
केंद्रीय विद्यालयों में 10 हजार से ज्यादा पद खाली, 2014 से हुईं 33 हजार नियुक्तियां; संसद में सरकार का खुलासा
संसद में शिक्षा मंत्रालय की तरफ से बताया गया कि केंद्रीय विद्यालयों में 10,173 पद खाली हैं। 2014 से अब तक 33,350 नियुक्तियां हुईं, पर केंद्रीय विद्यालयों में अब भी ठेका शिक्षकों पर निर्भर है।
केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) में कर्मचारियों की भारी कमी एक बार फिर संसद के जरिए चर्चा में है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने लोकसभा में बताया कि देशभर के केवीएस स्कूलों में 10,000 से भी ज्यादा पद खाली पड़े हैं। दिलचस्प यह है कि 2014 से अब तक 33 हज़ार से अधिक नियुक्तियां हो चुकी हैं, फिर भी नियमित शिक्षकों की कमी दूर नहीं हो सकी है।
स्वीकृत और भरे हुए पदों का हाल
संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक, 1 नवंबर 2025 तक KVS के कुल 56,520 स्वीकृत पद हैं। इनमें से 46,347 पद ही भरे हुए हैं, जबकि 10,173 पद अब भी खाली चल रहे हैं। यह कमी सिर्फ शिक्षकों में ही नहीं, बल्कि गैर-शिक्षण कर्मचारियों में भी साफ दिखती है।
कौन-कौन से पद कितने खाली?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, शिक्षण पद 50,414 स्वीकृत थी जिसमें 41,957 भरे वहीं 8,457 खाली हैं। गैर-शिक्षण पद की बात करें तो 6,106 स्वीकृत थी, जिसमें 4,390 भरे गए वहीं 1,716 खाली हैं। यानी सबसे बड़ा अंतर शिक्षकों की कमी में दिख रहा है।
पद खाली क्यों होते रहते हैं?
मंत्रालय ने कारण भी साफ किए जिसमें नए स्कूल खुलना, रिटायरमेंट, इस्तीफे, प्रमोशन, ट्रांसफर, डेप्यूटेशन पर जाना, और विद्यालयों का अपग्रेडेशन शामिल हैं। इन वजहों से हर साल बड़ी संख्या में पद खाली होते जाते हैं और प्रक्रिया जारी रहती है।
2014 से अब तक 33 हजार से ज्यादा भर्तियां
सरकार ने बताया कि 2014 से 33,350 नियुक्तियां की गईं। सबसे तेज भर्ती 2022-23 में हुई, जब 11,733 शिक्षकों और 614 गैर-शिक्षण स्टाफ की भर्ती की गई। श्रेणीवार नियुक्तियों की बात करें तो सामान्य के 15,702 पद, आर्थिक रूप से पिछड़ों के 1,233 पद, ओबीसी के 8,903 पद, एससी के 5,033 और एसटी के 2,479 पदों पर भर्ती हुई है।
भर्ती के बावजूद संविदा शिक्षकों पर निर्भरता
मंत्रालय ने माना कि नियमित पद खाली रहने के कारण KVS को लगातार संविदा शिक्षकों रखना पड़ते हैं। 2022-23 में इनकी संख्या सबसे ज्यादा 10,462 थी। महामारी के दौरान 2020-21 में कम होकर 3,260 रह गई थी, जबकि 2024-25 में अब तक 6,920 ठेका शिक्षक कार्यरत हैं।
संविदा शिक्षकों क्यों जरूरी?
सरकार के मुताबिक, ये एक अस्थायी व्यवस्था है जिसे स्कूलों की तत्काल जरूरत के अनुसार किया जाता है। इनके लिए कोई पूर्व निर्धारित संख्या तय नहीं होती, क्योंकि इनका मकसद सिर्फ शिक्षण कार्य को बीच में रुकने से बचाना है।
आरक्षण नियमों का पालन किया जा रहा है
सरकार ने यह भी साफ कर दिया कि नियमित भर्तियों में ईडब्ल्यूएस, ओबीसी, एससी, एसटी सभी श्रेणियों के लिए तय आरक्षण नियमों का कड़ाई से पालन होता है। हां, संविधा भर्ती पर ये नियम लागू नहीं होते क्योंकि वे अस्थायी होती हैं।
शिक्षकों की कमी दूर करने के प्रयास
मंत्रालय ने आश्वासन दिया कि शिक्षक कमी खत्म करने के लिए नियमित भर्ती प्रक्रिया तेज की जा रही है। संविदा शिक्षक सिर्फ तब तक लगाए जाते हैं, जब तक नियमित नियुक्तियां नहीं हो जातीं।





