार्षिक अखिल भारतीय व्यावसायिक परीक्षा में बड़े पैमाने में नकल का खेल चल रहा था। प्रारंभिक जांच में 300 से अधिक परीक्षार्थियों से 12 लाख रुपये से अधिक रकम वसूले जाने की जानकारी मिली है। बीते 11 जुलाई से शुरू परीक्षा में रोजाना अलग-अलग परीक्षार्थियों से चार-चार हजार रुपये लिए जा रहे थे। गिरोह में सॉल्वर गैंग, कॉलेज के प्रधानाचार्य समेत कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद विभाग के उच्चाधिकारियों की भी मिलीभगत के संकेत मिले हैं।

एसटीएफ के अनुसार पूछताछ में सामने आया कि पढ़ाई में कमजोर परीक्षार्थियों से चार हजार रुपये लेकर उनकी जगह सॉल्वर बैठाए जाते थे। सॉल्वर को परीक्षार्थी के प्रवेश पत्र की प्रति देकर अलग लैब में बैठाया जाता था, जहां वह जन्मतिथि के आधार पर लॉगिन कर पूरी परीक्षा देता था। इसके बदले प्रत्येक सॉल्वर को 500 रुपये दिए जाते थे, जबकि शेष रकम गिरोह के सदस्यों में बांट ली जाती थी। जांच में यह भी सामने आया कि पूरे नेटवर्क का संचालन पूर्व में नैनी आईटीआई में तैनात रहे और वर्तमान में बांदा आईटीआई में कार्यरत अनुदेशक धीरंजन कुमार के माध्यम से किया जा रहा था। वह मोबाइल के जरिए संस्थान के कर्मचारियों से संपर्क कर सॉल्वर भेजता था। एसटीएफ निरीक्षक जयप्रकाश राय ने बताया कि गिरोह में अन्य लोगों की भी संलिप्तता सामने आई है। फरार धीरंजन कुमार समेत अन्य वांछितों की तलाश में दबिश दी जा रही है।

आईटीआई की व्यावसायिक परीक्षा की प्रारंभिक जांच में 300 से अधिक परीक्षार्थियों से 12 लाख रुपये से अधिक रकम वसूले जाने की जानकारी मिली है। बीते 11 जुलाई से शुरू परीक्षा में रोजाना अलग-अलग परीक्षार्थियों से चार-चार हजार रुपये लिए जा रहे थे।

अन्य परीक्षा केंद्रों तक नेटवर्क की आशंका

नकल गिरोह का भंडाफोड़ होने के बाद अन्य राजकीय आईटीआई कॉलेजों के परीक्षा केंद्रों में नेटवर्क फैले होने की आशंका है। सूत्रों की मानें तो आईटीआई बांदा धीरंजन कुमार पूर्व में नैनी में कार्यरत था। यहां तैनाती के दौरान उसका लेनदेन को लेकर विवाद हुआ था। इस पर उसका स्थानांतरण हो गया था। विभागीय कर्मचारियों ने धीरंजन कुमार का अन्य परीक्षा केंद्रों से भी संपर्क होने और नकल गिरोह संचालित करने का संकेत मिला है।

नकल कराने में सभी की अलग-अलग थी भूमिका

परीक्षा में नकल कराने के लिए गिरोह के सदस्यों को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई थी। अंदावा निवासी कार्यदेशक रवि प्रकाश को परीक्षा प्रभारी नियुक्त किया गया था। अनुदेशक फूल प्रकाश परीक्षा केंद्र में लगे कम्प्यूटर की देखरेख और अनुदेशक राजकुमार मौर्या, धीरज कुमार शर्मा और संतोष कुमार सोनी के साथ मिलकर परीक्षार्थियों से पैसे की वसूली करते थे। वसूले गए धनराशि में सभी आरोपी अपना-अपना हिस्सा बांटने के बाद शेष पैसे बांदा के अनुदेशक धीरंजन के जरिए राजकीय प्रशिक्षण संस्थान के उच्चाधिकारियों को पहुंचाया जाता था। गिरफ्तार प्रधानाचार्य अशोक मम्फोर्डगंज का निवासी है और 18 जून 2025 से आईटीआई नैनी में कार्यरत है।

Dheeraj Pal

लेखक के बारे में

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संक्षिप्त विवरण: धीरज पाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए इन्हें 4 साल हो गए हैं। धीरज एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने राजनीति समाचार, एजुकेशन बीट के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। हिंदुस्तान लाइव में यूपी बोर्ड से लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव कवर करने साथ-साथ खेल जैसे बीट पर काम किया। अब इनका एकमात्र उद्देश्य करियर और एजुकेशन से जुड़ी रुचिगत, सरल, प्रमाणिक और पाठक-हितैषी रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

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