PM Internship Scheme: अब छोटे शहरों के युवाओं के लिए खुल सकते हैं नए रास्ते, जानिए पूरी डिटेल

Feb 21, 2026 11:26 pm ISTHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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PM Internship Scheme: योजना के तहत चुने गए इंटर्न को हर महीने 5000 रुपये का स्टाइपेंड मिलता है। इसमें से 4500 रुपये सरकार देती है, जबकि 500 रुपये संबंधित कंपनी अपने CSR फंड से देती है।

PM Internship Scheme: अब छोटे शहरों के युवाओं के लिए खुल सकते हैं नए रास्ते, जानिए पूरी डिटेल

देश के युवाओं को काम का असली अनुभव देने के मकसद से शुरू की गई प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना अब एक बड़े बदलाव की तरफ बढ़ती दिख रही है। अब तक इस योजना में सिर्फ बड़ी कंपनियों को शामिल किया गया था, लेकिन जल्द ही चार्टर्ड अकाउंटेंट यानी CA फर्मों को भी इसमें भाग लेने की अनुमति मिल सकती है। अगर ऐसा होता है, तो यह योजना महानगरों से निकलकर छोटे शहरों और कस्बों तक पहुंच जाएगी और हजारों युवाओं को अपने ही शहर में सीखने का मौका मिलेगा।

अभी तक इस योजना में वही कंपनियां शामिल हो सकती हैं जो देश में कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी CSR खर्च करने वाली शीर्ष 500 कंपनियों में आती हैं। इस वजह से योजना का दायरा काफी सीमित रहा। बहुत से ऐसे सेक्टर, जहां असल में युवाओं को ट्रेनिंग की जरूरत है, वे इससे बाहर रह गए। अब सरकार इस दायरे को बढ़ाने पर गंभीरता से विचार कर रही है।

योजना के तहत चुने गए इंटर्न को हर महीने 5000 रुपये का स्टाइपेंड मिलता है। इसमें से 4500 रुपये सरकार देती है, जबकि 500 रुपये संबंधित कंपनी अपने CSR फंड से देती है। इसके अलावा इंटर्न को 6000 रुपये की एकमुश्त सहायता सीधे बैंक खाते में दी जाती है और सरकारी बीमा योजनाओं का भी लाभ मिलता है। यानी यह सिर्फ ट्रेनिंग नहीं बल्कि आर्थिक सहारा भी है, जिससे साधारण परिवारों के छात्र भी इसमें शामिल हो सकें।

समस्या यह थी कि CA फर्मों के पास CSR फंड नहीं होता, क्योंकि वे कॉर्पोरेट कंपनियों की तरह CSR कानून के दायरे में नहीं आतीं। इसी वजह से वे योजना का हिस्सा नहीं बन पा रही थीं। अब इस बाधा को दूर करने के लिए Institute of Chartered Accountants of India यानी ICAI और Ministry of Corporate Affairs के बीच बातचीत चल रही है।

ICAI के अध्यक्ष Prasanna Kumar D ने संकेत दिया है कि पेशेवर फर्में युवाओं को ट्रेनिंग देने के लिए तैयार हैं, बस नियमों में थोड़ा लचीलापन चाहिए।

अगर CSR की शर्त हटती है या उसमें बदलाव किया जाता है, तो देशभर की एक लाख से ज्यादा पंजीकृत CA फर्में इस योजना से जुड़ सकती हैं। इनमें से बड़ी संख्या टियर 2 और टियर 3 शहरों में स्थित है। यही वे जगहें हैं जहां युवाओं को अक्सर बड़े अवसर नहीं मिल पाते और उन्हें महानगरों की तरफ जाना पड़ता है। नई व्यवस्था लागू होने पर छात्र अपने ही शहर में अकाउंटिंग, टैक्सेशन, ऑडिट और कंप्लायंस जैसे व्यावहारिक काम सीख सकेंगे।

सरकार की सोच यह है कि इंटर्नशिप सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित न रहे, बल्कि उन पेशेवर संस्थानों तक भी पहुंचे जो रोजमर्रा में छोटे कारोबारियों और MSME सेक्टर के साथ काम करते हैं। CA फर्में पहले से ही छोटे उद्योगों के लिए वित्तीय सलाह, टैक्स फाइलिंग और कानूनी अनुपालन का काम संभालती हैं। ऐसे में यहां मिलने वाली ट्रेनिंग ज्यादा जमीनी और उपयोगी मानी जा रही है।

केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने भी पेशेवर संस्थाओं के साथ मिलकर छोटे उद्योगों की मदद के लिए शॉर्ट टर्म प्रोग्राम विकसित करने की बात कही थी। सरकार चाहती है कि युवाओं को सिर्फ डिग्री नहीं बल्कि ऐसा कौशल मिले जिससे वे सीधे कामकाज की दुनिया में उतर सकें और MSME सेक्टर को भी प्रशिक्षित मानव संसाधन मिल सके।

ICAI ने एक और महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। संस्थान का मानना है कि अगर किसी इंटर्न को व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाता है, तो उस खर्च को CSR के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए। लेकिन जब वही इंटर्न बाद में नौकरी पर रख लिया जाए, तो उस पर होने वाला खर्च सामान्य व्यावसायिक खर्च माना जाए। इससे कंपनियों और पेशेवर संस्थानों दोनों के लिए व्यवस्था स्पष्ट हो जाएगी।

संस्थान कॉर्पोरेट कंपनियों और मंत्रालय के साथ मिलकर यह भी देख रहा है कि इंटर्नशिप पूरी करने वाले युवाओं को आगे रोजगार के अवसर कैसे मिलें। यानी योजना सिर्फ 12 महीने की ट्रेनिंग तक सीमित न रहे, बल्कि रोजगार की राह भी आसान बनाए।

गौरतलब है कि यह बदलाव लागू हुआ तो योजना का असली असर छोटे शहरों में दिखाई देगा। वहां CA फर्में पहले से ही स्थानीय कारोबार का भरोसेमंद केंद्र होती हैं। ऐसे में छात्र किताबों से बाहर निकलकर वास्तविक फाइलें, टैक्स रिटर्न, बैलेंस शीट और ऑडिट प्रक्रिया समझ सकेंगे। इससे उनकी रोजगार क्षमता सीधे बढ़ेगी। योजना का विस्तार होने से सरकार, पेशेवर संस्थानों और उद्योग जगत के बीच एक नया सहयोग मॉडल बन सकता है, जिसमें सीखने और कमाने का मौका एक साथ मिलेगा।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

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हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

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