Success Story: सोशल मीडिया से दूरी, सुबह 5 बजे उठकर की पढ़ाई; 19 साल के ओवैस ने पूरा किया IIT मुंबई का सपना
IIT Success Story: 19 वर्षीय ओवैस मंसूरी ने पहली बार में मनपसंद कॉलेज न मिलने पर हार नहीं मानी। उन्होंने एक साल का ड्रॉप लिया और सागर में सेल्फ स्टडी कर आईआईटी बॉम्बे में अपना दाखिला पक्का कर लिया।

Owais Mansoori Success Story: मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के रहने वाले 19 वर्षीय ओवैस मंसूरी ने अपनी जिद, कड़ी मेहनत और अटूट आत्मविश्वास के दम पर देश के सबसे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान 'आईआईटी बॉम्बे' (IIT Bombay) में जगह बनाकर हर किसी को हैरान कर दिया है। ओवैस ने यह साबित कर दिया है कि अगर आपके सपने बड़े हैं, तो आपको उनसे कभी भी समझौता नहीं करना चाहिए।
8वीं कक्षा में ही देख लिया था इंजीनियर बनने का सपना
ओवैस मंसूरी के मन में इंजीनियर बनने की इच्छा कोई अचानक नहीं जागी थी। उन्होंने जब वह महज आठवीं कक्षा में थे, तभी यह तय कर लिया था कि उन्हें आगे चलकर देश का एक बेहतरीन इंजीनियर बनना है। उनकी नजरें सिर्फ एक ही लक्ष्य पर टिकी थीं— आईआईटी बॉम्बे। इस बड़े सपने को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए उन्होंने अपनी 10वीं की परीक्षा पूरी करने के बाद सीधे देश की कोचिंग हब कही जाने वाली नगरी कोटा का रुख किया और वहां रहकर जेईई (JEE) की गंभीर तैयारी में जुट गए।
जब पहली सफलता से नहीं हुए संतुष्ट, तो लिया एक बड़ा फैसला
कोटा में दिन-रात एक करके पढ़ाई करने के बाद ओवैस ने 12वीं कक्षा के साथ परीक्षा दी। उनका चयन भी हुआ, और उन्होंने पिछले प्रयासों में ओबीसी वर्ग में 38वीं रैंक (कैटेगरी के तहत) जैसी अच्छी स्थिति हासिल की थी। इस प्रदर्शन के आधार पर देश के कई बेहतरीन और प्रतिष्ठित एनआईटी या अन्य संस्थानों में उन्हें आसानी से दाखिला मिल सकता था। लेकिन ओवैस अपने इस परिणाम से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे, क्योंकि उनके दिल और दिमाग में तो सिर्फ आईआईटी बॉम्बे की सिविल इंजीनियरिंग ब्रांच बसी हुई थी।
आमतौर पर छात्र जो भी कॉलेज मिले, उसे लेकर अपनी पढ़ाई शुरू कर देते हैं, लेकिन ओवैस ने एक साहसिक निर्णय लिया। उन्होंने किसी अन्य इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट लेने के बजाय एक साल का ड्रॉप लेने का फैसला किया। इसके बाद वे सागर आ गए और किसी बड़ी कोचिंग के बजाय एक शांत कमरे में रहकर पूरी तरह सेल्फ स्टडी पर ध्यान केंद्रित किया।
सुबह 5 बजे से शुरू होती थी पढ़ाई
ओवैस बताते हैं कि वे रोज सुबह 5:00 बजे उठ जाते थे। पूरे दिन में वह नियमित रूप से 8 से 10 घंटे की गहरी पढ़ाई करते थे। तैयारी के दौरान उन्होंने सबसे बड़ा त्याग डिजिटल दुनिया का किया। उन्होंने सोशल मीडिया फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप से पूरी तरह दूरी बना ली, जो आज के छात्रों के भटकाव का सबसे बड़ा कारण है। जब इस साल का अंतिम परिणाम घोषित हुआ, तो ओवैस मंसूरी ने 1856वीं ऑल इंडिया रैंक के साथ न केवल जेईई परीक्षा को क्रैक किया, बल्कि पहले ही राउंड में उन्हें उनका ड्रीम कॉलेज 'आईआईटी बॉम्बे' और पसंदीदा 'सिविल इंजीनियरिंग' स्ट्रीम मिल गई।
छात्रों के लिए ओवैस की खास सलाह
ओवैस मंसूरी की यह शानदार यात्रा देश के उन लाखों छात्रों के लिए एक बड़ा सबक है जो एक बार असफल होने या कम नंबर आने पर निराश होकर बैठ जाते हैं। ओवैस का मानना है कि परीक्षा में सफलता पाने के लिए सिलेबस को रटने के बजाय कॉन्सेप्ट को गहराई से समझना और लगातार मॉक टेस्ट देना बेहद जरूरी है।
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Prachiशॉर्ट बायो: प्राची लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। पिछले 2 वर्षों से वे करियर, शिक्षा और सरकारी नौकरियों से जुड़े विषयों पर लिख रही हैं। मुश्किल खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी विशेषता है। वे 2024 से लाइव हिन्दुस्तान की करियर टीम का हिस्सा हैं।
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