
लेक्चरर को ज्यादा सैलरी देने के लिए PhD की शर्त सही, AICTE के नियम पर दिल्ली हाईकोर्ट की मुहर
कोर्ट ने AICTE के उस नियम को बिल्कुल सही करार दिया है जिसमें उसने सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों में कार्यरत लेक्चररों को 10 हजार रुपये का उच्च शैक्षणिक ग्रेड पे (एजीपी) देने के लिए पीएचडी डिग्री को एक अनिवार्य पात्रता शर्त तय किया है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) के उस नियम को बिल्कुल सही करार दिया है जिसमें उसने सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों में कार्यरत लेक्चररों को 10 हजार रुपये का उच्च शैक्षणिक ग्रेड पे (एजीपी) देने के लिए पीएचडी डिग्री को एक अनिवार्य पात्रता शर्त तय किया है। अदालत ने हायर एकेडमिक ग्रेड पे देने के लिए पीएचडी डिग्री की योग्यता के प्रावधान को बरकरार रखा है।
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और अमित महाजन की खंडपीठ ने कहा, 'पीएचडी योग्यता रखने वाले लेक्चररों और पीएचडी न रखने वाले लेक्चररों के बीच किया गया अंतर मनमाना, भेदभावपूर्ण या भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन नहीं कहा जा सकता। सैलरी बढ़ोतरी और करियर में तरक्की के लिए उच्च शैक्षणिक योग्यताओं का निर्धारण पूरी तरह से वैधानिक विशेषज्ञ संस्था एआईसीटीई के अधिकार क्षेत्र में आता है। न्यायालय इसमें दखल दे, इसका कोई कारण नहीं बनता।'
इसके साथ ही न्यायालय ने दिल्ली सरकार के अधीन कार्यरत उन लेक्चररों द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया जो इस बात से आहत थे कि उनके जूनियर्स (जिनके पास पीएचडी थी) को 10000 रुपये एजीपी दिया गया, जबकि वे स्वयं (पीएचडी न होने के कारण) 9000 रुपये एजीपी पर ही बने रहे।
न्यायालय ने इस बात का भी जिक्र किया कि तकनीकी संस्थानों में लेक्चरर के पद पर नियुक्ति के लिए पीएचडी पहले आवश्यक या अनिवार्य योग्यता नहीं थी। हालांकि बाद में एआईसीटीई ने शैक्षणिक ग्रेड वेतन देने के उद्देश्य से पीएचडी धारक और गैर-पीएचडी लेक्चररों के बीच अंतर किया। कोर्ट ने माना कि एआईसीटीई एक वैधानिक विशेषज्ञ संस्था है और उसे तकनीकी संस्थानों में शिक्षकों की योग्यता, सेवा शर्तें और वेतनमान निर्धारित करने का अधिकार प्राप्त है।
अदालत ने कहा, 'यह व्यवस्था शिक्षकों को उच्च शैक्षणिक योग्यताएं प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से भी की गई है। कानून स्वयं पीएचडी योग्यता रखने वाले और न रखने वाले शिक्षकों की अलग-अलग श्रेणियों को मान्यता देता है और उसी के अनुरूप भिन्न-भिन्न अधिकार प्रदान करता है।'
केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) द्वारा पहले ही लेक्चररों के दावों को खारिज किए जाने के आदेश में कोई खामी न पाते हुए, दिल्ली उच्च न्यायालय ने याचिकाएं खारिज कर दीं।





