PhD : पीएचडी छात्र को 6 माह तक योग क्लास करने की सजा, छात्रवृत्ति की 50 प्रतिशत राशि रुकी
एमएनएनआईटी के एक पीएचडी छात्र को नियमों के उल्लंघन पर नियमित रूप से योग कक्षाओं में भाग लेना होगा। इसके साथ ही उसे अपनी उपस्थिति की रिपोर्ट समय-समय पर देनी होगी।

एमएनएनआईटी यानि मोतीलाल नेहरू एनआईटीने अनुशासनहीनता के एक मामले में पीएचडी शोधार्थी के खिलाफ अनूठी सुधारात्मक कार्रवाई की है। संस्थान के चीफ प्रॉक्टर कार्यालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार शोधार्थी को छह माह तक नियमित रूप से योग कक्षाओं में भाग लेना होगा। इसके साथ ही उसे अपनी उपस्थिति की रिपोर्ट समय-समय पर चीफ प्रॉक्टर कार्यालय में प्रस्तुत करनी होगी। संस्थान का मानना है कि योग के माध्यम से अनुशासन, आत्मसंयम और सकारात्मक व्यवहार को बढ़ावा दिया जा सकता है।
संबंधित पीएचडी छात्र के खिलाफ संस्थान की इंटरनल कम्प्लेन कमेटी (आईसीसी) में शिकायत मिली थी। मामले की जांच और संबंधित पक्षों से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर चीफ प्रॉक्टर कार्यालय ने कार्रवाई का निर्णय लिया। संस्थान ने इसे केवल दंडात्मक नहीं बल्कि सुधारात्मक कदम के रूप में लागू किया है, ताकि छात्र के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाया जा सके।
छात्रवृत्ति की 50 प्रतिशत राशि रुकेगी
आदेश के तहत शोधार्थी को सबसे पहले चेतावनी पत्र जारी किया गया। इसके अलावा अगले छह माह तक उसकी छात्रवृत्ति की 50 प्रतिशत राशि रोकने का भी निर्णय लिया गया है। यह कार्रवाई पीएचडी अध्यादेश के छात्रवृत्ति संबंधी प्रावधानों के अनुरूप की गई है।
हो रहे सुधार पर निगरानी रखी जाएगी
संस्थान का मानना है कि आर्थिक दंड के साथ सुधारात्मक गतिविधियों को जोड़ने से अनुशासन बनाए रखने में मदद मिलेगी। संस्थान ने यह भी तय किया है कि इस कार्रवाई की सूचना शोधार्थी के अभिभावकों, विभागाध्यक्ष (एचओडी) तथा पीएचडी प्रोग्रेस ट्रैकिंग कमेटी (पीटीपी) को भेजी जाएगी, ताकि छात्र की शैक्षणिक और व्यक्तिगत प्रगति पर समुचित निगरानी रखी जा रही है। साथ ही योग कक्षाओं में उसकी नियमित उपस्थिति और अनुशासन का मूल्यांकन भी किया जा रहा है।
चीफ प्रॉक्टर-एमएनएनआईटी प्रो. बसंत कुमार ने कहा कि संस्थान में अनुशासन, सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण और नैतिक आचरण से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। भविष्य में भी ऐसे मामलों में परिस्थितियों के अनुरूप आवश्यक और सुधारात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।


