उम्र 16, कंपनी 100 करोड़ की; इनती कम एज में लड़की ने टेक दुनिया में मचाया तहलका
जिस उम्र में बच्चे गेम खेलते हैं, उस उम्र में हिंदुस्तानी मूल की प्रांजलि अवस्थी ने 100 करोड़ की एआई कंपनी खड़ी कर दी।

अगर कोई आपसे कहे कि कामयाबी की कोई उम्र नहीं होती तो शायद आप इसे महज एक कहावत मान लें। लेकिन टेक की दुनिया में एक ऐसी लड़की है जिसने इस कहावत को सौ फीसदी सच साबित कर दिया है। प्रांजलि अवस्थी एक ऐसी हिंदुस्तानी मूल की अमेरिकी कोडर हैं, जिन्होंने उस उम्र में कोडिंग शुरू कर दी थी जब आम बच्चे ठीक से वीडियो गेम खेलना सीखते हैं। महज सात साल की उम्र में प्रोग्रामिंग की दुनिया में कदम रखना, 13 साल में रिसर्च लैब के अंदर इंटर्नशिप करना और 16 साल की छोटी सी उम्र में खुद का एआई स्टार्टअप खड़ा कर देना। ये कहानी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं लगती लेकिन यह सच है। प्रांजलि ने Delv.AI नाम से अपना स्टार्टअप शुरू किया था। ताज्जुब की बात ये है कि सिर्फ सवा साल के भीतर इस कंपनी की वैल्यूएशन करीब 100 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
प्रांजलि की कहानी जितनी उनके जुनून के बारे में है उतनी ही सही मौकों की पहचान करने के बारे में भी है। उनका जन्म भारत में हुआ था लेकिन 11 साल की उम्र में वो अपने परिवार के साथ फ्लोरिडा (अमेरिका) शिफ्ट हो गईं। उनके पिता खुद एक कंप्यूटर इंजीनियर हैं। घर में माहौल ऐसा था कि कंप्यूटर और तकनीक की बातें आम थीं। पिता ने ही कोडिंग को लेकर प्रांजलि के अंदर छुपे प्यार को पहचाना और उसे लगातार बढ़ावा दिया।
स्कूल के दिनों में प्रांजलि का ज्यादातर वक्त कंप्यूटर साइंस और मैथ्स के मुश्किल सवालों को सुलझाने में बीतने लगा। उनका दिमाग इतना तेज था कि बहुत ही कम उम्र में उन्हें फ्लोरिडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी की 'न्यूरल डायनेमिक्स ऑफ कंट्रोल लैब' में इंटर्नशिप करने का मौका मिल गया। वहां उन्होंने मशीन लर्निंग प्रोजेक्ट्स पर काम किया। इतना ही नहीं, उन्होंने ईईजी डेटा का इस्तेमाल करके एडीएचडी के अलग-अलग प्रकारों को पहचानने जैसी जटिल रिसर्च में भी अपनी टीम की बड़ी मदद की।
100 करोड़ का स्टार्टअप
जनवरी 2022 का वक्त था, जब प्रांजलि ने मियामी में 'Delv.AI' की बुनियाद रखी। इसके पीछे एक बहुत ही साफ और नेक सोच थी कि रिसर्च के काम को हर इंसान के लिए आसान और तेज बनाना। असल में Delv.AI एक ऐसा एआई-पावर्ड प्लेटफॉर्म है जो रिसर्च करने वालों की बड़ी सहूलियत देता है। ये प्लेटफॉर्म अकादमिक कंटेंट, पीडीएफ और दूसरे बड़े डॉक्यूमेंट्स से जरूरी जानकारी निकालकर उसकी समरी तैयार कर देता है। ये एक ही वक्त में कई डॉक्यूमेंट्स को सर्च कर सकता है, आपके क्लाउड ड्राइव से सीधा जुड़ सकता है और नतीजों को आसानी से सीएसवी (CSV) फॉर्मेट में एक्सपोर्ट भी कर सकता है। लोगों के लिए इसका एक फ्री प्लान भी है, जबकि ज्यादा फीचर्स चाहने वालों के लिए पेड ऑप्शंस भी मौजूद हैं।
ऐसे मचाया टेक जगत में तहलका
देखते ही देखते Delv.AI ने बाजार में तहलका मचा दिया। इस कमाल के आइडिया पर बैकेंड कैपिटल और विलेज ग्लोबल जैसे इन्वेस्टर्स ने भरोसा जताया और स्टार्टअप ने करीब 4.5 लाख डॉलर (लगभग 3.89 करोड़ रुपये) की फंडिंग जुटा ली। अक्टूबर 2023 आते-आते इस कंपनी की वैल्यूएशन 100 करोड़ रुपये के पार चली गई। रिसर्च से जुड़े लोग इसे इसलिए काफी पसंद करते हैं क्योंकि ये बार-बार किए जाने वाले थकाऊ आरएंडडी कामों को 75% तक कम कर देता है, जिससे उनके कई घंटों की मेहनत बच जाती है।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव


