PhD : भारत में शुरू होगी अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस जैसी प्रोडक्ट बेस्ड पीएचडी, AICTE का ऐलान
अमेरिका, यूके, जर्मनी, फ्रांस की तरह देश में भी अब प्रोडक्ट बेस्ड पीएचडी कराई जाएगी। एआईसीटीई अगले तीन माह में इसकी शुरुआत करने की तैयारी कर रहा है। यह जानकारी एआईसीटीई के चेयरमैन व दिल्ली विवि के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने दी।

अमेरिका, यूके, जर्मनी, फ्रांस की तरह देश में भी अब प्रोडक्ट बेस्ड पीएचडी कराई जाएगी। एआईसीटीई (अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद) अगले तीन माह में इसकी शुरुआत करने की तैयारी कर रहा है। यह जानकारी एआईसीटीई के चेयरमैन व दिल्ली विवि के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने दी। कहा, सिर्फ कागजों में लिखी रिसर्च का लाभ देश को सौ फीसदी नहीं मिलता है। इसलिए प्रोडक्ट बेस्ड पीएचडी में नया उत्पाद या तकनीक विकसित होगी, जिसका सीधा प्रभाव समाज पर पड़ेगा। इसके लिए संबंधित विवि छात्रों को शीड फंड देगा, जिससे वे रिसर्च व नवाचार करेंगे।
छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के 41वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि आए प्रो. योगेश सिंह ने मीडिया से बात की। कहा, नई शिक्षा नीति के तहत इंजीनियरिंग को मातृभाषा हिन्दी या क्षेत्रीय भाषा में पढ़ने की छूट दी गई है। कई प्रदेशों में छात्रों ने अंग्रेजी के अलावा अन्य भाषा में प्रवेश लिया है, लेकिन उनकी संख्या बहुत कम है। इसके पीछे अच्छी जॉब न मिलने का डर है। यह संख्या तभी बढ़ेगी, जब इंडस्ट्री भाषा का मतभेद खत्म कर सिर्फ ज्ञान को तवज्जो देंगी। मैकेनिकल व सिविल जैसी ब्रांच की घटती संख्या के बारे में कहा कि यह समय का उतार-चढ़ाव है। वर्तमान दौर कंप्यूटर का है।
सीयूईटी का परिणाम जल्द जारी होना चाहिए
समर्थ पोर्टल में छात्रों को आ रही दिक्कतों के बारे में उन्होंने कहा कि इस पर बहुत अधिक छात्रों का बोझ है। इसलिए कभी-कभी कुछ दिक्कतें आती हैं। इसके लिए समर्थ से जुड़े सभी विश्वविद्यालयों को अपने स्तर पर एक टीम बनानी चाहिए। फिर भी, समर्थ को और अधिक प्रभावी बनाने की तैयारी है। सीयूईटी परिणाम के इंतजार में अधिकतर छात्रों को न तो दिल्ली विवि मिलता है और तब तक सीएसजेएमयू जैसे विवि की भी सीट फुल हो जाती है। इससे मेधावी छात्र भी अच्छे संस्थान में दाखिले से चूक जाता है। उन्होंने कहा कि सीयूईटी का परिणाम जल्द जारी होना चाहिए।
एआई से हिस्सेदारी बना ली तो खत्म हो जाएगी गरीबी
प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि एआई (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) शिक्षा समेत हर सेक्टर में लागू होगा। यह जरूरी भी है। अगर एआई में हिस्सेदारी बना ली तो देश में गरीबी खत्म हो जाएगी। अगर चूक गए तो फिर विकासशील देशों की भांति परेशान रहेंगे। क्योंकि यह पहला मौका है, जब पूरी दुनिया में एआई क्षेत्र में हम समान स्तर पर खड़े हैं।


