PhD : राहत, अब 3 साल में जमा करें पीएचडी की थीसिस, शोधार्थियों को होगा फायदा
एचबीटीयू ने शोधार्थियों के लिए पीएचडी प्रक्रिया बदल दी है। अब छात्र तीन वर्ष में ही थीसिस जमा कर सकेंगे। यह नियम फुल टाइम और पार्ट टाइम दोनों ही शोधार्थियों पर लागू होगा।

हरकोर्ट बटलर प्राविधिक विश्वविद्यालय कानपुर ( एचबीटीयू ) ने शोधार्थियों के लिए पीएचडी प्रक्रिया बदल दी है। अब छात्र तीन वर्ष में ही थीसिस जमा कर सकेंगे। यह नियम फुल टाइम और पार्ट टाइम दोनों ही शोधार्थियों पर लागू होगा। इस पर एकेडमिक काउंसिल ने भी हमति जता दी है। संस्थान में पहले फुल टाइम शोधार्थियों के लिए पीएचडी पूरी करने की न्यूनतम अवधि तीन वर्ष और पार्ट टाइम शोधार्थियों के लिए चार वर्ष निर्धारित थी। शोध कार्य पूरा होने के बाद थीसिस जमा करने के लिए अलग से समय दिया जाता था। इससे छात्र दीक्षांत में भाग नहीं ले पाते थे। नए निर्णय से शोधार्थियों को राहत मिलेगी। इससे शोध कार्य में गति आएगी और समय पर डिग्री प्राप्त करने में आसानी होगी। डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रोफेसर वंदना ने बताया नई व्यवस्था से दीक्षांत समारोह में अधिक संख्या में शोधार्थियों को उपाधि मिल सकेगी
2492 छात्रों को डिग्री, 448 को मिलेगी पीएचडी उपाधि
आईआईटी कानपुर के दीक्षांत समारोह में 2492 छात्र-छात्राओं को डिग्रियां दी जाएंगी। वहीं, 448 छात्रों को पीएचडी उपाधि से सम्मानित किया जाएगा। यह पहला मौका होगा, जब इतनी बड़ी संख्या में छात्रों को पीएचडी मिलेगी। संस्थान जल्द पदकों की सूची जारी करेगा। उन्हें मुख्य अतिथि पदक व डिग्री देकर सम्मानित करेंगे। समारोह के मुख्य अतिथि भारत सरकार के स्पेस विभाग के इन-स्पेस (इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड अथॉराइजेशन सेंटर) के चेयरमैन डॉ. पवन गोयनका होंगे। आईआईटी कानपुर का 59वां दीक्षांत समारोह 15 जुलाई को आयोजित किया जा रहा है। समारोह की तैयारी युद्धस्तर पर चल रही है। इस साल दीक्षांत में 1099 छात्रों को स्नातक की डिग्री, 871 छात्रों को परास्नातक की डिग्री और 492 छात्रों को ई-मास्टर की डिग्री प्रदान की जाएगी।
बिहार में पीएचडी कराने के नियमों में बदलाव
बिहार में पीएचडी कराने के नियमों में बदलाव किया गया है। अब जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में तीन साल से कम समय बचा है, वे नए शोधार्थियों को शोध नहीं करा सकेंगे। यही नहीं एक प्रोफेसर अधिकतम आठ, एसोसिएट प्रोफेसर छह और असिस्टेंट प्रोफेसर चार शोधार्थियों का ही मार्गदर्शन कर सकेंगे। विश्वविद्यालयों में पीएचडी की पढ़ाई अब नये प्रावधानों से ही होगी। राज्यपाल सचिवालय की ओर से जारी बिहार राज्य विश्वविद्यालय पीएचडी अध्यादेश एवं विनियम-2026 में प्रवेश, शोध, मूल्यांकन और डिग्री प्रदान करने की पूरी प्रक्रिया को नये सिरे से निर्धारित किया गया है। पीएचडी शोधार्थियों को सप्ताह में चार से छह घंटे तक शिक्षण या रिसर्च असिस्टेंटशिप का कार्य भी सौंपा जा सकेगा। पीएचडी में प्रवेश केवल यूजीसी-नेट, यूजीसी-सीएसआइआर, नेट और गेट उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को ही मिलेगा। थीसिस जमा करने से पहले शोधार्थी के लिए कम-से-कम एक शोध पत्र प्रकाशित करना और एक राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शोध पत्र प्रस्तुत करना भी अनिवार्य कर दिया गया है। अंतिम मेरिट सूची तैयार करने में 80 प्रतिशत वेटेज नेट-गेट स्कोर और 20 प्रतिशत वेटेज इंटरव्यू को दिया जाएगा। उपलब्ध सीटों के मुकाबले अधिकतम तीन गुना अभ्यर्थियों को ही साक्षात्कार के लिए बुलाया जायेगा।
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Pankaj Vijayपंकज विजय| वरिष्ठ पत्रकार
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15 से अधिक सालों का अनुभव
पंकज विजय ने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की। अमर उजाला समाचार पत्र में रिसर्च, संपादकीय और करियर एजुकेशन जॉब्स डेस्क पर काम किया। यहां उन्हें फीचर लेखन व रिपोर्टिंग का भी मौका मिला। इसके बाद उन्होंने आज तक डिजिटल में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। आज तक वेबसाइट पर राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और एजुकेशन व रोजगार जगत से जुड़ी खबरें लिखीं। इसके बाद एनडीटीवी ऑनलाइन में एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर इस विषय में अपनी समझ को और व्यापक बनाया। एनडीटीवी की पारी के बाद वे लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े और बीते 9 वर्षों से करियर एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर रहे हैं।
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विजन
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विशेषज्ञता
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