ट्विटर CEO थे पराग अग्रवाल, मालिक बनते ही एलन मस्क ने कर दिया था बाहर; अब कैसे बना लिया 2 बिलियन डॉलर का साम्राज्य
ट्विटर के पूर्व सीईओ पराग अग्रवाल ने साबित कर दिया है कि नौकरी जाने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और दो बिलियन डॉलर का एआई स्टार्टअप खड़ा किया।

इंजीनियरिंग की तैयारी करने वाले लाखों छात्रों के लिए जॉइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन यानी जेईई पास करना जिंदगी का सबसे बड़ा सपना होता है। दिन-रात की मेहनत और किताबों में खोए रहने के बाद जब कोई इस मुकाम तक पहुंचता है, तो लगता है मानो दुनिया मुट्ठी में आ गई हो। लेकिन आईआईटी बॉम्बे से निकले पराग अग्रवाल की कहानी कुछ अलग ही है। उनके लिए जेईई की कामयाबी महज एक पहला कदम था। यह कहानी है एक ऐसे इंसान की जिसने कटिंग-एज रिसर्च से लेकर दुनिया की सबसे बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों में से एक की कमान संभाली। फिर एक दिन अचानक सब कुछ छिन गया। भारी नुकसान और एक बड़े झटके का सामना किया। मगर कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। सिलिकॉन वैली में अपना खुद का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) स्टार्टअप खड़ा करके उन्होंने साबित कर दिया कि कामयाबी का रास्ता कभी सीधा नहीं होता। अगर हौसला हो, तो हर बड़े झटके को एक नई और बेहतरीन शुरुआत में बदला जा सकता है।
AIR 77 से लेकर दुनिया फतह करने का सफर
पराग अग्रवाल ने जब जेईई की परीक्षा दी, तो उन्होंने पूरे भारत में 77वीं रैंक हासिल की थी। यह कोई मामूली बात नहीं थी। इसके बाद उन्होंने देश के सबसे नामी संस्थान, आईआईटी बॉम्बे के कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग प्रोग्राम में दाखिला लिया। पढ़ाई में उनका दिमाग शुरू से ही बहुत तेज था। बी.टेक की डिग्री शानदार नंबरों से पूरी करने के बाद पराग के कदम रुके नहीं। वे आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका चले गए। वहां उन्होंने दुनिया की मशहूर स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में पीएचडी पूरी की। दिलचस्प बात यह है कि अपनी पीएचडी के दिनों में भी पराग सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट, याहू और AT&T लैब्स जैसी दिग्गज कंपनियों में बतौर रिसर्च इंटर्न काम किया। इन्हीं अनुभवों ने उन्हें लार्ज-स्केल कंप्यूटिंग सिस्टम और डिस्ट्रिब्यूटेड टेक्नोलॉजी का उस्ताद बना दिया।
एक इंजीनियर जो ट्विटर के साथ परवान चढ़ा
साल 2011 का वक्त था। ट्विटर सोशल मीडिया की दुनिया में अपने पैर जमा रहा था और उसके पास हजार से भी कम कर्मचारी थे। उसी दौरान पराग ने एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर कंपनी में कदम रखा। उस वक्त किसी ने नहीं सोचा था कि यह आम सा दिखने वाला नौजवान एक दिन इसी कंपनी का बॉस बनेगा। अगले एक दशक तक पराग ने अपनी शानदार कोडिंग और इंजीनियरिंग स्किल्स से सबको हैरान कर दिया। वे कंपनी के सबसे भरोसेमंद और होनहार लीडर्स में गिने जाने लगे। उनकी इसी मेहनत का नतीजा था कि 2017 में उन्हें ट्विटर का चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर (सीटीओ) बना दिया गया। और फिर आया साल 2021 का नवंबर महीना। दुनिया भर की टेक इंडस्ट्री उस वक्त दंग रह गई, जब पराग अग्रवाल को ट्विटर का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया गया। वे ग्लोबल टेक इंडस्ट्री के सबसे युवा सीईओ में से एक बन चुके थे।
अचानक आया वो तूफान जिसने सबकुछ बदल दिया
जिंदगी कभी-कभी ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देती है, जिसकी आपने कल्पना भी नहीं की होती। सीईओ की कुर्सी पर बैठे पराग को अभी मुश्किल से एक साल ही बीता था कि उनके करियर का सबसे बड़ा तूफान आ गया। अक्टूबर 2022 में मशहूर अरबपति और एंटरप्रेन्योर एलन मस्क ने ट्विटर को खरीद लिया। मस्क ने आते ही जो सबसे पहला बड़ा फैसला लिया, वो था कंपनी की टॉप लीडरशिप को बाहर का रास्ता दिखाना। इस छंटनी में पराग अग्रवाल का नाम भी शामिल था। यह खबर पूरी दुनिया में आग की तरह फैल गई। हर कोई यही सोच रहा था कि इतने बड़े सार्वजनिक झटके के बाद अब पराग क्या करेंगे? अमूमन ऐसे झटके किसी भी इंसान के करियर पर हमेशा के लिए दाग लगा सकते हैं या उसे डिप्रेशन में डाल सकते हैं। लेकिन पराग अग्रवाल के लिए यह एक नई किताब का पहला पन्ना साबित हुआ।
हार न मानने को बना ली जिंदगी
ट्विटर से निकाले जाने के बाद पराग किसी दूसरी कंपनी में बड़ी नौकरी ढूंढ सकते थे। उनके लिए मौकों की कोई कमी नहीं थी। लेकिन उन्होंने नौकरी करने के बजाय अपना खुद का रास्ता बनाने की ठानी। साल 2023 में उन्होंने 'पैरेलल वेब सिस्टम्स' नाम से एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) स्टार्टअप की नींव रखी। यह कंपनी एआई एप्लिकेशन और बड़े पैमाने के कंप्यूटिंग सिस्टम के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करने का काम करती है। देखते ही देखते, महज दो सालों के भीतर इस स्टार्टअप ने बड़े-बड़े निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। पब्लिक डोमेन में मौजूद जानकारी के मुताबिक, पैरेलल वेब सिस्टम्स की वैल्यूएशन आज लगभग 2 बिलियन डॉलर आंकी जा रही है। आज यह सिलिकॉन वैली के सबसे तेजी से बढ़ते एआई स्टार्टअप्स में शुमार है।
छात्र अक्सर यह मान बैठते हैं कि कामयाबी एक सीधी लकीर की तरह होती है कि एक अच्छा कॉलेज, फिर एक बढ़िया नौकरी, लगातार प्रमोशन और बस जिंदगी सेट है। लेकिन हकीकत इससे बहुत अलग और पेचीदा होती है। बड़े-बड़े कामयाब लोगों की जिंदगी में भी बुरे दौर आते हैं। नौकरी छूटती है, करियर में अचानक बदलाव आते हैं। जो चीज उन्हें दूसरों से अलग बनाती है, वो यह नहीं है कि वे कभी फेल नहीं होते, बल्कि यह है कि गिरने के बाद वे कितनी तेजी से उठकर दोबारा शुरुआत करते हैं। पराग के लिए ट्विटर का सीईओ बनना महज एक मुकाम था, अंत नहीं।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
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हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
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हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
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काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
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