Pariksha Pe Charcha 2026: पढ़ाई सिर्फ किताब नहीं, आदत और सोच भी है, छात्रों से क्या बोले PM मोदी

Feb 09, 2026 10:54 am ISTHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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Pariksha Pe Charcha 2026 में पीएम मोदी ने छात्रों को पढ़ाई, आदतों और अनुशासन के जरिए आत्मविश्वास और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।

Pariksha Pe Charcha 2026: पढ़ाई सिर्फ किताब नहीं, आदत और सोच भी है, छात्रों से क्या बोले PM मोदी

परीक्षा के दबाव, करियर की उलझन और भविष्य की चिंता के बीच छात्रों से सीधी बातचीत का मंच Pariksha Pe Charcha 2026 बना। इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पढ़ाई, स्टार्टअप, आर्ट, अनुशासन और विकसित भारत जैसे बड़े मुद्दों पर बेहद आसान और जमीन से जुड़े उदाहरणों के साथ छात्रों को समझाया। कोयंबटूर से लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों से आए सवालों पर पीएम मोदी ने यह साफ किया कि पढ़ाई सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि आदतों, सोच और व्यवहार से मिलकर ही असली शिक्षा बनती है।

स्टार्टअप शुरू करने के लिए कितनी पढ़ाई जरूरी

कोयंबटूर से आए एक छात्र ने सवाल किया कि अपनी कंपनी शुरू करने के लिए कितनी पढ़ाई जरूरी होती है। इस पर पीएम मोदी ने कहा कि सिर्फ डिग्री ही सब कुछ नहीं होती। छात्रों को इंडस्ट्री प्रोफेशनल्स से जुड़ना चाहिए और यह समझना चाहिए कि वे कैसे काम करते हैं।

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि अगर कोई स्टार्टअप करना चाहता है, तो उसे किताबों के साथ-साथ असली दुनिया के अनुभव से भी सीखना होगा। इंडस्ट्री को समझे बिना सिर्फ क्लासरूम नॉलेज से कंपनी खड़ी करना मुश्किल हो सकता है।

पढ़ाई के साथ आर्ट और क्रिएटिविटी का बैलेंस कैसे बने

Pariksha Pe Charcha 2026 में एक छात्र ने यह भी पूछा कि आर्ट, क्राफ्ट और डिजाइन जैसी रुचियों को पढ़ाई के साथ कैसे बैलेंस किया जाए। इस पर पीएम मोदी ने कहा कि पढ़ाई और आर्ट को अलग-अलग न देखें।

उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि अगर कोई छात्र साइंस पढ़ते हुए आर्ट में रुचि रखता है, तो वह दोनों को जोड़ सकता है। जैसे लैब में पढ़े जाने वाले केमिकल्स को कागज पर बोतल बनाकर लिखना, या साइंस के कॉन्सेप्ट को ड्रॉइंग और डिजाइन के जरिए समझना। इससे न सिर्फ पढ़ाई आसान होती है, बल्कि याद रखने में भी मदद मिलती है।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि आर्ट पढ़ाई से होने वाले तनाव और थकान को कम करने का अच्छा तरीका है। रोज़ आधा घंटा या हफ्ते में दो बार आर्ट के लिए समय निकालने से दिमाग तरोताजा रहता है।

विकसित भारत 2047 में युवाओं की भूमिका

एक अन्य छात्र ने सवाल किया कि युवा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में कैसे योगदान दे सकते हैं। इस पर पीएम मोदी ने आदतों पर जोर देते हुए कहा कि देश का विकास सिर्फ बड़ी योजनाओं से नहीं, बल्कि नागरिकों के रोज़मर्रा के व्यवहार से होता है।

उन्होंने सिंगापुर का उदाहरण देते हुए कहा कि वह कभी एक मछुआरों का गांव था, लेकिन आज विकसित देश है। अगर भारत को भी विकसित बनाना है, तो हमें अपनी आदतें बदलनी होंगी। कचरा इधर-उधर न फेंकना, ट्रैफिक नियमों का पालन करना और खाना बर्बाद न करना जैसे छोटे फैसले भी बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि अगर हर परिवार यह तय कर ले कि खाने के बाद कुछ भी बर्बाद नहीं होगा, तो देश में बहुत सारा भोजन बचाया जा सकता है। यही नागरिक जिम्मेदारी विकसित भारत की नींव है।

वोकल फॉर लोकल पर जोर

प्रधानमंत्री ने Pariksha Pe Charcha के दौरान अपने वोकल फॉर लोकल अभियान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब हम देश में बने सामान को खरीदते और बढ़ावा देते हैं, तो यह सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है।

इसके साथ ही उन्होंने Wed in India पहल का भी उल्लेख किया, जिसके तहत लोगों को विदेश की बजाय भारत में शादी करने के लिए प्रेरित किया जाता है। इससे देश के भीतर ही रोजगार और आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं।

सफलता के लिए मोटिवेशन या डिसिप्लिन

छात्रों के एक सवाल पर कि सफलता के लिए मोटिवेशन ज्यादा जरूरी है या डिसिप्लिन, पीएम मोदी ने कहा कि दोनों की अपनी भूमिका है। लेकिन अगर अनुशासन नहीं है, तो सिर्फ मोटिवेशन किसी काम का नहीं रह जाता।

उन्होंने समझाया कि मोटिवेशन शुरुआत करवा सकता है, लेकिन डिसिप्लिन ही उस काम को लगातार आगे बढ़ाता है और सही नतीजे तक पहुंचाता है।

परीक्षा पे चर्चा 2026 का रिकॉर्ड जुड़ाव

परीक्षा पे चर्चा 2026 का सीधा प्रसारण दूरदर्शन के डीडी नेशनल, डीडी न्यूज और डीडी इंडिया चैनलों पर किया गया। इसके अलावा ऑल इंडिया रेडियो, पीएमओ, शिक्षा मंत्रालय, मायगव और स्वयं प्रभा जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी कार्यक्रम लाइव दिखाया गया।

इस साल कार्यक्रम में रिकॉर्ड भागीदारी देखने को मिली। 4।5 करोड़ से ज्यादा छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया, जबकि 2।26 करोड़ से अधिक लोग इससे जुड़ी गतिविधियों में शामिल हुए। कुल मिलाकर 6।76 करोड़ से ज्यादा लोगों की भागीदारी ने परीक्षा पे चर्चा 2026 को अब तक का सबसे बड़ा संस्करण बना दिया।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

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शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव

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